उझानी (बदायूं)। नरऊ ग्राम की सड़कें खस्ताहाल हैं। पानी की सुविधा को इंडिया मार्का हैंडपंप लगे जरूर हैं लेकिन उससे ऐसी दुर्गंध आती है कि बाहर से कोई नाते-रिश्तेदार या फिर परिचित व्यक्ति पहुंचे तो उसे पानी गटकना मुश्किल हो जाता है। यह बात अलग है कि यहां के ग्रामीणों की आदत इसे पीने की हो गई है। इसके अलावा यहां के लोग आर्थिक रूप से भी परेशान हैं। तालाब में उफान के बाद फसलें चपेट में आ जाने से ग्रामीणों के अरमान भी उसके साथ बह गए हैं।
ब्लॉक क्षेत्र के गांव नरऊ की आबादी करीब डेढ़ हजार है। छोटी सी आबादी वाले इस गांव के लोगों की बड़ी समस्याओं पर गौर करें तो सबसे ज्यादा दिक्कत पानी को लेकर है। गांव के एक छोर पर सौ बीघा से अधिक के रकबा में जो तालाब है, उसमें यहां के प्रमुख नालों का पानी पहुंचता है। खासकर बरसात के दिनों में उफान आना स्वाभाविक है लेकिन बिन बारिश जब तालाब उफान पर आता है तो आसपास की सैकड़ों बीघा खेतों में फसलें उसकी भेंट चढ़ जाती हैं। ऐसा ही इस बार भी हुआ है। गांव के रामस्वरूप, मुंशीलाल, रामसिंह, जगदीश, होतीलाल, रामपाल और सियाराम के खेतों में लगी सरसों और गेहूं की फसल तबाह हो गई। सबसे अहम बात तो यह कि तालाब की वजह से हैंडपंपों का पानी भी दूषित हो गया है। यहां लगी अधिकतर स्ट्रीट लाइट फ्यूज हो चुकी हैं तो गलियारों में सीसी और खड़ंजे ने जवाब देना शुरू कर दिया है। करीब सात सौ मीटर के संपर्क मार्ग पर तो पैदल चलना भी मुश्किल है। अफसरों ने उसकी मरम्मत कराने की कोशिश भी नहीं की है।
सबसे ज्यादा फैलते हैं संक्रामक रोग
नरऊ में खासकर गर्मी के दिनों में डायरिया का प्रकोप अधिक रहता है। बीमारी भी दूषित पानी से फैलती है। पिछले साल संक्रामक रोगों की चपेट में 50 से अधिक महिला, पुरुष और बच्चे आ गए थे लेकिन नाले के पानी का रुख दूसरी तरफ मोड़ने का किसी ने प्रयास नहीं किया। स्थिति अब ज्यादा खराब होती जा रही है।
यह बोले ग्रामीण
कोई सुनवाई नहीं करता
तालाब ने खेतों का हाल बेहाल कर दिया है। फसलें कब चौपट हो जाएं, इसी दुविधा में नींद उड़ी रहती है। शिकायत पर भी कोई सुनवाई नहीं की जाती।
- किशोरी देवी
दूषित पानी पीना मजबूरी
दूषित पानी पीते-पीते अब तो आदत सी बन गई है। बीमार पड़ते हैं तो इलाज करा लिया जाता है। पीलिया होता है तो पता लगता है कि लिवर भी चपेट में आ गया।
- सोहन लाल
काटनी पड़ गई थी कच्ची फसल
कुछ दिन पहले तालाब में अचानक ही उफान आया तो पानी का रुख फसलों की ओर हो गया। मेरा खेत तो तालाब के नजदीक है, सो गेहूं की अधपकी फसल ही काट ली है।
-रामस्वरूप
अफसर आकर देखें तो पता चले असलियत
शहर के नजदीकी होने का लाभ ग्रामीणों को कभी भी नहीं मिल पाया। सड़कों की हालत पर भी अफसरों को तरस नहीं आता। वह गांव आकर देखें तो उन्हें परेशानी का अहसास हो।
-महावीर सिंह
तालाब से फसलों को नुकसान और प्रदूषित पेयजल को लेकर जिला स्तर के अफसरों को भी कई बार अवगत कराया, लेकिन हर बार आश्वासन के अलावा कुछ और नहीं मिला।
- शकुंतला देवी, प्रधान