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मैम टॉयलेट जाने दीजिए वरना...

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बदायूं। स्कूलों में ज्यादा बार टॉयलेट जाने वाले बच्चों को टीचर सख्त नजरों से देखते हैं। शिक्षक मानते हैं कि कि टॉयलेट के नाम पर बच्चे पूरे स्कूल में घूमते हैं। लेकिन कई बार यह सख्ती बच्चों को परेशानी में डालती है। बाल रोग विशेषज्ञों का मनाना है, कि टॉयलेट पॉलिसी को लेकर स्कूल आवश्यकता के हिसाब से संवेदनशील नहीं हैं।
आवास विकास की प्रियंका ने बताया कि कक्षा पांच में पढ़ने वाली उनकी बेटी के पेट में दर्द होने लगता है। उनकी बेटी ने बताया कि वह टीचरों के डर की वजह से टॉयलेट नहीं जा पाती है। क्योंकि टीचर कई बार टॉयलेट को लेकर मना कर चुके हैं। इसलिए वह कई बार टॉयलेट कंट्रोल कर चुकी है। पब्लिक स्कूलों में यह हाल आम बात है।
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ज्यादा बार टायॅलेट जाने पर डांट पड़ने के डर से बच्चों को करना पड़ता है कंट्रोल
कक्षा एक से लेकर 10वीं तक के बच्चों को बिस्तर गीला करने जैसी बीमारियों का बड़ा कारण स्कूल समय में टॉयलेट रोकना है। इसके अलावा गंदे टॉयलेट के इस्तेमाल से मूत्र के रास्ते में संक्रमण होता है। इससे लड़कियां ज्यादा प्रभावित होती हैं।
डॉ. राजीव कुमार रोहतगी, बाल रोग विशेषज्ञ

अगर नगर पालिका जमीन दे तो बना देंगे टॉयलेट
पंजाबी समाज सेवा समिति के लोगों ने बताया कि नगर पालिका के सामने, गोपी चौक और गांधी ग्राउंड समेत कई जगह खाली पड़ी हुई हैं, अगर पालिका जमीन दे सके तो शौचालय और पेशाब घर बनवा दिए जाएंगे। संस्था के अध्यक्ष नरेंद्र दुआ ने बताया कि नगर पालिका गांधी ग्राउंड के पास, शिवपुरम् और रोडवेज पर टॉयलेट का निर्माण करा दे तो ऐसी दिक्कतें सामने नही आएंगी। इसके अलावा जमीन उपलब्ध करा दे तो पंजाबी समाज सेवा समिति निर्माण करा देगी।

टॉयलेट गंदा है इसलिए नहीं जाते
एक गर्ल्स कालेज की छात्रा प्रियांगी ने बताया कि टॉयलेट गंदा रहता है जिस कारण वह घर आकर टायलेट जाती है। 11 वीं की नीलेश का कहना है कि एसेंबली के समय कई बार उन्हें बहुत देर के लिए टॉयलेट रोकनी पड़ती है। कई अभिभावकों ने बताया कि स्कूल से घर आकर बच्चा तुरंत टॉयलेट की ओर भागता है। कई ने यह भी शिकायत की, कि स्कूलों में छुट्टी के समय ताला डाल दिया जाता है। इस कारण बच्चे घर तक टॉयलेट कंट्रोल करते हैं।

गांधी ग्राउंड के पास बने शौचालय ध्वस्त पड़े हैं। मॉर्निंग वॉकर परेशान
गांधी ग्राउंड की ओर से करीब हर दिन सौ से अधिक लोग टहलने जाते हैं। यहां महिला और पुरुष के लिए शौचालय हैं जिसकी वजह से लोगों को परेशानी होती है। यहां लगा हैडपंप भी खराब पड़ा है। वॉकर सुमित ने बताया कि टॉयलेट गंदा और ध्वस्त रहने के कारण बहुत परेशानी होती है।

प्राइमरी स्कूलों में हालात बहुत खराब
प्राइमरी स्कूलों में शौचालयों की समस्या गंभीर है। शहर में करीब तीन से चार ऐसे स्कूल हैं जहां शौचालय नहीं हैं। ऐसे स्कूलों के बच्चे अपने घर जा कर टॉयलेट करते हैं।
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बाजार में टॉयलेट को लेकर डीएम से बात करेंगे व्यापारी
बाजार में टॉयलेट बनाए जाने के मुद्दे पर व्यापारी अमर उजाला के साथ खड़े हो गए हैं। शुक्रवार को पंजाबी समाज सेवा समिति और व्यापारियों ने बैठक की है। वो जल्द ही इस मामले को लेकर डीएम को ज्ञापन देंगे। शहर में खाली पड़ी जमीन और उपयुक्त जमीन में शौचालय बनाए जाने की बात करेंगे।
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