बसों में ‘बेबस’ राहगीर
सर्दी के मौसम में भी टूटे शीशे की दौड़ रही हैं कई बसें भगवान का नाम लेकर करते हैं लोग सफर तय ऐसे ही निभाया जा रहा है बेहतर सेवा देने का वादा अमर उजाला ब्यूरो
बदायूं। सर्दी अपने पूरे यौवन पर है। हर कोई परेशान है,लेकिन इस मौसम में यदि कोई विभाग मस्ती में है तो वह राज्य सड़क परिवहन निगम। यात्रियों को बेहतर सेवाएं देने का वादा तो सरकार करती है, लेकिन निगम की बहुत सी खटारा बसें विभन्न मार्गों पर दौड़ रहीं हैं। किसी में आगे का शीशा नहीं है तो किसी में खिड़कियां ही गायब हैं। अनुमान लगाया जा सकता है कि कड़ाके की ठंड में इन बसों में लोग बेबस होकर किस तरह सफर तय कर रहे होंगे। कहना गलत नहीं होगा कि रोडवेज की खटारा बसों में यात्रियों के जीवन से ही खिलवाड़ किया जा रहा है। प्रतिस्पर्धा का दौर है तो सड़कों पर राज्य सड़क परिवहन निगम भी यात्रियों को बेहतर सेवाएं देने का वादा करता है। निजी लग्जरी बसों में यात्रियों के लिए जहां बेहतर और अच्छी सुविधाएं मिल रहीं हैं,वहीं रोडवेज बसों की हालत बेहद दयनीय है। बात बदायूं डिपो की करें तो दर्जन भर से ज्यादा बसों में अनेक कमियां हैं। इन बसों में सीटें सुरक्षित नहीं हैं तो पूरे शीशे भी नहीं हैं। मामूली कमी होने पर सड़क पर खड़ी हो जातीं हैं। इसी तरह अन्य डिपो की बसें जो कि बदायूं आती हैं उनकी दशा भी अच्छी नहीं है। कुछ बसों में तो चालक के आगे का शीशा तक गायब है। अंदाजा लगाया जा सकता है कि सर्दी के इस मौसम में यदि आगे का शीशा न हो तो किस तरह उसमें यात्री सफर करते होंगे। वे सर्दी से बचने को गर्म कपड़ों से खुद को पूरी तरह से सुरक्षित कर लेते हैं। मुंह पर कपड़ा भी बांध लेते हैं। यदि बसों की ऐसी ही हालत रही तो यात्रियों को दिक्कत भी बढ़ सकती है।
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रोडवेज की आय पर पड़ा असर शुक्रवार को छाये घने कोहरे का असर राज्य सड़क परिवहन निगम बदायूं डिपो की आय पर भी पड़ा है। डिपो के कर्मचारियों ने बताया कि आज काफी कम संख्या में लोग सफर करने को निकले। करीब एक लाख रुपये की आय कम हुई है।
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शीशे अचानक भी टूट सकते हैं। जो बसें ऐसी सामने आती हैं, उन्हें बरेली भेजकर ठीक कराया जाता है। बाकी जो शिकायतें आएंगी, उन्हें निस्तारित कराया जाएगा।
-वीपी निगम, फोरमैन, बदायूं डिपो