बदायूं। कहने को तो यह चौराहे हैं यहां चार राहें अलग-अलग निकलती हैं। लेकिन जब यहां से निकलने का नंबर आता है तो राहगीरों को कोई राह नहीं दिखाई देती हैं, क्योंकि पूरा चौराहा जाम का झाम में होता है, जिसमें राहगीर फंसकर बहुत देर तक परेशानी झेलता है। सुबह के समय खाली दिखने वाले ये चौराहे दिन निकलते ही राहगीरों की भीड़ और बेतरतीब वाहनों से ऐसे जाम होते हैं कि सब कुछ जाम लगने लगता है। इतना ही नहीं जाम लगने का ये सिलसिला टुकड़ों-टुकड़ों में देर शाम तक जारी रहता है। ऐसे मेें परेशानी तब और बढ़ जाती है, जब यातायात पुलिस कहीं नजर नहीं आती है। तमाम चौराहे तो खाली ही रहते हैं कहीं-कहीं होमगार्ड व्यस्था बनाते नजर आते हैं।
लावेला चौक -
खाली- समय सुबह 06.45 बजे
जाम- दोपहर एक बजे
लावेला चौक पर एक रोडवेज बस खड़ी थी, उसके बावजूद चौराहे पर काफी जगह थी। जहां से आराम से लोगों को आना जाना हो रहा था। चौराहे की चौड़ाई देखते ही बन रही थी, लेकिन सुबह 10 बजे जब दुकानें खुल गई तो स्थिति धीरे-धीरे स्थिति बिगड़ने लगी। चौराहे पर दो होमगार्ड तैनात थे लेकिन वह व्यवस्था को संभालने में नाकामयाब हो रहे थे। दोपहर लगभग एक बजे तो स्थिति ऐसी हो गई कि पैदल निकलना तक दुश्वार हो गया।
पुलिस लाइन चौराहा-
खाली- समय सुबह सात बजे
जाम- दोपहर दो बजे
पुलिस लाइन चौराहे पर सुबह के समय जाम का झाम नहीं था, हालांकि वाहनों का आना-जाना लगा हुआ था। इसके बावजूद वहां पर जाम नहीं लगा रहा है। बड़े वाहनों के अलावा छोटे वाहन भी आसानी से निकल रहे थे। लेकिन दोपहर में यहां चौराहे पर ठेले-खोमचे वाले सड़क किनारे की जगह को घेर कर खड़े गए। इससे वहां पर भी जाम जैसे स्थिति बनने लगी। हालांकि यहां मौजूद ट्रैफिक पुलिस कर्मचारी जाम नहीं लगने देने का प्रयास कर रहा था, लेकिन कभी-कभी स्थिति उनके हाथ से भी निकलती दिखाई दे रही थी।
कश्मीरी चौक सुबह 07.20 बजे
- शहर में सबसे व्यस्तम चौराहे में से एक कश्मीरी चौक है। सुबह साढ़े सात बजे चौराहे से होकर गुजरने वाली चौड़ी सड़क अलग ही दिख रही थी। इस पर आवागमन आराम से हो रहा था। दोपहर का समय होते होते सड़क के दौरान और व्यापारियों ने सड़क पर कब्जा कर लिया, जिस वजह से दोपहर के समय चौराहे पर जाम की स्थिति बन गई। लोग प्रशासन को कोसते नजर आए।
इंद्रा चौक- समय सुबह 07.30 बजे
इंद्राचौक सुबह के समय यहां पर सड़क किनारे कोई दुकान नहीं खुली थी और न ही ठेले, खोमचे वालों ने वहां पर कब्जा किया था। इस वजह से चौराहा एकदम खाली दिख रहा था। दूर-दूर तक जाम की कोई स्थिति नहीं थी, लेकिन दोपहर के समय यहां पर मौजूद होमगार्ड पेड़ की छाव में दूसरी ओर बैठकर आराम कर रहे थे, वहां पर लगने वाले जाम से उनका कोई सरोकार नहीं था। हालांकि जब अधिकारियों की गाड़ी आने की भनक लगती, तब जाकर जाम को खुलवाने की कोशिश करते दिखाई दे रहे हैं।
-ये है स्थिति-
शहर में मुख्य चौराहों और तिराहों की संख्या- 18
ट्रैफिक पुलिसकर्मी -13
इतने की है और जरूरत -12
व्यवस्था संभाल रहे होमगार्ड-32
शहर में कहीं पर भी जाम न लगे, इसके लिए लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। समय-समय पर अभियान चलाकर व्यापारियों, दुकानदारों को समझाया जा रहा है कि वह अपने दुकानों के आगे सामान न रखें और वाहनों को सड़क पर खड़ा न होने दें। अगर उनके दुकानों के सामने सामान रखा होगा और सड़क पर वाहन खड़े होंगे, तो जाम की स्थिति पैदा होगी। इसके बावजूद अगर व्यापारी नहीं मानते हैं, तो उनके खिलाफ समय-समय पर कार्रवाई की जाती है।
-विनय कुमार द्विवेदी, सीओ ट्रैफिक
शहर में जाम की समस्या विकराल बनती जा रही है। उनको लेकर प्लान तैयार किया जा रहा है, ताकि रोज-रोज होने वाली समस्या से निजात मिल सकें। जल्द ही प्लान को लागू किया जाएगा।
-राम निवास शर्मा, एडीएम प्रशासन