बदायूं। बिजली चोरी के मामलों में रिपोर्ट और विवेचना को केंद्रीयकृत बनाने की कवायद कारगर नहीं हो सकी। दोबारा से हर थाने में ऐसे मुकदमे दर्ज होने लगे हैं। सिविल लाइंस थाने में दर्ज हुए इस श्रेणी के करीब ढाई सौ केस संबंधित थानों को ट्रांसफर किए जाएंगे।
बिजली चोरी के मामले दर्ज करने में पुलिस आनाकानी करती थी। इस वजह से बिजली विभाग के रिकवरी आदि मामले पेंडिंग पड़े रहते थे। बड़े पैमाने पर शिकायतें मिलीं तो डीजीपी ने हर जिले के एक थाने को बिजली थाना बनाने के निर्देश दिए थे। तय हुआ था कि एक नवंबर से सिविल लाइंस थाने में जिले भर के बिजली चोरी के केस दर्ज होंगे। इस क्रम में यहां कुछ ही दिनों में करीब ढाई सौ केस दर्ज हो गए। इतनी बड़ी संख्या में बिजली चोरी के केस दर्ज करते करते स्टाफ के हाथ दर्द करने लगे थे तो इनकी विवेचना क्राइम ब्रांच के एक ही इंस्पेक्टर को करनी थी। यहां भी समस्या होना तय थी। प्रदेश भर में ऐसी दिक्कतों को देखते हुए यह व्यवस्था खत्म कर दी गई है। अब पहले की ही तरह हर थाने में उसके संबंधित क्षेत्र के बिजली चोरी के केस दर्ज होने लगे हैं। हालांकि एसएसपी ने साफ निर्देश दिए हैं कि इन्हें दर्ज करने में थानेदार कोई कोताही न करें। सिविल लाइंस इंस्पेक्टर देवेश सिंह ने बताया कि उनके थाने में दर्ज करीब ढाई सौ मामले संबंधित थानों में ट्रांसफर किए जाएंगे। उनकी विवेचना वहीं से होगी।