कछला गंगाघाट पर हवन-पूजन कराने फिरोजाबाद से आए एक परिवार के पांच युवक गंगा में नहाते समय बह गए। परिजनों के शोर मचाने पर गोताखोरों ने तीन युवकों को सुरक्षित बाहर निकाल लिया, जबकि दो युवक गंगा की धार में बह गए। गोताखोर करीब डेढ़ घंटे की मशक्कत के बाद दोनों युवकों को तलाश पाए। मगर तबतक उनकी मौत हो चुकी थी। दोनों युवक सगे भाई हैं। सूचना मिलने पर उझानी पुलिस पहुंच गई। पोस्टमार्टम कराने को लेकर पुलिस और मृतकों के घरवालों के बीच नोकझोंक भी हुई। कछला गंगाघाट पर हादसा सुबह करीब साढ़े आठ बजे कासगंज जिले के छोर वाले घाट पर हुआ। फिरोजाबाद जिले में द्वारिकापुरी मोहल्ले के चरन सिंह की पत्नी का पिछले महीने निधन हो गया था। मृतक की आत्मा की शांति के लिए चरनसिंह के कुनबे के आठ-नौ लोग कछला पहुंचे थे। हवन-पूजन से पहले नहाते समय अमित सिकरबार उर्फ अजीत (24), उसका छोटा भाई अंकित उर्फ पुष्कर (21) पुत्र चरनसिंह, गौरव (27) पुत्र रमेशचंद्र, रामेश्वर (22) पुत्र चंद्रपाल और संजीव (40) पुत्र धर्मेंद्र गहरे में नहाते समय बह गए। उनके साथ मौजूद लोगों ने शोर मचाया तो घाट पर मौजूद दुकानदार भी आ गए। दुकानदारों ने पंखियानगला से गोताखोरों को बुला लिया। गोताखोरों ने संजीव, गौरव और रामेश्वर को सुरक्षित बाहर निकाल लिया। गोताखोरों के लिए अमित और अंकित को खोजने में करीब डेढ़ घंटे का समय लगा। गोताखोरों की टोली में शामिल अजमेरी ने बताया कि दोनों काफी दूर तक बह गए थे। उन्हें बाहर निकाला गया तब तक दोनों की सांसें थम चुकी थीं। मृतक अमित और अंकित सगे भाई हैं। सूचना के बाद कछला चौकी इंचार्ज प्रमोद कुमार पुलिस कर्मियों के साथ मौके पर पहुंच गए। उन्होंने हादसे को लेकर मृतक के घरवालों से जानकारी जुटानी चाही तो परिजनों का गुस्सा फूट पड़ा। मृतक के परिजनों और पुलिस कर्मियों के बीच नोकझोंक भी हो गई। बाद में घरवाले दोनों का शव लेकर कासगंज चले गए। कासगंज के जिला अस्पताल में ही उन्हें मृत घोषित किया गया। इधर, हादसे को लेकर घाट पर काफी देर तक अफरातफरी का माहौल बना रहा।
गंगा के जलस्तर वृद्धि से नहीं लगा पाया गहराई का अनुमान
कछला गंगाघाट पर बुधवार सुबह हादसे में दो युवकों की मौत के बाद लोगों की मानें तो पिछले तीन-चार दिन से गंगा के जलस्तर में निरंतर वृद्धि हो रही है। चूंकि पहले से ही जलधारा का दक्षिणी छोर पर प्रवाह अधिक है, सो नहाते समय फिरोजाबाद के युवक गहराई का अनुमान नहीं लगा पाए।
गंगाघाट पर पिछले दिनों भी विभिन्न हादसों में नहाते समय सात लोगों की मौत हो चुकी है लेकिन तब गंगा का जलस्तर कोई खास नहीं था। तीन-चार दिनों में जलस्तर तेजी से बढ़ा है। घाट पर मौजूद दुकानदारों को तो यह बात पता रहती है लेकिन श्रद्धालुओं को इसका अहसास नहीं हो पाता। गंगा में गहराई वाले स्थानों पर नगर पंचायत प्रशासन ने जो संकेतांक लगवाए थे, वह भी जलधारा के तेज प्रवाह की वजह से बह गए थे। गोताखोरों में अनिल ने बताया कि घाट पर मौजूद नाविक गंगा नहाने के लिए आने वाले श्रद्धालुओं को सजग करते रहते हैं लेकिन लोग गहरे में चले जाते हैं। डूबे पांच युवकों में दो सगे भाइयों की मौत के मामले में व्यवस्थाओं में खामियां सामने आई हैं। बताते हैं कि नगर पंचायत और राजस्व विभाग स्नान पर्व पर गोताखोरों के साथ नाविकों की व्यवस्था करता है लेकिन छोटे स्नान पर्वों में अमावस्या आदि पर कोई इंतजाम नहीं किया जाता। हादसे के बाद गोताखोरों को बुलाने के लिए दुकानदार को कॉल करनी पड़ी थी। गोताखोरों के पहुंचने में करीब आधा घंटा लग गया। घाट पर पहले से गोताखोर मौजूद होते तो अमित और अंकित की जान बच सकती थी।
हवन-पूजन भी नहीं करा पाए मृतकों के घरवाले
उझानी। पत्नी की आत्मा की शांति के लिए चरन सिंह फिरोजाबाद से पुरोहित को साथ लेकर आए थे। पुरोहित के कहने पर उन्होंने सबसे पहले गंगा स्नान शुरू कर दिया। स्नान के बाद ही वह पूजन करते। मृतक अमित और अंकित को भी अपनी मां के लिए हवन में बैठना था। हादसा हो जाने की वजह से परिजन हवन भी नहीं करा पाए। --------
चरन सिंह की संतान में अतुल बचा इकलौता बेटा
उझानी। फिरोजाबाद में द्वारिकापुरी निवासी चरनसिंह के तीन बेटे थे। सबसे बड़ा अमित, फिर अतुल और सबसे छोटा अंकित था। अंकित और अमित की डूबने से मौत के बाद अब अतुल ही बचा है। अतुल गंगा स्नान के लिए साथ नहीं आया था। अमित की शादी भी हो चुकी है। जबकि अंकित अविवाहित था। दोनों जवान बेटों के शव को देख चरन सिंह भी बदहवास नजर आया। दोनों के शव के बीच बैठकर वह बिलखता रहा।