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कंधों पर थ्री स्टार लगे तो गर्व चौड़ा हुआ सीना

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कंधों पर थ्री स्टार लगे तो
गर्व से चौड़ा हुआ सीना
दरोगा से प्रोन्नति पाकर इंस्पेक्टर बनने वालों को एसएसपी ने लगाए थ्री स्टार
पुुलिस लाइन में हुआ कार्यक्रम, ईमानदारी से कर्तव्य निभाने को कहा
अमर उजाला ब्यूरो
बदायूं।
पुलिस लाइन सभागार में गुरुवार को दरोगा से प्रोन्नति पाकर इंस्पेक्टर बनने वालों को एसएसपी ने थ्री स्टार लगाए। इस अवसर पर एसएसपी ने मेहनत और ईमानदारी से अपने कर्तव्यों का निर्वहन करने की सलाह दी।
प्रदेश स्तर से उपनिरीक्षकों की प्रोन्नत सूची जारी की गई है। इनमें से 24 दरोगा बदायूं जिले के हैं। इनमें नौ एसओ की जिम्मेदारी संभाल रहे हैं। इनमें अलापुर एसओ रामप्रसाद, बिल्सी एसओ कृष्णगोपाल शर्मा, दातागंज एसओ ललित मोहन, सहसवान एसओ अनिल कुमार सिरोही, बिनावर एसओ संजय राय, वजीरगंज एसओ अमृतलाल, हजरतपुर एसओ राजेश कश्यप, कादरचौक एसओ सत्यप्रकाश सिंह और इस्लामनगर एसओ रामनरेश सिंह शामिल हैं। इनके अलावा जिले के अलग-अलग थानों में तैनात दरोगा अमित कुमार, वशिष्ठ, सुनीता यादव, कौशल चंद्र, नरेंद्र सिंह, ओमकार सिंह, अवनीश पाल यादव, नरेशपाल, चंद्रपाल, चरन सिंह, कृष्ण सिंह, अशोक कुमार, जगमाल सिंह और ओमकार सोलंकी को भी थ्रीस्टार बनाया गया है।
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गुरुवार को पुलिस लाइन में एसएसपी ने इन सभी नए इंस्पेक्टर को तीसरा स्टार लगाया। स्टार लगाने वाले अधिकारियों में एसपी सिटी और सभी सर्किल के सीओ शामिल थे। एसएसपी ने कहा कि एक और स्टार लगने से अब उनकी जिम्मेदारी बढ़ गई है। उन्हें ज्यादा पारदर्शिता से काम करना चाहिए ताकि पीड़ितों को न्याय मिलने का रास्ता आसान हो।
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टू स्टार रैंकर्स से छिन सकती है थानेदारी
बदायूं। प्रदेश में करीब 2400 नए इंस्पेक्टर बनने से इस रैंक के अधिकारियों की कमी काफी हद तक दूर हो गई है। प्रोन्नत कर नए निरीक्षक बनाए गए इन अधिकारियों के नए तैनाती स्थल के बारे में फिलहाल कोई गाइड लाइन जारी नहीं की गई है। हालांकि माना जा रहा है कि पदोन्नति पाने वाले इन इंस्पेक्टरों को दूसरे जोन और जिलों में ट्रांसफर किया जाएगा। ऐसा हुआ तो उन जिलों से बदायूं के लिए समुचित संख्या में इंस्पेक्टर मिल जाएंगे। इससे उन टू स्टार दरोगाओं को जोर का झटका लग सकता है जो इंस्पेक्टर कम होने के बहाने थानों से कोतवालियों तक का प्रभार संभाल रहे हैं। इनमें भी कोई डायरेक्टर टू स्टार नहीं है। अधिकतर रैंकर हैं जो पंद्रह से बीस साल सिपाही रहने के बाद दरोगा बने हैं और बड़ी घटनाओं में त्वरित निर्णय न ले पाने की वजह से अक्सर बवाल करा बैठते हैं। कई बार इनकी वजह से अधिकारियों की गर्दन फंसती है तो सरकार की भी बदनामी होती है। वहीं, कई मृतक आश्रित में होने की वजह से काबलियत कम होने के बावजूद दरोगा बन गए हैं। बदायूं जिले में करीब पंद्रह थाने इंस्पेक्टर रैंक के प्रभारियों के लिए आरक्षित हैं। जबकि अब तक दो या तीन थानों में ही इंस्पेक्टर तैनात हैं।
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