राज को राज रहने दो, परदा उठ गया तो हकीकत सामने आ जाएगी.... यह महज एक शायरी जरूर है, लेकिन पालिका की कार्यशैली पर सटीक बैठ रही है। पालिका प्रशासन की ओर से शहर में विकास कराने के दावे पेश किए जा रहे हैं, लेकिन जमीनी हकीकत कहीं दूर है। ये दावे कितने सच्चे हैं इसकी सच्चाई से रूबरू होना है कि नगर पालिका कन्या इंटर कॉलेज चले जाइए। इस कॉलेज के गेट पर रंगरोगन है, लेकिन अंदर घुसने पर कमरे जर्जर मिलेंगे। प्रधानाचार्य कक्ष और क्लास रूम की छत कभी भी गिर सकती। कई वर्षों से कॉलेज के अंदर रंगाई पुताई नहीं हुई। भवन जर्जर होने से छात्राएं बरामदे में जमीन पर बैठकर पढ़ती हैं। कई बार कॉलेज प्रशासन की ओर से चेयरमैन को पत्र भेजा गया, लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई।
दस कदम की दूरी पर कॉलेज लेकिन चेयरमैन बिजी हैं
पालिका परिसर से महज दस कदम की दूरी पर कॉलेज बना हुआ है, लेकिन इसके बाद भी चेयरमैन के पास कॉलेज का निरीक्षण करने का वक्त नही हैं। यहां सैकड़ों नौनिहालों को जान का खतरा बना हुआ है लेकिन चेयरमैन के पास समय नही है।
न किताबें मिलीं, और न बैग
शासन ने आदेश दिया था कि ग्रीष्मावकाश के बाद से ही बच्चों को पाठ्य सामग्री हर हाल में वितरित कर दी जाए लेकिन यहां कक्षा एक से पांच तक की 226 छात्राओं को अब तक पाठ्य सामग्री वितरित नहीं की गई है।
मिड डे मील कब मिला था छात्राएं नही जानती
शासनादेश की धज्जियां कैसे उड़ती हैं, इसकी सीख पालिका प्रशासन से अच्छी कोई नही दे सकता। यहां छात्राओं को ग्रीष्मावकाश के बाद जब से स्कूल खुले हैं मिड डे मील नही दिया गया है। हैरत की बात तो यह है कि छात्राओं को यह तक याद नहीं कि उन्होंने मिड डे मील कब खाया था।