बदायूं। मथुरा से लखनऊ रूट पर बजट में मंजूर इलेक्ट्रिक ट्रेनों के संचालन के लिए पूर्वोत्तर रेलवे ने सर्वे शुरू करा दिया है। इसके लिए वाराणसी से एनईआर की विद्युतीकरण निर्माण शाखा के इंजीनियरों की टीम ने यहां पहुंचकर सर्वे किया। टीम ने पटरियों की स्थिति के अलावा इलेक्ट्रिफिकेशन और सब स्टेशन बनाने के लिए जमीनों का चिह्नांकन किया। मथुरा से लखनऊ तक कई स्थानों पर सब स्टेशन बनाए जाने हैं।
चालू वित्तीय वर्ष के रेल बजट में मथुरा से लखनऊ रूट पर बड़े महानगरों की तरह इलेक्ट्रिक ट्रेनों के संचालन को मंजूरी मिल चुकी है। इसके लिए अब पूर्वोत्तर रेलवे को इस रूट पर इलेक्ट्रिक ट्रेनों के लायक पटरियां बनानी हैं, साथ ही पूरे रूट का इलेक्ट्रिफिकेशन करना है। रेलवे सूत्रों का कहना है कि इसके लिए हर स्टेशन पर विद्युत सब स्टेशन बनाए जाएंगे। इनका निर्माण और इलेक्ट्रिफिकेशन का काम एनईआर के विद्युतीकरण निर्माण शाखा को करना है। इसके सर्वे के लिए ही शाखा के बनारस स्थित मुख्यालय से इंजीनियरों की टीम यहां पहुंची हुई है। टीम ने पूरे रूट पर सर्वे किया। बदायूं स्टेशन को भी देखा। यहां पर भी एक विद्युत सब स्टेशन बनाया जाना है। इस बाबत स्टेशन अधीक्षक और तकनीकी टीम के साथ राय-मशविरा किया।
बदायूं के स्टेशन अधीक्षक पारस चंद्र प्रवीन ने बताया कि बनारस से आई इंजीनियरों की टीम हर स्तर पर सर्वे कर रही है। इस टीम को सहयोग करने के निर्देश इज्जतनगर मंडल मुख्यालय से मिले हैं इसलिए टीम को बता दिया गया कि वह जहां उचित समझें विद्युत सब स्टेशन बना सकते हैं।
स्टेशन अधीक्षक ने बताया कि सर्वे के दौरान बदायूं से कासगंज और मथुुरा तक की मॉनीटरिंग इंजीनियरों की टीम की ओर से की जा रही है। अभी तो सर्वे की शुरुआत हुई है। बाकी काम सर्वे रिपोर्ट बन जाने के बाद आगे बढ़ेगा।
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इन स्टेशनों से गुजरेंगी ट्रेनें
मथुरा से कासगंज, बदायूं, बरेली, पीलीभीत, मैलानी, लखीमपुर खीरी, ऐशबाग होते हुए इलेक्ट्रिक ट्रेनें लखनऊ पहुंचेंगी। पूर्वोत्तर रेलवे के अधिकारियों का अनुमान है कि यदि काम सही समय पर पूरा हो गया तो अगले दो साल में इलेक्ट्रिक ट्रेनों का संचालन इस रूट पर होने लगेगा। इसका लाभ यह होगा कि यात्री और जल्दी सफर पूरा कर पाएगा। डीजल वाली ट्रेन औसतन 60 किमी प्रतिघंटा की रफ्तार से चलती है लेकिन इलेक्ट्रिक ट्रेनों की रफ्तार 80 से 100 किलोमीटर तक की हो जाएगी।
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ये होंगे इलेक्ट्रिक ट्रेन के लाभ
-इलेक्ट्रिक ट्रेन के संचालन से इंजन फेल होने जैसी दिक्कतें दूर हो जाएंगी। यात्रियों के सफर में समय की बचत होगी, क्योंकि इन ट्रेनों की गति डीजल ट्रेनों से ज्यादा होगी। पॉल्यूशन फ्री ट्रैक होगा, क्योंकि डीजल का इंजन भारी धुंआ छोड़ता है। वहीं, डीजल की खपत घटेगी। दुर्घटनाओं में कमी आएगी। डिब्बे 12 से बढ़कर 20 तक हो जाएंगे।
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कोट
रेलवे बजट में मथुरा से लखनऊ तक इलेक्ट्रिक ट्रेनों के संचालन की मंजूरी हो चुकी है। अब सर्वे कराया जा रहा है। इसके बाद एस्टीमेट बनाकर प्रोजेक्ट मंजूर कराया जाएगा फिर काम शुरू हो जाएगा। सर्वे और एस्टीमेट बनाने का काम तेजी से करने के निर्देश दिए गए हैं ताकि जल्द से जल्द इलेक्ट्रिक ट्रेनें इस रूट पर दौड़ सकें।
-राजेंद्र सिंह, पीआरओ- पूर्वोत्तर रेलवे इज्जतनगर मंडल
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पूर्वोत्तर रेलवे की तरफ से बनारस से विद्युतीकरण निर्माण शाखा के इंजीनियरों की टीम इलेक्ट्रीफिकेशन का सर्वे कर रही है। इसके बाद प्रक्रिया आगे बढ़ेगी ताकि जल्द से जल्द बदायूं रेलवे स्टेशन से भी इलेक्ट्रिक ट्रेनों का संचालन हो सके।
-पारस चंद्र, स्टेशन अधीक्षक, रेलवे स्टेशन बदायूं