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जश्न में डूबे सपा समर्थक, नरेश ने बचाई कांग्रेस की लाज

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ख्‍ाुश्‍ाी मनाते समर्थक। - फोटो : अमर उजाला
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उझानी (बदायूं)। नगर पालिका परिषद अध्यक्ष पद के लिए समाजवादी पार्टी से प्रत्याशी पूनम अग्रवाल की जीत की हैट्रिक ने पार्टी के अंदर उनके पति पूर्व राज्यमंत्री विमलकृष्ण अग्रवाल का कद बढ़ा दिया है। यह बात अलग है कि पूनम के टिकट को लेकर शुरू में पसोपेश का माहौल बना था लेकिन सांसद धर्मेंद्र यादव ने उनकी खुले में पैरोकारी करके जिस तरह से विश्वास जताया, वह कायम रहा। जीत के साथ की सपा समर्थकों ने जमकर पटाखे छोड़े और मिठाई बांटकर जश्न भी मनाया। इसके विपरीत कछला नगर पंचायत अध्यक्ष पद पर नरेश यादव की जीत ने जिले में कांग्रेस की लाज बचा ली है।
पूनम अग्रवाल की जीत कार्यकर्ताओं के बीच इसलिए भी महत्वपूर्ण है कि उनके पति विमलकृष्ण अग्रवाल बिल्सी सीट से विधानसभा का चुनाव हार गए थे। हार के कारणों से सबक लेते हुए विमलकृष्ण ने जिस तरह से चुनाव प्रचार की कमान अपने हाथों में ली, वह भी काफी हद तक सफल रही। यह बात अलग है कि इस बार उन्हें मुस्लिम वोटरों का पूरा साथ मिला। पूनम की जीत का अंतर भी पहले के मुकाबले अधिक रहा। वैसे, सपा के अंदर एक बात शुरू में जरूर चली कि उन्हें टिकट नहीं मिलेगा, लेकिन सांसद धर्मेंद्र यादव ने उनके टिकट से लेकर पूरे चुनाव को अपनी प्रतिष्ठा से जोड़ लिया था। राजनीति के जानकारों की मानें तो कार्यकर्ताओं को एकजुट रखने में सपा सांसद ने खासी भूमिका भी निभाई। इसके विपरीत सांसद के सामने सबसे बड़ी दिक्कत कछला में काफी असरदार रहे स्व. कल्यान सिंह उर्फ कल्लू यादव के परिवार को एक मंच पर लाने में आई। कल्लू के बेटों में नरेश यादव और अनिल की राजनीतिक महत्वाकांक्षा अंत तक बरकरार रही लेकिन जीत का सेहरा बतौर कांग्रेस प्रत्याशी नरेश के सिर पर सजा। नरेश के जरिए ही कांग्रेस की लाज भी बच गई है।
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अति आत्मविश्वास बना भाजपा की हार का कारण
उझानी। नगर पालिका परिषद के चुनाव में भारतीय जनता पार्टी ने नए चेहरे के रूप में शंकर गुप्ता पर दांव लगाया था। शंकर गुप्ता ने चुनाव भी पूरी शिद्दत के साथ लड़ा, लेकिन कार्यकर्ताओं के साथ स्थानीय स्तर के नेता उन्हें जमीनी हकीकत से रूबरू कराने की बजाए कुछ इस तरह से आंकड़े समझाते रहे जिससे अति आत्मविश्वास का माहौल बन गया। हालांकि भाजपा ने प्रदेश सरकार में मंत्री स्वामी प्रसाद मौर्य और सुरेश खन्ना समेत पार्टी के कद्दावर नेताओं और विधायकों को प्रचार में लगाकर माहौल अपने प्रत्याशी के पक्ष में करने की पूरी कोशिश की। यहां तक कि पार्टी के बृज प्रदेश के अध्यक्ष बीएल वर्मा ने भी चुनाव में पूरा समय देकर प्रतिष्ठा का प्रश्न बना लिया था। वह खुद भी मतदाताओं के बीच बने रहे थे। वैसे, शंकर गुप्ता का टिकट फाइनल होने से पहले दावेदारों की फेहरिस्त भी काफी लंगी हो गई थी। सूत्रों की मानें कुछेक दावेदार तो अंदरूनी तौर पर खुद को असहज महसूस करने लगे थे।
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