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वाह रे गुरुजी!....कहीं देर से आए...तो कहीं जल्दी छोड़ दिया स्कूल

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बदायूं। तमाम कोशिशों के बाद भी बेसिक शिक्षा के स्कूलों में व्यवस्था नहीं सुधर पा रही है। इन स्कूलों में तमाम कार्यरत उदासीन हैं और शिक्षा की अहमियत भी नहीं समझ रहे हैं, यही वजह है कि सरकारी स्कूलों के हालात सुधरने का नाम नहीं ले रहे हैं। ग्रीष्मकालीन अवकाश के बाद पहले दिन जब बेसिक स्कूल खुले तो तमाम अव्यवस्थाएं हावी रहीं। कहीं स्कूलों से बच्चे गायब रहे, तो कहीं गुरु जी ही पहले दिन स्कूल नहीं पहुंचे। जहां पर पहुंचे भी तो उन्हें स्कूल खोलने और बंद करने का समय नहीं पता था। शिक्षकों ने मनमाने तरीके से स्कूल को खोला और बंद कर वहां से समय से पहले ही खिसक लिए।
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मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने ग्रीष्मकालीन छुट्टी खत्म होने से पहले सरकारी विद्यालयों को 25 जून से स्कूल खोलने के निर्देश दिए थे, ताकि इन पांच दिनों में शिक्षक स्कूल खोलकर साफ-सफाई करने के साथ ही अभिलेखों को दुरुस्त भी कर लें। आदेश मिलने के बाद में सभी बीएसए ने अपने-अपने यहां पर तैनात बीईओ, एबीआरसी को इसकी जानकारी देते हुए शिक्षकों को जानकारी साझा करने के निर्देश दिए, लेकिन 25 जून को काफी परिषदीय विद्यालय नहीं खुल सके। जो खुले भी उनमें अधिकांश विद्यालयों में महज खानापूर्ति की गई। जब सोमवार वह स्कूल खुले, तो कई जगहों पर शिक्षक फाइलों को साफ करते नजर आए। शिक्षकों को यह भी नहीं मालूम था कि स्कूल को कितने बजे खोलना और बंद करना है। ऐसे में कुछ स्कूल सात, तो कुछ आठ बजे खुल सके। कई शिक्षकों ने तो दस बजे तक जाकर स्कूलों खोला।

बिना किताब शुरू हुई पढ़ाई
परिषदीय विद्यालय सोमवार से खुल गए हैं और बच्चे भी स्कूल पढ़ने के लिए पहुंच गए, लेकिन कक्षा आठ के जो बच्चे स्कूल पहुंचे थे, उनके पास में कोई भी किताब नहीं होने की वजह से यूं ही विद्यालय में बैठे रहे। बाद में उठकर चले गए।
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बीईओ, एबीएसए की लापरवाही, शिक्षकों पर पड़ी भारी
-बेसिक शिक्षा विभाग में तैनात बीईओ और एबीएसए को बीएसए की ओर से समय को लेकर देर शाम ही जानकारी दे दी गई थी, ताकि वह समय से शिक्षकों को इसकी जानकारी दे सकें कि उन्हें कब स्कूल खोलना और बंद करना है। लेकिन इनके स्तर से लापरवाही के चलते शिक्षकों को भी परेशानी का सामना करना पड़ा।

शिक्षकों को अपनी जिम्मेदारी पता है। लिहाजा उन्हें शासन की मंशा के अनुरूप विद्यालयों में बेहतर शैक्षिक गुणवत्ता बढ़ाने केे पूर्ण मनोयोग से लग जाना चाहिए। यदि कोई शिक्षक अपने कार्य से जान बूझकर बचना चाहता है या समय से विद्यालय नहीं पहुंचता है, तो ऐसे शिक्षकों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
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-रामपाल सिंह, बीएसए
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