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Budaun News: चूरन के धोखे में खा ली चूहा मार दवा, 15 साल के किशोर की मौत

Tue, 28 Feb 2023 05:13 PM IST
मुकेश कुमार संवाद न्यूज एजेंसी, बदायूं

सार

उझानी कोतवाली क्षेत्र के गांव अब्दुल्लागंज निवासी इरफान शाह के पुत्र जाहुल शाह ने चूरन के धोखे में चूहा मार दवा रख ली। जब उसकी हालत बिगड़ी तो परिजन उसको अस्पताल ले गए। वहां से उसे राजकीय मेडिकल कॉलेज भेज दिया गया, जहां उसकी मौत हो गई। 
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पोस्टमार्टम हाउस के बाहर मृतक के परिजन - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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बदायूं के उझानी क्षेत्र में 15 साल के किशोर ने चूरन के धोखे में चूहा मार दवा खा ली। उल्टियां होने के साथ उसकी हालत बिगड़ी तो घरवाले उसे लेकर निजी चिकित्सक के पास पहुंचे। किशोर को राजकीय मेडिकल कॉलेज में भर्ती कराया गया, लेकिन इलाज के दौरान सोमवार रात उसकी मौत हो गई। मृतक के पिता की सूचना के बाद पुलिस ने उसके शव का पोस्टमार्टम कराया। 
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उझानी कोतवाली क्षेत्र के अब्दुल्लागंज गांव निवासी इरफान ने बताया कि घर में चूहा मार दवा और चूरन का पाउच एक ही अलमारी में रखा था। उसका बेटा जाहूल शाह शाम करीब पांच बजे खेलने के लिए घर से बाहर निकल गया था। डेढ़-दो घंटे बाद वह लौटा और कमरे में चला गया। वह अक्सर चूरन खाता था, इसलिए दो-चार पाउच उसने अलमारी में रख दिए थे। चूहा मार दवा का पाउच पहले से ही रखा था। 

मेडिकल कॉलेज में तोड़ा दम 

जाहूल ने धोखे से चूहा मार दवा खा ली। इरफान उस वक्त घर पर नहीं था। परिजनों की सूचना पर इरफान घर आ गया। उल्टियां होने पर वह उसे लेकर गांव में ही निजी चिकित्सक के पास पहुंचा। इसके बाद परिवार के लोग उसे लेकर राजकीय मेडिकल कॉलेज चले गए। उपचार के दौरान देर रात जाहूल की मौत हो गई। 
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सूचना के बाद पुलिस भी अस्पताल पहुंच गई। पुलिस ने शव कब्जे में ले लिया। प्रभारी निरीक्षक मनोज कुमार सिंह ने बताया कि जाहूल की मौत जहरीला पदार्थ खाने से हुई है। मृतक के पिता समेत परिजनों ने धोखे से चूहा मार दवा खा लेने की बात बताई है। पोस्टमार्टम कराने के बाद शव को उसके पिता को सौंप दिया गया है। 

गांव में है यह चर्चा 

ग्रामीणों के अनुसार, जाहूल जिद्दी किस्म था। बताते हैं कि उसके परिवार के दो-तीन सदस्य चिलम पीते हैं। चिलम में शीरा मिश्रित तंबाकू का इस्तेमाल किया गया था या फिर सिगरेट की तंबाकू भर ली गई, परिवार के लोग इसे लेकर तो कुछ भी नहीं बता पाए। 

इलाके के लोग बताते हैं कि कुछ लोग गांजे की पत्तियों को चिलम में इस्तेमाल करते हैं। उसमें नशे की तीव्रता अधिक होती है। काफी हद तक संभव है कि चिलम में सुट्टा मारने के बाद जाहूल आपा खो बैठा होगा। इसी के चलते चूर्ण और चूहा मार दवा के पाउच में अंतर नहीं समझ पाया।
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