जिला अस्पताल की ब्लड जांच पर अब नहीं उठेंगे सवाल, सुधरेगी गुणवत्ता
बदायूं। जिला अस्पताल प्रशासन ने ब्लड जांच की गुणवत्ता सुधारने का एक बेहतर प्रयास किया है। अस्पताल में भर्ती मरीजों का ठीक से इलाज हो सके और अस्पताल की जांच रिपोर्ट पर सवाल भी नहीं उठे। चिकित्सक उस पर आंख मूंदकर विश्वास कर सकें। इसके लिए अस्पताल प्रशासन ने ब्लड बैंक में एक एलाइजर रीडर मशीन को लगवाया है। अस्पताल प्रशासन ने दावा किया है कि इस मशीन से ब्लड की जांच सौ फीसदी सही होगी।
अब तक जिला अस्पताल की पैथोलोजी लैब में किट से ब्लड की जांच होती आई है। मरीजों को सुबह ब्लड सैंपल देना होता है। दूसरे दिन जांच रिपोर्ट मिलती है। अस्पताल के कर्मचारी किट से या केमिकल लगाकर शाम पांच बजे तक जांच करते रहते हैं। कभी-कभी लैब में काम इतना आ जाता है कि कर्मचारियों को रात के आठ तक बज जाते हैं। एक दिन में 200 से लेकर 500 मरीजों के सैंपल आ जाते हैं। इस दौरान कर्मचारियों को एक-एक चीज बारीकी से देखनी पड़ती है और खूब माथापच्ची करनी पड़ती है। तब कहीं जाकर जांच रिपोर्ट तैयार होती है। इसके बावजूद अस्पताल की जांच रिपोर्ट पर कई बार सवाल खड़े हो चुके हैं। अस्पताल की जांच रिपोर्ट में कुछ और प्राइवेट लैब में कुछ और रिपोर्ट आती है।
इन समस्याओं के स्थायी समाधान के लिए अस्पताल प्रशासन ने ब्लड बैंक में एलाइजर रीडर मशीन लगवाई है। हालांकि यह मशीन अभी इंस्टॉल नहीं हुई है अस्पताल प्रशासन इसे शुरुआत कराने में लगा है। लैब इंचार्ज डॉ. ओपी गौतम की माने तो इस मशीन से तीन जांच होंगी। इसमें एसआईवी, एचवीएस एजी और एससीवी आदि जांच शामिल हैं। इस मशीन की जांच रिपोर्ट पर सौ फीसदी विश्वास किया जा सकेगा। साथ ही जांच में अधिक समय भी नहीं लगेगा। इसे जल्द से जल्द शुरू कराने के प्रयास किए जा रहे हैं। जल्द ही मरीजों को इसकी सुविधा मिल सकेगी।
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अस्पताल में मशीन लग चुकी है। मशीन की शुरुआत होना शेष है। उसकी जांच रिपोर्ट देख लें, तभी हम मशीन की रिपोर्ट बनाकर भेज देंगे। एलाइजर रीडर मशीन आने से कर्मचारियों को अधिक मेहनत नहीं करनी पड़ेगी और जल्द जांच रिपोर्ट मिल जाएगी।
-उदयवीर सिंह, प्रभारी सीएमएस जिला अस्पताल