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उद्योगपति एवं समाजसेवी श्रवण कुमार अग्रवाल नहीं रहे

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उझानी (बदायूं)। कई समाजसेवी संस्थाओं से जुड़े रहे उद्योगपति श्रवण कुमार अग्रवाल का शनिवार तड़के निधन हो गया। वह कई महीनों से बीमार थे। अंतिम सांस बरेली के निजी अस्पताल में ली। उनकी शवयात्रा में व्यापारियों समेत राजनीतिक और सामाजिक लोग भी जुटे। कछला गंगाघाट पर मुखाग्नि उनके ज्येष्ठ पुत्र प्रदेश के पूर्व राज्यमंत्री विमल कृष्ण अग्रवाल ने दी।
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एपीएस फैमिली के प्रमुख सदस्यों में एक श्रवण कुमार अग्रवाल ने शिशु मंदिरों की स्थापना कराने में अहम भूमिका निभाई थी। उनके नाम से महाराजा अग्रसेन श्रवण कुमार अग्रवाल धर्मशाला और संतोष कुमारी श्रवण कुमार अग्रवाल सरस्वती विद्या मंदिर उच्चतर माध्यमिक विद्यालय भी अस्तित्व में आया। उन्होंने ब्रह्मकुमारी ईश्वरीय विश्वविद्यालय के लिए जमीन भी दान में दी थी। करीब डेढ़ दशक तक वह अग्रवाल सेवा समिति के अध्यक्ष रहे। शनिवार को सुबह बरेली से उनका शव पहुंचा तो निवास पर श्रद्धांजलि अर्पित करने के लिए व्यापारी नेताओं के साथ सपा के कई पदाधिकारी भी पहुंचे। शवयात्रा स्टेशन रोड से शाम पांच बजे शुरू हुई। शवयात्रा में काफी भीड़ रही। कछला गंगाघाट पर उनके ज्येष्ठ पुत्र पूर्व राज्यमंत्री विमलकृष्ण अग्रवाल ने चिता को मुखाग्नि दी। उनके तीन बेटों में गोपाल कृष्ण अग्रवाल का उत्तराखंड के किच्छा और छोटे बेटे अनिल अग्रवाल की बरेली में फनसिटी है। पुत्रवधू पूनम अग्रवाल नगर पालिका परिषद की अध्यक्ष हैं। उनके निधन पर अग्रवाल सेवा समिति के पदाधिकारियों में राजकुमार बंसल, विजय गोयल, प्रदीप गोयल, सुरेशचंद्र गोयल, प्रवीण कुमार मित्तल, अरुण अग्रवाल, मधुसूदन गोयल, अमित अग्रवाल, दीपक सिंघल, रमेश चंद्र बंसल, मुरली मनोहर सिंघल, अवनीश गोयल, विनोद अग्रवाल, उदय सिंघल, सचिन अग्रवाल, मनीष गोयल, आलोक अग्रवाल और सत्येंद्र कुमार गोयल ने शोक व्यक्त करते हुए श्रद्धांजलि अर्पित की।
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