बदायूं। नरौरा बैराज से लगातार वाटर डिस्चार्ज की वजह से गंगा ने कई इलाकों में कटान तेज कर दिया है। उसहैत में गंगा पथरामई के पास जमीदाराना और सहसवान में नगला अजमेरी बांध से टकरा रही हैं। हालांकि, अभी बाढ़ जैसे कोई हालात नहीं हैं। बुधवार को नरौरा से गंगा में 43527 क्यूसेक वाटर डिस्चार्ज किया गया। गंगा का मीटर गेज 162.35 के आस-पास बना हुआ है। कटान के चलते कई बीघा जमीन गंगा में समा चुकी है।
जिले में गंगा और रामगंगा में बाढ़ से हर साल 250 से ज्यादा गांव प्रभावित होते हैं। गंगा सहसवान, सदर तहसील और दातागंज के गांवों को प्रभावित करती हैं। रामगंगा सबसे ज्यादा दातागंज तहसील के गांवों में कहर बरपाती हैं। नरौरा से लगातार हो रहे वाटर डिस्चार्ज के चलते गंगा, उसहैत में जमीदाराना और सहसवान में नगला अजमेरी बांध पर कटान कर रही हैं। हालांकि, बाढ़ खंड के मुताबिक स्थिति अभी नियंत्रित है। गंगा का जल स्तर मीटर गेज पर 163.50 के ऊपर पहुंचने के बाद खतरा पैदा होता है। फिलहाल गंगा का मीटर गेज 162.35 के आस-पास बना हुआ है। बाढ़ खंड ने संवेदनशील बांधों पर मरम्मत का काम पहले ही शुरू करा दिया है। नरौरा बैराज के अधिकारियों के मुताबिक हरिद्वार से गुरुवार को गंगा में 1.50 लाख क्यूसेक पानी छोड़ा जाएगा।
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चालू सप्ताह में नरौरा से वाटर डिस्चार्ज
12 जुलाई- 23000
13 जुलाई- 59915
14 जुलाई- 95405
15 जुलाई- 105345
16 जुलाई- 44717
17 जुलाई- 30657
18 जुलाई- 30657
19 जुलाई- 43527
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समय के साथ बाढ़ की चेतावनी देने के पुराने तरीके बदले
अमर उजाला ब्यूरो
दातागंज। समय के साथ बाढ़ की चेतावनी देने और मदद मांगने के तरीकों में भी बदलाव आ गया है। एक जमाना था जब गंगा और रामगंगा के तटवर्ती इलाकों के गांव-गांव में ढोल हुआ करते थे। बाढ़ आने पर यही ढोल बजाकर सूचना दी जाती थी। जहां-जहां तक ढोल की आवाज जाती वहां तक के ग्रामीण समझ जाते कि खतरा है। इसके बाद वे खुद के बचाव के साथ बाढ़ में घिरे लोगों की मदद में जुट जाया करते थे। अब इन ढोल की जगह मोबाइल ने ले ली है। हालांकि, अब भी तमाम गांवों में ढोल तो हैं, लेकिन इनका इस्तेमाल नहीं होता।
जिले के 250 से ज्यादा गांवों में हर साल होने वाला गंगा और रामगंगा का कहर किसी से छिपा नहीं है। पहले गांव के लोग बाढ़ से बचाव के लिए घरों में ट्यूब, लौकी की तोमी रखा करते थे। अब इसकी जगह नावों ने ले ली है। ज्यादातर ग्राम पंचायतों ने भी नाव खरीद ली हैं। नगरिया खनू के प्रधान श्रीकृष्ण, सिमरिया सकतपुर के ओमपाल, गड़िया पैगंबरपुर के पूर्व प्रधान भगवान सिंह, करनपुर पुख्ता के सुरेंद्र फौजी, नवादा मधुकर के अशोक सिंह, रहपुरा के वीरेंद्र सिंह का कहना है कि अब जगह आधुनिकता ने ले ली है। बाढ़ के दिनों में गांव के लोग अपने पालतू जानवरों को छुट्टा छोड़ दिया करते थे। बाढ़ उतरने के बाद यह जानवर घरों को लौट आते थे। नदियों का जलस्तर भी अब वह नहीं रहा। पांच साल पहले तक ही बाढ़ से तबाही होती रही है।