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सोमवती अमावस्या पर हर-हर गंगे से गूंजा गंगाघाट
लाखों श्रद्धालुओं ने आस्था की डुबकी लगाकर की पूजा-अर्चना राजस्थान से भी पहुंचे श्रद्धालु, संतों को भेंट की दक्षिणा
अमर उजाला ब्यूरो
उझानी (बदायूं)।
सोमवती अमावस्या पर सोमवार को कछला गंगाघाट आस्था से सराबोर हो गया। हजारों की संख्या में पहुंचे श्रद्धालुओं ने जीवनदायिनी में डुबकी लगाकर पहले सूर्यदेव को अर्घ्य दिया फिर दुग्धाभिषेक भी किया। पूजा-अर्चना का दौर दोपहर बाद तक चला। आसपास इलाके के श्रद्धालुओं की भीड़ में राजस्थानियों की संख्या भी कम नहीं रही। घाट पर हर-हर गंगे गूंजता रहा।
कछला गंगाघाट पर स्नान की शुरुआत तड़के ब्रह्म मुहूर्त में हुई। दूरदराज के श्रद्धालु तो रविवार शाम को ही घाट पर पहुंचने लगे थे। स्नानार्थियों ने गंगा में डुबकी लगाने के बाद घाट पर पूजा-अर्चना की। इस बार किसी एक घाट पर नहीं बल्कि पुल के दोनों ओर करीब आधा किलोमीटर दायरे में स्नान हुुआ। सर्वाधिक भीड़ कासगंज, मथुरा और हाथरस जिले के श्रद्धालुओं के साथ राजस्थान से पहुंचे महिला-पुरुषों की रही। राजस्थान के श्रद्धालुओं ने रीति-रिवाज से बच्चों के मुंडन संस्कार भी कराए। गंगाघाट और आश्रमों में संकीर्तन करके श्रद्धालुओं ने संत-महात्माओं को दक्षिणा भेंट की। दर्जनों श्रद्धालुओं ने कन्याभोज भी कराया। गंगाघाट पर मेले में भी भीड़भाड़ रही। महिलाओं ने बच्चों के खिलौनों समेत घरेलू सामान की खरीदारी की।
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बैसाख में अश्वनि नक्षत्र का संयोग विशेष फलदायक
उझानी। सोमवती अमावस्या यूं तो सोमवार को ही पड़ती है लेकिन करीब 17 साल बाद बैसाख महीना में अश्वनि नक्षत्र का जो संयोग बना है, वह अब 10 साल बाद आएगा। इस दिन गंगा स्नान के बाद पितृ पूजा, पितृ दोष और काल सर्प दोष के लिए पूजन विशेष महत्व रखता है। प्रभुदास प्रवीण जी महाराज ने बताया कि पुराणों में भी सोमवती अमावस्या का वर्णन है। महाभारत में पितामह भीष्म ने युधिष्ठिर को भी इस दिन स्नान का महत्व समझाया था। गंगा समेत पवित्र नदियों में सरस्वती, सिंधु, नर्मदा, गोदावरी और कावेरी आदि में स्नान करने मात्र से कई लाख गुना फल अर्जित होता है। -----------
आठ श्रद्धालुओं को डूबने से बचाया
उझानी। कछला गंगाघाट पर आठ श्रद्धालु हादसे का शिकार होने से बच गए। सुबह आगरा से पहुंचा जोगेंद्र अपने दो बच्चों पांच वर्षीय शनि और सात साल के परम के साथ नहाने पहुंचा। नहाते समय शनि ओर परम गहरे में चले गए। जोगेंद्र के शोर मचाने पर गोताखोरों ने दोनों को बाहर निकाल लिया। राजस्थान में भरतपुर के 25 वर्षीय कमल सिंह और मध्यप्रदेश में ग्वालियर के छोटे लाल की पत्नी रीना (24), रामपुर के अवनीश और वीरेंद्र शर्मा को भी गोताखोरों की मदद से बचा लिया गया। इसके अलावा कासगंज जिले में सोरों के बजरिया मोहल्ले के प्रेमपाल (25) डूब गया। यह देख नाव पर सवार गोताखोरों भी कूद पड़े। उसे बेहोशी की हालत में बाहर निकाला गया। बाद में होश में आने पर घरवाले उसे अपने साथ ले गए।
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बच्चों के मददगार बने राजस्व कर्मी
उझानी। गंगाघाट पर भीड़भाड़ अधिक होने की वजह से नौ बच्चे अपनों से बिछड़ गए। इनमें तीन को तो राजस्व कर्मियों ने अपने कैंप कार्यालय पर बैठा लिया। घरवाले पहुंचे तो बच्चों को उनके हवाले कर दिया गया।
राजस्व कर्मी ओमबाबू नागेंद्र और जियाउर्रमान ने बताया कि घाट और मेले में कुल मिलाकर नौ बच्चे बिछड़ गए थे जो स्नानार्थियों और नगर पंचायत कर्मियों की मदद से उनके अपनों से मिलवा दिए गए। --------------
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बरेली-मथुरा हाईवे पर चार घंटे तक जाम में फंसे रहे वाहन
उझानी। सोमवती अमावस्या के मद्देेनजर पुलिस ने बरेली-मथुरा हाईवे पर वाहनों का आवागमन सुचारू रखने के लिए जो बंदोबस्त किए थे, उनकी सुबह करीब नौ बजे पोल खुल गई। पुल के पास से जाम लगने की शुरुआत हुई तो वाहनों की कतार लगती गई। करीब चार घंटे तक सैकड़ों वाहन जाम में फंसे रहे। कोतवाली पुलिस ने श्रद्धालुओं के वाहनों के लिए पार्किंग की व्यवस्था पुलिस चौकी के नजदीक ही खाली पड़े मैदान में की थी। कार, टेंपो और ट्रैक्टर-ट्रॉलियों को पार्किंग की ओर मोड़ दिया गया। करीब आठ बजे तक तो सब कुछ सामान्य चला लेकिन श्रद्धालुओं की संख्या बढ़ते ही वाहनों की संख्या में इजाफा हुआ तो पुलिस की व्यवस्था जवाब दे गई। इसकी मुख्य वजह डग्गामार वाहनों के चालक रहे। सवारियां बैैठाने के लिए होड़ मची तो वाहन सड़क पर आ गए। देखते ही देखते पुल के आसपास जाम लग गया। जाम में फंसे वाहनों की कतार कछला चौराहे तक दूसरी तरफ कासगंज जिले में सोरों की पुलिस चौकी तक पहुंच गई। नौ बजे से लेकर दोपहर में करीब एक बजे तक हाईवे पर वाहनों के पहिए थमे रहे। बरेली, आगरा, मथुरा, अलीगढ़ और बदायूं की ओर आने-जाने वाले भारी वाहनों के साथ रोडवेज बसें भी जाम में फंसी रहीं। हालांकि इस दौरान पुलिस ने वितरोई मोड़ और कासगंज जिले की सीमा के पास ट्रकों को रोके रखा। बदायूं-एटा के ओर आने-जाने वाले वाहनों को कादरचौक के रास्ते निकाला गया।