बदायूं। बरसात का मौसम और जर्जर इमारतें। ऐसा न हो मुंबई जैैसे हालात यहां भी हो जाएं। शहर के कई विद्यालयों से लेकर प्रमुख जगहों पर जर्जर इमारतें हैं। जिस ओर किसी की नजर नहीं जाती।
बरसात का मौसम निकल चुका हैं, लेकिन नगर पालिका प्रशासन अब तक ऐसी इमारतें चिह्नित नहीं कर पाया हैं। अब तक केवल चार इमारतें ही नगर पालिका की ओर से चिह्नित की गई हैं। जबकि शहर में सैकड़ों इमारतें जर्जर हालत में हैं। जबकि पूरे शहर में करीब 28000 हजार मकान पंजीकृत हैं।
कलक्ट्रेट में शहीद स्थल के पास सरकारी कॉलोनी पूरी तरह से जर्जर हैं। लोगों का वहां रहना किसी खतरे से कम नही है। इस सरकारी आवासों पर घासों का झुरमुट भी लटकता है। आवासीय लोगों का कहना है कि सालों से मरम्मत नहीं कराई गई है। रात को बरसात में पानी टपकता हैं।
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लावेला चौक पर कभी भी हो सकता है हादसा
लावेला चौक पर एक इमारत जर्जर हालत में हैं। यहां से रात दिन लोग आते जाते रहते हैं। ये शहर का मुख्य मार्ग हैं। लोगों का कहना है, कि यहां पर ईटें गिरती रहती हैं। यहां रोडवेज, अस्पताल, कचहरी, और डीएम कार्यालय आदि की वजह से आवागमन अधिक रहता हैं। अगर यह भवन गिरा तो हजारों की जान जा सकती है।
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शहर में प्राथमिक विद्यालयों की इमारते हैं जर्जर
मोहल्ला कूबलपुरा के प्राथमिक विद्यालय नंबर एक, दो, तीन की भवन खंडहर हो चुके हैं। वहां शिक्षक बरसात में जैसे तैसे बच्चों की देखभाल कर पाते हैं। ऐसे में पढ़ने बाले बच्चों को भी जान का खतरा हैं। अगर इसको नगर प्रशासन ने गंभीरता से नही लिया तो भी हादसा हो सकता है।
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जर्जर और भवनों को चिह्नित करने का सर्वे चल रहा है। अभी तक चार भवनों को चिह्नित किया जा चुका हैं। इन पर जल्द ही एक्ट के अनुसार कारवाई की जाएगी।
-निशा मिश्रा, अधिशासी अधिकारी
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जर्जर भवनों की देख रेख पालिक प्रशासन की है, अगर ऐसा मामला है तो इसको लेकर संबंधित अधिकारियों से बात करके कारवाई की जाएगी।
-राज कुमार द्विवेदी, नगर मजिस्ट्रेट