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बदायूं में 40 उद्योगों को मिली विद्युत सुरक्षा की एनओसी

Mon, 05 Mar 2018 07:57 PM IST
न्यूज डेस्क,अमर उजाला,बदायूं
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इन्वेस्टर्स समिट के बाद राज्य सरकार ने निवेश मित्र उद्योग बंधु पोर्टल खोलकर सिंगल विंडो पर कई विभागों की त्वरित एनओसी देने की व्यवस्था की है। प्रयास किया जा रहा है कि हर नए उद्योग को लगाने के लिए अलग-अलग विभागों की एनओसी लेने के लिए अब उद्यमियों को चक्कर न काटने पड़ें। हालांकि स्थानीय उद्यमी अभी नई व्यवस्था को लेकर जागरूक नहीं हैं।
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जिले में अब तक कोई नया उद्योग शुरू करना काफी जोखिम भरा काम था। उद्योग में रकम फंसाने के साथ ही उद्यमी को कई विभागों से अनापत्ति प्रमाण पत्र लेना होता है। इसमें विभागों के चक्कर लगाने और बाबुओं से लेकर अफसरों की चिरौरी करने में पसीना छूट जाता है। कई जगह चढ़ावा चढ़ाए बिना एनओसी की फाइल आगे नहीं बढ़ती। ऐसी ही तमाम कागजी खानापूरी में फंसने की वजह से कई उद्यमी तो नया काम शुरू करने से तौबा करते थे। इन्वेस्टर समिट में निवेश मित्र उद्योग बंधु पोर्टल लांच करके व्यवस्था की गई कि उद्यमी अपने कारोबार से संबंधित सारे दस्तावेज इसी पोर्टल पर लोड करके सारे विभागों से ऑन लाइन एनओसी ले सकें।
इस क्रम में एक जनवरी से अब तक जिले के 51 उद्योगों के लिए विद्युत सुरक्षा की एनओसी का आवेदन किया गया था। विभाग की वेबसाइट से मिले ऑनलाइन ब्यौरे के अनुसार इनमें से 40 उद्योगों को एनओसी जारी कर दी गई। बाकी मामले पेंडिंग हैं।
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इन विभागों के आवेदन नहीं आए
वाणिज्य कर, ड्रग कंट्रोलर, पॉवर कॉरपोरेशन, एक्साइज डिपार्टमेंट, डीएलसी, फायर सेफ्टी, वन विभाग, लेबर फैक्ट्री, लेबर शॉप और यूपी पॉल्यूशन कंट्रोल बोर्ड की एनओसी भी अधिकतर विभागों को लेनी होती है। अब तक निवेश मित्र पोर्टल पर इनकी एनओसी के लिए कोई आवेदन नहीं आया है। इससे यह भी जाहिर हो रहा है कि या तो उद्यमियों को इस बारे में जानकारी नहीं दी गई है या फिर वह अब भी पुरानी व्यवस्था से विभागों के दफ्तरों के चक्कर लगाकर एनओसी ले रहे हैं।


...अभी तो बुरा हाल, 41 में 19 उद्योग बंद
इन्वेस्टर्स समिट के बाद उद्योगों को प्रोत्साहन देने के दावे कितने कारगर होंगे यह तो बाद में पता लगेगा पर जिले में उद्योग धंधों का हाल इस समय काफी खराब है। शहर से सटे सालारपुर में जिले का वृहद औद्योगिक आस्थान इन दिनों दुर्दशा के दौर से जूझ रहा है। वहां कुल 51 भूखंड और दस शेड मिलाकर 41 औद्योगिक इकाइयों को 99 साल की लीज पर आवंटित किए गए थे। हालात ज्यादा बुरे हैं पर विभागीय रिकार्ड के मुताबिक ही इनमें से इस समय 22 औद्योगिक इकाइयां चालू बताई जा रही हैं। कुल 13 इकाइयां अरसे से बंद पड़ी हैं। दो मामलों में कोर्ट केस चल रहा है और चार इकाइयों को स्थापनाधीन बताया जा रहा है। कई जगह तो केवल फैक्ट्रियों के खंडहर ही शेष बचे हैं। कई मामलों में उद्यमियों ने विभाग से सस्ते में जगह लेकर डाल दी है और ताला लगाकर गायब हैं। डेयरी, चिलिंग प्लांट जैसे कुछ उद्योग ही यहां चल रहे हैं। हाल ही में टेक्सटाइल की सनबीम फर्म यहां खुली है जिससे एक हिस्से में रौनक नजर आ रही है। जरी के काम के लिए यहां रोज शहर की लड़कियां और महिलाएं पहुंचती हैं और रोजगार पाती हैं।

उझानी, बिसौली के इंड्रस्ट्रियल एरिया ठप
जिले में उझानी, बिसौली, सहसवान और इस्लामनगर में भी मिनी औद्योगिक आस्थान बने हुए हैं जिनका हाल काफी खस्ता है। उझानी में 45 प्लाट 14 इकाइयों को आवंटित हैं और इस समय इनमें से कोई कार्यरत नहीं है। सहसवान में 61 प्लाट हैं जो 22 इकाइयों को आवंटित हैं। इनमें केवल एक उद्योग कार्यरत है। बिसौली में 55 प्लाट 39 इकाइयों को आवंटित हैं। इनमें कोई कार्यरत नहीं है। विभागीय जानकारी के मुताबिक इस्लामनगर आस्थान में कुल 30 प्लाट हैं जो एक ही इकाई को आवंटित किए गए हैं। यहां एक डेयरी उद्योग लगाया जा रहा है।

99 साल की लीज पर मिलती है जगह
जिले में औद्योगिक विकास को जिला उद्योग केंद्र के जरिये उद्यमी 99 साल की लीज पर प्लॉट पाता है। हर शहर और कस्बे में जगह का रेट अलग-अलग निर्धारित किया गया है। बदायूं में यह 520 रुपये प्रति वर्ग फुट है। वहीं उझानी में 270, बिसौली में 200 तो सहसवान और इस्लामनगर के औद्योगिक आस्थान में जगह का भाग 220 रुपये प्रति वर्ग फुट है।

कैंसिल होगी बंद प्लाटों की लीज
उद्योगों के विकास के लिए इस समय बहुत अनुकूल माहौल है। सरकार उद्यमियों को खास प्रोत्साहन दे रही है। अभी विभाग में सिंगल विंडो टेबल या पोर्टल की व्यवस्था है। जल्द ही सरकार सिंगल विंडो एक्ट लाने जा रही है। फिर एनओसी जैसे हर काम को एक ही आवेदन से ऑन लाइन किया जा सकेगा। तय सीमा में इनका निस्तारण करना विभागों की मजबूरी होगी। कोई आपत्ति या समस्या होगी तो उसे विधिवत बताकर दूर कराना पड़ेगा। इससे निवेशकों की भागदौड़ बिल्कुल खत्म हो जाएगी। वहीं, औद्योगिक केंद्रों में अरसे से बंद पड़े प्लाटों का सर्वे कराया जा रहा है। डिफाल्टर्स की लीज कैंसिल होगी और उनसे खाली कराकर प्लाट नए उद्यमियों को दिए जाएंगे।
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- वीरेंद्र कुमार, उद्योग उपायुक्त, जिला उद्योग केंद्र
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