बजरी उखड़ गई तो क्या, ...लो फिर भर देते हैं गड्ढे
उझानी (बदायूं)। मार्निंग वॉक रूट के रूप में लोगों में पहचान बना चुके रेलवे के बंद बसोमा फाटक की ओर जाने वाले रास्ते की महीने भर में पीडब्ल्यूडी को फिर से सुध आ ही गई। उस समय पीडब्ल्यूडी ने आधे-अधूरे गड्ढे भरे थे। जो भर गए, उनके ऊपर बजरी जवाब दे गई थी। शनिवार को पीडब्ल्यूडी के कर्मचारी मशीन के साथ मैटेरियल लेकर पहुंचे तो उन्होंने लोगों को यही बताया कि कोई बात नहीं, अब फिर से काम शुरू कर दिया गया है।
मार्निंग वॉक रूट पर ही पीडब्ल्यूडी के अफसरों की बार-बार कृपा क्यों हो रही है, यह तो वही जानते होंगे लेकिन पिछले महीने पीडब्ल्यूडी कर्मियों ने करीब एक किलोमीटर दायरे में खस्ताहाल गड्ढे भरे थे। करीब एक सप्ताह में ही गड्ढों पर लगे पैबंदों ने जवाब दे दिया तो मामला फिर से अफसरों के संज्ञान में पहुंच गया। बताते हैं जिस सिफारिश पर पहले गड्ढे भरने का काम किया गया था, उन्हें जब इसकी हकीकत का पता लगा तो अफसरों को भी कोप का शिकार हो जाने की आशंका सताने लगी। इसके बाद ही अफसरों ने शनिवार सुबह मैटेरियल भेजकर कर्मचारियों को काम पर लगा दिया। बजरी में कोलतार मिश्रण कर रहे पीडब्ल्यूडी कर्मियों ने बताया कि कुछेक स्थानों पर गड्ढे रह गए थे, उन्हें भरा जा रहा है। सड़क को गड्ढा मुक्त किए जाने का काम दो-तीन तक चलेगा।
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... पर सकरी रोड की सुध नहीं आई
उझानी। बसोमा के पास रेलवे के बंद रेलवे फाटक तक जाने वाले रास्ते को दूसरी बार गड्ढामुक्त किए जाने के लिए तो पीडब्ल्यूडी ने कदम उठा लिया लेकिन इलाके में कई ऐसे संपर्क मार्ग भी हैं जिन पर होकर पैदल चलना भी मुश्किल हो जाता है। इन्हीं में से एक सकरी जंगल रोड भी शामिल है। सकरी रोड पर कई स्थानों पर गहरे गड्ढे हो गए हैं। कछला से ननाखेड़ा तक भी गड्ढों में सड़क का ढूंढ पाना मुश्किल है लेकिन उस ओर पीडब्ल्यूडी अफसरों की नजर नहीं पड़ती।