बदायूं। एआरटीओ कार्यालय के सामने बैठे दलालों को कई बार दौड़ाया गया। करीब एक महीने पहले जेसीबी से दलालों के अड्डे ध्वस्त किए गए थे। मगर दलालों के जंजाल से एआरटीओ कार्यालय को निजात नहीं मिल रही है। इसकी अहम वजह एआरटीओ कार्यालय में बैठे अफसर, कर्मचारी और दलालों का मजबूत गठजोड़ है। ड्राइविंग लाइसेंस बनवाने से लेकर टैक्स जमा करने तक एआरटीओ कार्यालय का कोई भी काम बगैर दलाल के नहीं होता है।
मंगलवार को अमर उजाला टीम का कैमरा एआरटीओ दफ्तर में चला तो दलालों में भगदड़ मच गई। दाएं बाएं खड़े दलाल दस्तावेज छोड़कर भाग गए। कार्यालय परिसर में जाकर देखा तो ड्राइविंग लाइसेंस बनवाने और गाड़ियों का पंजीकरण कराने वाले लाइन में लगे थे। दलाल सीधे बाबुओं की बगल में जाकर अपना काम करा रहे थे। एआरटीओ कार्यालय के मुख्य गेट पर दलालों के अड्डे हैं। जबकि वहीं से एआरटीओ समेत सभी अधिकारी दफ्तर आते जाते हैं। करीब एक महीने पहले कार्यालय के बाहर बने दलालों के फड़ जेसीबी से ध्वस्त कराए गए थे, जो दोबारा बन गए।
ऐसे बनता है ड्राइविंग लाइसेंस
डीएल बनवाने के लिए आवेदन फार्म के साथ तीन फोटो, जन्मतिथि और पते का प्रमाण पत्र सहित 350 रुपये की फीस जमा करके उसके साथ डाक टिकट लगा और अपना पता लिखा एक लिफाफा लगाना होता है। आवेदन तिथि के 15 दिन बाद लर्निंग लाइसेंस आवेदक के घर पहुंच जाता है। लर्निंग के एक महीने के बाद परमानेंट डीएल के लिए आवेदन करना होता है। इसके लिए आवेदन कर्ता को फार्म, दो फोटो और लर्निंग डीएल के साथ एक हजार रुपये फीस चुकानी होती है, जिसके करीब 15-20 दिन बाद लाइसेंस सीधे घर पहुंचता है।
दलालों की फीस एक हजार रुपये
संभागीय परिवहन विभाग में दलाल और लिपिकों का गठजोड़ इतना मजबूत है। कि उनके आगे अधिकारी भी खामोश हैं। साठगांठ के चलते दलाल लर्निंग लाइसेंस के एक हजार और परमानेंट लाइसेंस बनवाने के लिए खुलेआम दो हजार रुपये वसूले रहे हैं। आवेदक अगर अधिकारी से मिलकर सीधे लाइसेंस बनवाना भी चाहें तो दलाल कोई काम नहीं होने देते। आवेदन फार्म से लेकर फीस जमा करने और टेस्ट में फेल हो जाने के डर से आवेदन भी दलालों के फेर में फंस जाते हैं।
रुपये देने के बाद भी नहीं होता काम
अलापुर निवासी राजीव ने बताया कि उनका लर्निंग लाइसेंस बना है, परमानेंट कराने के लिए वह एआरटीओ कार्यालय पहुंचे थे। राजीव के मुुताबिक दलाल से उसने लाइसेंस परमानेंट कराने का खर्चा पूछा तो बताया गया कि दो हजार रुपये में सारा काम हो जाएगा। सिर्फ एक बार आना पड़ेगा। लेकिन अभी तक काम नहीं हुआ।
-अलापुर थाने के पास रहने वाले गोपाल परमानेंट लाइसेंस प्राप्त करने के लिए एक महीने में सात चक्कर एआरटीओ कार्यालय के लगा चुके हैं। लिपिक की अनुपस्थिति होने का हवाला देकर हर बार उन्हें लौटा दिया जाता है। इस मामले की शिकायत गोपाल ने डीएम से भी की है।
दलालों पर शिंकजा कसा जा रहा है। हमारी मौजूदगी में दलाल गायब हो जाते है। यहां आने वाला आवेदक भी सीधे कार्यालय न आकर दलाल से संपर्क करता है। अभियान चलाकर दलालों को फिर खदेड़ा जाएगा। अमिताभ राय, एआरटीओ, प्रवर्तन