करीब साढ़े तीन साल पहले बालिका से किए गए अप्राकृतिक कृत्य के मुजरिम को पॉक्सो एक्ट में दोषी करार देते हुए स्पेशल जज पॉक्सो एक्ट/एडीजे अष्टम देवराज प्रसाद सिंह ने उम्रकैद की सजा सुनाई है। मुजरिम पर 50 हजार का जुर्माना भी लगाया गया है।
यह सनसनीखेज वारदात थाना उसावां क्षेत्र के एक गांव में साढ़े तीन साल पहले घटी थी। एक गांव के व्यक्ति ने एक मई 2015 को रिपोर्ट दर्ज कराई थी कि उसकी पत्नी एक प्रोग्राम को रंगशाला में गई थी। वह अपनी आठ वर्षीय बेटी और बेटे के साथ घर में सो रहा था। इसी बीच गांव नगरिया हुसैनगंज थाना उसावां निवासी बबलू पुत्र ननकू उसे घर में घुस आया। उसकी बेटी को मुंह बंद करके ले गया। बेटी के साथ उसने अप्राकृतिक कृत्य किया। घटना के बारे में किसी को जानकारी नहीं देने के लिए वह बेटी को सौ रुपये दे रहा था,लेकिन उसने नहीं लिया। सुबह जब उसकी पत्नी प्रोग्राम से घर आई तब बेटी ने उसे पूरी घटना के बारे में बताया।
पुलिस ने आरोपी बबलू के खिलाफ कोर्ट में चार्जशीट दाखिल की। स्पेशल जज पॉक्सो एक्ट देवराज प्रसाद सिंह ने पत्रावली पर मौजूद साक्ष्यों का अवलोकन किया। अभियोजन की ओर से एडीजीसी जगत सिंह यादव और बचाव पक्ष के अधिवक्ता की दलील को सुनने के बाद मुजरिम बबलू को दोषी करार देते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई। उस पर 52 हजार रुपये का अर्थदंड भी डाला। आधी धनराशि पीड़िता को देने के भी आदेश दिए।
मुजरिम के समर्थन में दिए थे घर वालों ने बयान
आठ साल की बालिका से हुए अप्राकृतिक कृत्य जैसी घिनौनी घटना के बाद पीड़िता की माता-पिता ने मुजरिम के समर्थन में बयान दिए थे। हालांकि कोर्ट ने उनके बयान को गंभीरता से नहीं लिया।
न्यायाधीश की कड़ी टिप्पणी
न्यायाधीश देवराज प्रसाद सिंह ने अपने आदेश में टिप्पणी की कि वह इस निष्कर्ष पर पहुंचते हैं कि मुजरिम ने जो अपराध किया है वह अतिगंभीर और भयावह भी है। क्योंकि यह अपराध एक आठ साल की बालिका के साथ किया गया है। वह इस मामले में मुजरिम के साथ किसी तरह की रियायत अथवा नरमी बरतने के पक्ष में नहीं हैं।