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मेडिकल कॉलेज की इमरजेंसी शुरु, भर्ती होने लगे मरीज

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मेडिकल कॉलेज की इमरजेंसी शुरू, भर्ती होने लगे मरीज
फिलहाल सुबह आठ से शाम पांच बजे तक मिलेगी सुविधा अगले महीने आ सकती है एमसीआई की टीम
अमर उजाला ब्यूरो
बदायूं। बदायूं और आसपास के जिलों में रहने वालों के लिए यह अच्छी खबर है। कुछ देरी से सही, लेकिन राजकीय मेडिकल कॉलेज में इमरजेंसी सेवाएं शुरू हो गई हैं। मरीजों को भर्ती किया जाने लगा है। चूंकि व्यवस्थाएं अभी अधूरी हैं, जिससे गंभीर मरीजों को नहीं लिया जा रहा। मरीजों को अभी केवल एक दिन के लिए भर्ती किया जाता है। अभी इमरजेंसी सेवाएं सुबह आठ से शाम पांच बजे तक शुरू की गई हैं। वहीं कॉलेज प्रशासन की ओर से एमसीआई के लिए आवेदन भेजा गया है। एमसीआई की टीम जल्द मेडिकल कॉलेज का निरीक्षण कर सकती है। इसको लेकर कॉलेज प्रशासन पूरी तरह तैयार है।
बदायूं-मथुरा रोड पर गुनौरा वाजिदपुर गांव के पास 20 दिसंबर 2013 को तत्कालीन मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने राजकीय मेडिकल कॉलेज का शिलान्यास किया था। अक्तूबर 2015 में राजकीय मेडिकल कॉलेज की ओपीडी शुरू करा दी गई थी। इसके बाद मेडिकल कॉलेज प्रशासन के आवेदन पर नवंबर 2016 में मेडिकल काउंसिल ऑफ इंडिया की टीम ने यहां दौरा किया। फैकल्टी पूरी न होने की वजह से एमसीआई ने मेडिकल कॉलेज को मान्यता नहीं दी। इसके बाद मेडिकल कॉलेज प्रशासन ने एमसीआई की जरूरत की चीजों को खासा फोकस किया और फिर से एमसीआई की टीम के लिए आवेदन किया। इसको ध्यान में रखते हुए राजकीय मेडिकल कॉलेज में सामान्य बीमारी से ग्रस्त मरीजों के लिए इमरजेंसी शुरू कर दी गई है। जो सुबह आठ बजे से शाम पांच बजे तक खुली रहेगी। इस दौरान मरीजों को भर्ती किया जाएगा। उनका सुबह से शाम तक रूटीन चेकअप, ड्रिप चढ़ाना आदि की प्रक्रिया की जाएगी ताकि एमसीआई की टीम आए तो उसे यह सब ठीक हालत में चलता हुआ मिले।
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प्राचार्य का कहना है कि एमसीआई की टीम मेडिकल कॉलेज में अगले महीने दौरा कर सकती है। उनकी जरूरत के मुताबिक सारी तैयारियां लगभग पूरी हो चुकी हैं। अगर एमसीआई की ओर से मेडिकल कॉलेज को हरी झंडी मिल जाती है तो 2019 में एमबीबीएस की पढ़ाई शुरू हो जाएगी।
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मेडिकल कॉलेज का खुद का अस्पताल न होना खल रहा
राजकीय मेडिकल कॉलेज का खुद का अस्पताल नहीं है। इस वजह से जिला अस्पताल को मेडिकल कॉलेज से संबद्ध कर दिया गया। पिछले बार जब एमसीआई की टीम आई, तो उनके सदस्यों ने मेडिकल कॉलेज के साथ-साथ जिला अस्पताल का भी निरीक्षण किया था। लेकिन उन्हें वहां पर वे सुविधाएं दिखाई नहीं दी जो एक मेडिकल कॉलेज के अस्पताल में होती हैं। सूत्रों की मानें तो मेडिकल कॉलेज को एमसीआई की हरी झंडी नहीं मिलने के पीछे एक वजह यह भी थ क्योंकि कॉलेज को हरी झंडी मिल जाने पर विद्यार्थी जिला अस्पताल में रह कर चीजों को देखते और सीखते है। जो उनके भविष्य के लिए ठीक नहीं था।
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एमसीआई को अभी है इन बातों के पूरा होने की दरकार
राजकीय मेडिकल कॉलेज को शुरू करने के लिए एमसीआई की ओर से हरी झंडी मिल जाए इसके लिए जरूरी है कि मेडिकल कॉलेज में एकेडमिक, ब्वायज हॉस्टल, गर्ल्स हॉस्टल, रेजीडेंट, डॉक्टरों के लिए कमरे समेत कुछ अन्य जरूरी बिल्डिंग और स्टाफ पूरा हो जाए।
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निर्माणदायी संस्था समय से नहीं बना पायी बिल्डिंग
राजकीय मेडिकल कॉलेज में राजकीय निर्माण निगम की ओर से भी जमकर लापरवाही बरती गई है। यही वजह है कि कई मर्तबा समय मिलने के बाद भी वह समय से बिल्डिंग पूरी करके हैंडओवर नहीं कर पाई। इस वजह से अब तक कक्ष में उपकरण पूरी तरह से नहीं लग पाए हैं। जो मेडिकल कॉलेज में अभी बाधा बने हुए हैं।
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वर्जन--
इमरजेंसी सेवा शुरू कर दी गई है। लेकिन अभी यह सेवा सुबह से शाम तक के लिए ही है। सभी जरूरी कागजात एमसीआई के लिए भेज दिए हैं। उम्मीद है कि वह अगले महीने कॉलेज का निरीक्षण करेंगे। हमने अपनी तरफ से पूरी तैयारी कर ली है। मेडिकल कॉलेज में निर्माण दायी संस्था की कार्य प्रगति बहुत हल्की है। जो एक परेेशानी की वजह बनी हुई है।
- प्राचार्य डॉ. आरपी सिंह, राजकीय मेडिकल कॉलेज
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