हत्या के जुर्म में पिता-पुत्र समेत तीन को आजीवन कारावास
16-16 हजार का जुर्माना भी पड़ा, मुजरिमों में एक मृतक का साढू
तेरह साल पहले संभल जिले के थाना रजपुरा इलाके में घटी थी वारदात
क्रास केस में कोर्ट ने वादी पक्ष को किया बरी, एक मुजरिम की हो चुकी है मौत
अमर उजाला ब्यूरो
बदायूं। करीब 13 साल पहले आपसी रंजिश में की गई एक व्यक्ति की हत्या में मुजरिम रहे पिता-पुत्र समेत तीन लोगों को प्रथम अपर सत्र न्यायाधीश अलका श्रीवास्तव ने आजीवन कारावास की सजा सुनाई गई है। तीनों पर 16-16 हजार का जुर्माना भी डाला है। इनमें एक मुजरिम मृतक का सगा साढू है। मुजरिमों ने दबाव बनाने को क्रॉस केस दर्ज कराया था, जिसमें उन्हें राहत नहीं मिल सकी। कोर्ट ने पीड़ित पक्ष को आरोपों से बरी कर दिया गया है।
हत्या की यह घटना सीमावर्ती जिला संभल के थाना रजपुरा क्षेत्र के गांव गंवा में 21 दिसंबर 2005 को घटी थी। वादी दुर्गाशंकर शर्मा पुत्र गुलाब शंकर शर्मा ने घटना की रिपोर्ट लिखाई थी कि उसका बड़ा बेटा शिवदत्त शर्मा और पुष्कर निरावली गांव जा रहे थे कि रास्ते में घात लगाए बैठे हरीशंकर पुत्र गिरीश चंद्र, विनोद, उमेश पुत्रगण हरीशंकर और विनोद के बेटे पुनीत ने घेर लिया और पुरानी रंजिश के चलते तमंचा और कुल्हाड़ी से ताबड़तोड़ वार करके शिवदत्त और पुष्कर को घायल कर दिया। शिवदत्त की मौके पर ही मौत हो गई थी। पुष्कर गंभीर रूप से घायल हो गया था। मुजरिम उमेश और मृतक शिवदत्त आपस में सगे साढ़ू हैं। चारों के खिलाफ वादी दुर्गाशंकर ने रिपोर्ट लिखाई। दौराने मुकदमा हरीशंकर की मृत्यु हो गई।
अपर सत्र न्यायाधीश अलका श्रीवास्तव ने पत्रावली पर मौजूद साक्ष्यों का अवलोकन किया। अभियोजन की ओर से एडीजीसी प्रेमबाबू और बचाव पक्ष के अधिवक्ता की दलीलों को सुनने के बाद मुजरिम विनोद, उमेश और पुनीत को आजीवन कारावास की सजा सुनाई। तीनों पर 16-16 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया है।
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मामूली कहासुनी पर मुजरिमों ने रंगे खून से हाथ
बदायूं। संभल जिले के थाना रजपुरा क्षेत्र के गांव गवां में तेरह साल पहले हुई हत्या के पीछे मामूली बात पर कहासुनी थी जो बाद में रंजिश में बदल गई।
सगे साढ़ू के बीच विवाद होने से नाते-रिश्तेदार भी इस प्रयास में थे कि उनकी दुश्मनी पर किसी तरह विराम लगवा दिया जाए, लेकिन दोनों पक्षों के बीच दुश्मनी की रार इस कदर बढ़ गई कि उसी में शिवदत्त शर्मा को जान से हाथ धोना पड़ा। हमलावर पक्ष इस प्रयास में भी था कि किसी तरह उन्हें इस मामले से राहत मिल जाए इसके लिए उन्हें पीड़ित पक्ष के खिलाफ भी कोर्ट के जरिए मारपीट का मुकदमा दर्ज करा दिया था। लेकिन उससे भी उन्हें राहत नहीं मिल पाई थी।
मृतक शिवदत्त शर्मा और मुजरिम उमेश शर्मा आपस में सगे साढ़ू थे। शिवदत्त और उसकी पत्नी बेसिक में शिक्षक थे। वादी दुर्गाशंकर शर्मा और उनका घायल बेटा पुष्कर शर्मा हयातनगर इंटर कॉलेज में विषय विशेषज्ञ के पद पर था, जबकि उसकी पत्नी शिक्षामित्र है। बताया गया है कि मुजरिम हरीशंकर शर्मा (दौराने मुकदमा मृतक) और वादी दुर्गाशंकर शर्मा भी आपस में साढू थे। किसी मामूली बात को लेकर दोनों पक्षों में विवाद हो गया था। यह विवाद लगातार बढ़ता हुआ खूनी रंजिश तक पहुंच गया। जिसके चलते शिवदत्त शर्मा की हत्या कर दी गई, जबकि उसके भाई पुष्कर को गंभीर रूप से घायल कर दिया गया था।