मौसम में रोजाना उतार-चढ़ाव की वजह से गेहूं उत्पादकों की मुसीबत कम होने का नाम नहीं ले रही है। बुधवार रात को तेज हवाओं के साथ बूंदाबांदी हुई तो फिर किसानों की धड़कन तेज हो गई। सुबह किसान आसमान को ताकते रहे। बूंदाबांदी से फसल में नमी की वजह से गुरुवार को पूरे दिन गेहूं की कटाई रुकी रही।
गुरुवार सुबह किसान खेतों पर पहुंचे तो फसल में उम्मीद से अधिक नमी थी। कटाई के लिए बुलाए गए मजदूरों को भी लौटा दिया गया। चार-पांच दिन से तीन बार बूंदाबांदी हो चुकी है। किसानों का कहना है कि फसल सूख कर कटने लायक हो, उससे पहले ही बूंदे पड़ जाने से नमी बढ़ जाती है। हालांकि दोपहर में तेज धूप निकली लेकिन दिन ढलते-ढलते फिर से आसमान में काले-काले बादल उमड़ने लगे। बता दें कि दो बार आंधी आने और एक बार तेज बरसात की वजह से गेहूं की फसल को करीब 20 फीसदी तक नुकसान हो चुका है। मौसम कब किस ओर करवट ले ले, इसे लेकर भी किसानों की धड़कने बढ़ी हुई हैं। किसानों की रात की नींद भी गायब हो गई है। सबसे ज्यादा आशंका बरसात होने के साथ ओलावृष्टि को लेकर भी बनी रहती है। फसल पक कर तैयार है। ऐसे में ओलावृष्टि सबसे ज्यादा नुकसान दायक साबित होगी।
दो दिन मौसम साफ रहा तो होगी गहाई शुरू
उझानी। जिले में कई स्थानों पर वर्षा और बूंदाबांदी की वजह से गेहूं की फसल की कटाई के साथ दो-तीन पहले कट चुकी फसल की गहाई भी प्रभावित हो गई थी। किसानों महावीर सिंह का कहना है कि गेहूं की गहाई शुरू होने में अभी दो दिन लगेंगे। गेहूं की पुलियां नम हो जाने से उनकी थ्रेसिंग नहीं हो सकती।
गेहूं उत्पादकों को सारे कामकाज छोड़ कर फसल की ओर ध्यान देना चाहिए। मौसम में सुधार के साथ मौका मिलते ही पहले कटाई फिर गहाई शुरू कर देनी चाहिए। जरूरी नहीं कि सभी खेतों की फसल को इकट्ठा करके ही गहाई कराई जाए। मौसम किसी भी समय फिर से खराब हो सकता है।
- डॉ. संजय कुमार, कृषि वैज्ञानिक