बदायूं। बंदी की रिहाई को लेकर अदालत के आदेश की अवमानना के मामले में फास्ट ट्रैक कोर्ट द्वितीय ने बड़ा फैसला लिया है। उन्होंने बरेली सेंट्रल जेल के अधीक्षक को बदायूं अपने कोर्ट में शुक्रवार को तलब किया है। उनसे कोर्ट के आदेश का अनुपालन न करने के बारे में पूछताछ की जाएगी।
कोतवाली बिसौली क्षेत्र के गांव सलेमपुर निवासी मुनेश पुत्र मोहरसिंह 21 अक्तूबर 2008 को बिसौली कस्बे में हुई शमशाद की हत्या का आरोपी था। मुनेश के भाई ज्ञान सिंह और पिता मोहर सिंह भी घटना में सह आरोपी थे। शमशाद बिसौली में वेल्डिंग की दुकान चलाता था। आरोप था कि यह लोग शमशाद के प्लाट पर कब्जा कर रहे थे। शमशाद घटनास्थल पर पहुंचा तो इन लोगों ने उसकी गोली मारकर हत्या कर दी थी। तब तीनों पर मुकदमा चला और 23 सितंबर 2016 को फास्ट ट्रैक कोर्ट द्वितीय की न्यायाधीश सोनिका चौधरी ने तीनों को उम्रकैद की सजा सुनाई थी। इनमें से मुनेश और मोहर सिंह को सजा के लिए सेंट्रल जेल भेज दिया गया तो ज्ञान सिंह बदायूं जिला कारागार में ही बंद था। बताते हैं कि इन लोगों ने काफी समय से जमानत के लिए अपने अधिवक्ता भारत सिंह की ओर से हाईकोर्ट में अपील दायर कर रखी थी। नौ नवंबर 2017 को हाईकोर्ट ने इनकी जमानत मंजूर कर ली। तीनों मुजरिमों की जमानत स्वीकार करके रिहाई का आदेश 15 दिसंबर को जारी कर दिया गया। बदायूं जेल से ज्ञान सिंह को रिहा कर दिया गया तो बरेली सेंट्रल जेल से मोहर सिंह को रिहा कर दिया गया। वहीं, मुनेश के रिहाई आदेश में त्रुटि बताकर उसे वापस कर दिया गया। स्थानीय अदालत में कागजात आए तो त्रुटि का सुधार करके रिहाई आदेश दोबारा सेंट्रल जेल भेज दिया गया। इसके बाद भी मुनेश की रिहाई न होने पर उसके अधिवक्ता संजय मिश्र ने कोर्ट में प्रार्थना पत्र देकर इसे अदालत की अवमानना बताया। न्यायाधीश सोनिका चौधरी ने इसे गंभीर मानते हुए बरेली सेंट्रल जेल के अधीक्षक को तलब कर लिया। कहा है कि इस मामले में वह खुद शुक्रवार को कोर्ट में उपस्थित होकर स्पष्टीकरण प्रस्तुत करें।