दातागंज (बदायूं)। यदि लक्ष्य तय कर लिया जाए और माता-पिता का आशीर्वाद साथ हो तब हर कठिन कार्य भी आसान हो जाता है। कुछ ऐसा ही किया है दातागंज की बिटिया शिप्रा पाठक ने। उन्होंने तीन माह और तीन दिन लगातार पैदल चलकर नर्मदा की परिक्रमा पूरी की है। घर लौटकर आईं शिप्रा से मिलने वालों का तांता लगा है।
दातागंज से चार बार विधायक रहीं संतोष कुमारी पाठक की पौत्री और डॉ.शैलेश पाठक की 33 वर्षीय बेटी शिप्रा पाठक कुछ माह पूर्व नर्मदा की परिक्रमा करने के लिए मुंबई से पैदल निकलीं थीं। वह मुंबई में खुद की इवेंट कंपनी चलाती हैं। मध्य-प्रदेश, गुजरात, छत्तीसगढ़ और महाराष्ट्र की सीमा में स्थित नर्मदा की परिक्रमा करने को उन्होंने साढ़े तीन हजार किमी की यात्रा पैदल की। वहां से कुछ ही दिन पहले वह लौटी हैं।
शिप्रा पाठक ने बताया कि उन्होंने नर्मदा की परिक्रमा का मन बनाया था। इसे पूरा करने को वह 12 नवंबर को सिद्धपीठ ओंकारेश्वर मंदिर से यात्रा को निकल पड़ीं।
शिप्रा ने बताया कि एक दिन में वह करीब 40-45 किमी पैदल चलती थीं। जो भी गांव मिलता था, वहीं पर रात्रि विश्राम करतीं थीं। बोलीं- नर्मदा के आसपास बसे गांवों में परिक्रमा करने वालों को बहुत सम्मान मिलता है। माता-पिता के आशीर्वाद से उनकी यह परिक्रमा पूरी हो गई है। परिक्रमा करने के पीछे वजह बताई कि यह सिर्फ आस्था का विषय है।
इससे पहले भी कई धार्मिक स्थलों की कर चुकी हैं परिक्रमा
शिप्रा ने बताया कि इससे पहले उन्होंने कैलाश मानसरोवर, ब्रज की 84 कोस और अयोध्या में लगातार 24 घंटे होने वाली विशेष परिक्रमा भी की है। इसके अलावा मनकामेश्वर पर्वत पर 10 किमी. की परिक्रमा की।