मुसलमान भाजपा को सत्ता से हटाना चाहते हैं, लेकिन इसके लिए अपने आप को खत्म नहीं कर सकते। जो लोग मुसलमानों का वोट लेकर उनकी एहमियत को खत्म करना चाहते हैं, उन्हें अपनी सोच बदलनी होगी। अब यही उनके लिए सही होगा। पूर्व दर्जा राज्यमंत्री आबिद रजा ने मंगलवार को बगैर समाजवादी पार्टी के नेताओं पर तीखे शब्दबाण छोड़े।
मंगलवार दोपहर अपने आवास पर पत्रकारों से बातचीत में पूर्व दर्जा राज्यमंत्री आबिद रजा ने कहा कि हम मशवराती काउंसिल में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। आज के राजनीतिक हालात को देखते हुए अल्पसंख्यकों के हक की हिमायत बदायूं से शुरू हुई थी। हमने मिशन मुस्लिम राजनीतिक जागरूकता अभियान अगस्त से चला रखा है। इसी के तहत मशवराती काउंसिल की पहली बैठक 23 अक्तूबर को पूर्व केबिनेट मंत्री आजम खां के नेतृत्व में हुई थी। इसके बाद एक दिसंबर को अयोध्या में हुई। 16 दिसंबर को मेरठ में बैठक होगी। अयोध्या में हुई बैठक में तीन प्रस्ताव जारी किए। एक तो जब गठबंधन या महागठबंधन की मीटिंग हो तो साफ सुधरी छवि के मुसलमानों को मशविरा में शामिल किया जाए। दूसरा यह कि गठबंधन या महागठबंधन के चुनावी घोषणा पत्र की तैयारी के समय काबिले एतिमाद मुस्लिम लीडरान और मशवराती काउंसिल का मशविरा भी ध्यान में रखा जाए। तीसरा यह कि होने वाले गठबंधन या महागठबंधन को ध्यान रखना होगा कि चापलूस, मुल्क और मुस्लिमों के दुश्मन, कमजोर चरित्र, बेईमान और बदनाम व्यक्ति को टिकट न दिया जाए। बिना वजह मुसलमानों एवं उनके अकीदे की तजलील करने वालों को किसी भी हालत में टिकट देने का फैसला न दिया जाए।