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और नहीं बच सकी मनसुखी

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मनसुखी - फोटो : अमर उजाला
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बदायूं/ मूसाझाग।दस दिन अस्पताल में तड़पने के बाद सोमवार रात इलाज के दौरान मनसुखी ने दम तोड़ दिया। उसके पिता चंद्रपाल का ग्राम समाज की जमीन पर कब्जे को लेकर गांव के कुछ लोगों से झगड़ा हुआ था। तभी विरोधी पक्ष के लोगों ने मनसुखी को उठाकर आग में फेंक दिया था। मनसुखी की मौत का पता लगने पर मंगलवार को सुरक्षा के लिहाज से गिधौल गांव में पुलिस तैनात कर दी गई। मूसाझाग थाना क्षेत्र के गांव गिधौल निवासी चंद्रपाल और रामनिवास के बीच ग्राम समाज की थोड़ी सी भूमि को लेकर विवाद चल रहा था। 13 अक्तूबर को विवादित जमीन पर रामनिवास झोपड़ी डाल रहा था। चंद्रपाल ने झोपड़ी डालने का विरोध किया, जिससे झगड़ा हो गया। तभी विरोधी पक्ष के लोगों ने झोपड़ी में आग लगा दी और चंद्रपाल की विवाहित बेटी मनसुखी को जलती आग में फेंक दिया। इसमें वह बुरी तरह झुलस गई थी। उसका बरेली के एक निजी अस्पताल में इलाज चला। वहां उसकी हालत में सुधार न होने 21 अक्तूबर को दिल्ली रेफर कर दिया गया था। सोमवार रात दिल्ली में इलाज के दौरान मनसुखी की मौत हो गई। मंगलवार सुबह इसकी सूचना पहुंची तो मूसाझाग थाना पुलिस अलर्ट हो गई। इस मामले में लापरवाही बरतने और घटना की सूचना उच्च अधिकारियों को न देने पर एसएसपी ने मूसाझाग एसओ रहे प्रवेश पाठक, दरोगा अमित चौधरी और सिपाही अनिल कुमार को सस्पेंड कर दिया था। सीओ निर्मल सिंह को उझानी सर्किल से हटाकर पुलिस लाइंस भेज दिया गया। एसएसपी की सख्ती के बाद मूसाझाग पुलिस हरकत में आई। पुलिस ने मनसुखी को जलाने के आरोपी रामनिवास और उसके बेटे नन्हें के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कर दोनों को जेल भेजा दिया। पीड़ित पिता का आरोप है कि रामनिवास के साथ मारपीट करने में लल्लू यादव, उसके भाई कालीचरन, बंटी, गबलू, आशेष, उसका भाई हरवेश, रामनिवास के अन्य बेटे रोशन, नन्हें और ठाकुर वीरपाल सिंह, डॉ. सतेंद्र भी शामिल थे। उसके बेटे सत्यप्रकाश ने थाने में दी तहरीर में सबके नाम भी लिखे थे। मगर पुलिस ने बाकी लोगों के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की।
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