अमर उजाला ब्यूरो
दबतोरी। बीधानगला गांव में छह माह पहले शादी होकर आई नवविवाहिता माया को भी घूंघट की ओट में सुबह लोटा गैंग के साथ शौच को जाना पड़ता है। उनका कहना है कि मायके में तो शौचालय है, इसलिए कभी खुले में जाना नहीं पड़ा लेकिन ससुराल में शौचालय न होने के कारण अन्य महिलाओं के साथ घूंघट में खुले में जाना पड़ता है। लज्जा भी महसूस होती है। कई बार ससुराल में शौचालय निर्माण के लिए कहा लेकिन आर्थिक तंगी के चलते संभव नहीं हो पा रहा है। मुसियानगला गांव में भी यहीं स्थिति है। यहां भी लोग खुले में शौच को जाने के लिए मजबूर हैं।
बिसौली तहसील से महज 11 किमी दूर विकास खंड आसफपुर के गांव मुसियानगला और बीधानगला है। यहां हर रोज महिलाओं को मजबूरन खुले में शौच को जाना पड़ता है। कारण सिर्फ एक? यहां शौचालय नहीं है। बीधानगला की बात करें तो पूरे गांव में 375 परिवारों में से मात्र नौ के ही शौचालय बने हैं। जबकि मजरा मोतीपुरा में मात्र दो ही हैं। गांव से मिले मुसियानगला में भी यहीं स्थिति है। यहां 203 परिवार रहते हैं। जबकि शौचालय किसी के पास नहीं है। जबकि अधिकतर परिवार संपन्न हैं। प्रधान अमित के मुताबिक मात्र पांच घरों में ही शौचालय हैं। ग्राम स्तर पर तैनात नोडल अधिकारी भी इसका संज्ञान नहीं लेते हैं। वहीं जिले भर में चलाए जा रहे अभियान का भी यहां कोई असर नहीं नजर आ रहा है। प्रधान अमित का कहना है कि सर्वे कराकर 125 लोगों की सूची तैयार करा ली है। बीधानगला के प्रधान सुनील यादव का कहना है कि जल्द ही शौचालय निर्माण किया जाएगा।
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क्या कहते हैं गांववाले
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-मुसियानगला की कमलेश ने बताया कि बहुत गरीब है और विधवा है। मेहनत मजदूरी करके घर का गुजारा किया जाता है। जमीन भी नहीं है। गरीबी के चलते घर में शौंचालय नहीं बना है। सरकार से कोई मदद नहीं मिली है हम भी चाहते है कि घर में शौचालय बन जाए।
बीधानगला की मुन्नी ने बतायाकि वह भी चाहती हैं कि घर में शौचालय बने लेकिन गरीबी के चलते नहीं बना पाए, हालांकि कई बार प्रयास किया, अब भी जारी है।
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बीधानगला की रीनेश का कहना है कि घर में शौचालय जरूर बनना चाहिए। प्रयास कर रहे हैं। आर्थिक समस्या है। सरकार की ओर से भी कोई मदद नहीं मिली है। परेशानी का सामना करना पड़ता है।
मुसियानगला की धनवती ने बताया कि मजबूरी में खुले में शौच को जाना पड़ता है। आर्थिक मदद मिले तो शौचालय का निर्माण कराया जाए।
बीधानगला की माया ने बताया कि ससुराल में आर्थिक समस्या है। इसलिए शौचालय निर्माण नहीं हो सका है। मजबूरी में खुले में शौच को जाना पड़ता है। मायके में कभी खुले में शौच को नहीं जाना पड़ा। बताया कि छह माह पहले ही उसकी शादी हुई है। सुबह को खुले में जाना अजीब लगता है। कहा कि पूरे प्रयास है कि जल्द से जल्द शौचालय का निर्माण हो सके।