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जिला अस्पताल की व्यवस्था ध्वस्त, सड़क तक पहुंचे मरीज

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फोटो-9, 10
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बुखार से जिला अस्पताल की व्यवस्था ध्वस्त, सड़क तक पहुंचे मरीज
शिक्षक भर्ती के लोग भी लगे रहे लाइन में, परेशान रहे मरीज
अमर उजाला ब्यूरो
बदायूं। बुखार ने जिला अस्पताल की व्यवस्थाएं ध्वस्त कर दी हैं। शुक्रवार को बुखार के मरीज पर्चा बनाने के लिए घंटों लाइन में लगे रहे। पर्चा बनवाने वालों की लाइन इतनी लंबी थी कि काउंटर से सड़क तक पहुंच गई। इसकी एक वजह शिक्षक भर्ती के आवेदकों का शामिल होना भी रहा।
जिले में फैले बुखार से जिला अस्पताल में रोजाना पहुंचने वाले मरीजों की संख्या खासी बढ़ गई है। इनमें केवल सर्दी-बुखार से पीड़ित मरीजों की संख्या हजारों में है। इससे जिला अस्पताल की सारी व्यवस्थाएं ध्वस्त हो गई हैं। जिला अस्पताल के सारे बेड फुल हैं। यही नहीं एक-एक बेड पर दो-दो मरीजों का इलाज किया जा रहा है। डीएम दिनेश कुमार के निर्देश पर शुक्रवार को 15 पुराने बेड निकाले गए। डीएम ने 50 फोल्डिंग पलंग खरीदने का निर्देश दिए हैं।
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शुक्रवार सुबह से दोपहर तक के हालात बद से बदतर रहे। सिर्फ पर्चा बनवाने वालों की लाइन ही मुख्य मार्ग तक पहुंच गई। महिलाओं को दो-तीन तीन लाइन लगानी पड़ीं। पुरुषों को पांच लाइन लगानी पड़ीं। इसके बावजूद दोपहर तक यहां भीड़ कम नहीं हुई। इनमें उन लोगों को बेहद परेशानी उठानी पड़ी, जो सर्दी-बुखार से पीड़ित थे। उन्हें शिक्षक भर्ती के लिए मेडिकल प्रमाण पत्र बनवाने के लिए धक्के खाने पड़े। ओपीडी के हालात भी सबसे अधिक खराब रहे।
इमरजेंसी की बात करें तो यहां भी खचाखच मरीजों की लाइन लगी रही। गंभीर मरीजों के आगे बुखार पीड़ितों को संतोष करना पड़ा। परंतु उस दौरान जिला अस्पताल प्रशासन ने कोई दूसरा डॉक्टर इमरजेंसी में नहीं भेजा और न ही कोई वैकल्पिक व्यवस्था की गई।
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शिक्षकों की अलग से नहीं लगवाई लाइन
जिस तरह जिला अस्पताल में शिक्षकों के बीच गंभीर मरीजों को परेशानी उठानी पड़ी। उसी तरह शिक्षक भी पर्चा बनवाने को धक्के खाते रहे। इसके लिए अस्पताल प्रशासन ने कोई लाइन नहीं लगवाई और न ही उसके बारे में विचार किया।
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फोटो---21, 22
इमरजेंसी में तड़पते रहे मरीज, सोता रहा चर्चित डॉक्टर
मरीजों ने किया हंगामा, तो उठाए गए
अमर उजाला ब्यूरो
बदायूं। जिला अस्पताल कोई ऐसे ही बदनाम नहीं है। यहां के हालात और लापरवाही चरम सीमा को लांघ रही हैं। इसकी वजह से मरीजों की हालत बद से बदतर है और अस्पताल की व्यवस्थाएं ध्वस्त हैं। जब दिन में मरीजों को धक्के खाने पड़ सकते हैं, घंटों लाइन में लगना पड़ सकता है तो रात में यहां के क्या हालात होंगे, सोच भी नहीं सकते और यह हालात जिला प्रशासन की नजर से भी दूर हैं। गुरुवार रात के हालात पर गौर करें तो नाइट ड्यूटी पर वही चर्चित डॉक्टर थे, जो खुद को भाजपा विधायक का करीबी बताते हैं। गुरुवार रात करीब एक बजे जिला अस्पताल की इमरजेंसी में एक महिला बेंच पर तड़प रही थी। जबकि दो सामान्य मरीज नीचे स्टूल पर बैठे थे। डॉक्टर का रिश्तेदार फार्मेसिस्ट अधिकारियों की निगेहबानी में था और स्टूल पर बैठे मरीज को स्वयं दवा लिख रहा था। उसके अलावा दो-तीन अन्य कर्मचारी जाग रहे थे। जबकि चर्चित डॉक्टर ईएमओ रूम में गहरी नींद में खर्राटें भर रहा था। काफी देर तक मरीज परेशान रहे तो उन्होंने डॉक्टर को बुलाने की मांग की और हंगामा शुरू कर दिया। इस दौरान इमरजेंसी में मौजूद एक व्यक्ति ने पूरे हालात को अपने मोबाइल के कैमरे में कैद कर लिया। बाद में मामला खुलने के डर से फार्मेसिस्ट ही डॉक्टर को उठाकर लाया। तब कहीं मरीज को भर्ती किया गया। अगर वह व्यक्ति अपने मोबाइल में पूरा वाक्या कैद नहीं करता तो शायद फार्मेसिस्ट ही मरीजों को उल्टी सीधी दवा लिखकर चलता कर देते।
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जानकारी मिली है कि नाइट ड्यूटी में तैनात डॉक्टर सो रहे थे। वैसे अगर कोई मरीज नहीं होता है तो नाइट में डॉक्टर ईएमओ रूम में लेट सकता है। अगर उस समय इमरजेंसी में मरीज थे तो इसकी जांच कराते हैं। तभी आगे की कोई कार्रवाई कराएंगे।
-डॉ. सुकुमार अग्रवाल, प्रभारी सीएमएस जिला अस्पताल
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मरीजों की जिंदगी से खिलवाड़ रहे अवैध पैथोलोजी लैब
मूसाझाग (बदायूं)। जिस तरह क्षेत्र में मरीजों की बाढ़ आ गई है। उसी तरह क्षेत्र में जगह-जगह कई अवैध पैथोलोजी लैब खुल गई हैं। मरीजों को ब्लड जांच के नाम पर लूटा जा रहा है और गलत रिपोर्ट बनाकर उन्हें दी जा रही है। कुछ लोगों की इन्हीं लैब की गलत रिपोर्ट की वजह से जान चुकी है। वह बीमारी कुछ समझते रहे और इलाज कुछ होता रहा।
थाना क्षेत्र के ग्राम मौसमपुर के मुख्य मार्ग पर एक मार्केट बनी है। वहां कई दुकानें हैं और उन्हीं तीन अवैध पैथोलोजी लैब चल रहीं हैं। न तो इनके पास रजिस्ट्रेशन है और न कोई लैब टैक्नीशियन। बस स्वास्थ्य विभाग की मेहरबानी इन पर बनी हुई है। इतना ही नहीं पैथोलोजी संचालकों ने गांव-गांव एजेंट लगा दिए हैं। जो बुखार पीड़ित लोगों के ब्लड सैंपल लेकर आते हैं।
अभी दो दिन पहले इसी लैब के बाहर दातागंज क्षेत्र के गांव सावितगंज निवासी सतेंद्र की हालत बिगड़ गई थी। उसने इसी लैब से ब्लड टेस्ट कराया था। उस रिपोर्ट के आधार पर ही डॉक्टर ने दवा लिखी थी। हंगामा शुरू हुआ तो पैथोलोजी संचालक मौके से फरार हो गया। इसके बावजूद लैब आज भी खुल रही है।
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कई मौतों के बावजूद नहीं सुधरा महकमा
ओरछी। संवेदनशील ब्लाकों के अलावा बुखार आसफपुर ब्लाक क्षेत्र में भी फैला हुआ है। इलाके में सैकड़ों बच्चे बीमार पड़े हैं। एक दिन पहले सुरेनी पापड़ी में दिनेश यादव का पुत्र अखिलेश यादव की मौत हो गई थी। इसके बावजूद स्वास्थ्य महकमे में कोई बदलाव नहीं आया। आज भी सुरेनी पापड़ी में ही उमा, अमित, संगीता, राजवती, श्यामकली, प्रियंका, नीलम, रवि, लता आदि बीमार रहे। वहीं प्रमानंदपुर, खेड़ादास, बझेड़ा, तर्कपरौली आदि गांवों में वायरल फैला हुआ है।
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बीधानगला में निकले 206 बुखार पीड़ित
दबतोरी। आसफपुर विकासखंड क्षेत्र के ग्राम बीधानगला गांव में शुक्रवार सुबह स्वास्थ्य विभाग टीम पहुंची। टीम को लगभग 140 बुखार पीड़ित मरीज मिले। जबकि 206 लोगों का स्वास्थ्य परीक्षण करके दवा बांटी गई। इस दौरान लगभग चार दर्जन बुखार पीड़ित लोगों के ब्लड सैंपल लिए गए।
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गांव नहीं पहुंची एंटी लार्वा कीटनाशक दवा
कुंवरगांव। क्षेत्र के हसनपुर गांव में स्वास्थ्य विभाग की टीम ने शुक्रवार सुबह कैंप लगा कर दवाएं बांटी। डॉ. अवधेश पटेल ने बताया 114 लोगों को दवा का वितरण किया गया। गांव के काफी लोगों का बदायूं के निजी अस्पताल में इलाज चल रहा है। ग्राम हसनपुर के प्रधान हसमत अली ने बताया कि उन्हें एंटी लार्वा कीटनाशक दवा नहीं मिली है। जिससे दवा का छिड़काव नहीं हो सका।
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भगता नगला में घर-घर बांटी दवा
जरीफनगर। प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र दहगवां की टीम शुक्रवार को भगता नगला गांव पहुंची। टीम ने दवाइयां बांटी और उनके सैंपल लिए। डॉ. हरिनिवास यादव ने घर-घर जाकर लोगों से बात की और स्वास्थ्य चेकअप कर दवा दी। इस दौरान उनके साथ शेखर प्रताप, रिशी कुमार, सुरेश परमार, संतोष, कंचन रानी का सहयोग रहा।
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बुखार की चपेट में आ चुके हैं कई गांव
आसफपुर। जिलेभर के कई ब्लाकों में फैले बुखार ने आसफपुर क्षेत्र में भी दस्तक दे दी है, जिसके चलते टोडरपुर के 11 वीं के छात्र की मौत हो गई। जबकि इस गांव में लगभग दो दर्जन से लोग बुखार से जूझ रहे हैं। इसके अलावा ग्राम नरौरी नरौरा, सिसरका, पहाड़पुर, बीघनागला, अजीतपुर आदि दर्जन भर गांव में बुखार का कहर जारी है। ----------------
क्या कहते हैं डॉक्टर
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अब तक जितने भी मरीज मेरे पास आए। मैंने सभी के ब्लड टेस्ट कराए। उनमें अधिकतर मरीज मलेरिया के ही निकले। इससे बचाव के लिए मच्छरदानी का प्रयोग अवश्य करें। अन्यथा इस समय कोई गारंटी नहीं है कि कब बुखार आ जाए।
-डॉ. आशु अग्रवाल, फिजीशियन जिला अस्पताल

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इस समय जो बीमारी फैल रही है। उसका मुख्य कारण गंदगी में पैदा हुए मच्छर हैं। बरसात का मौसम चल रहा है। जगह-जगह जलभराव है। अगर नालियों में एंटी लार्वा का छिड़काव किया जाए और मच्छरदानी का उपयोग किया जाए तो निश्चित ही बुखार नहीं होगा।
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-डॉ. मोहित यादव, ईएमओ जिला अस्पताल


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इस समय बुखार तो है ही, साथ ही मरीजों में खून की कमी मिल रही है। इस समय इमरजेंसी में ही तीन बुखार पीड़ित मरीज ऐसे हैं, जिन्हें ब्लड की सख्त जरूरत है। उनके ब्लड डोनेट करने वाला कोई नहीं है। मरीज का क्या होगा, उसकी जान चली जाएगी ही। इसलिए पहले ब्लड टेस्ट कराएं और उसके आधार पर इलाज तुरंत शुरू कराएं।
-डॉ. एनके सिंह, फिजीशियन जिला अस्पताल
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