बदायूं। 10 साल पहले चुनाव की रंजिश को लेकर की गई हत्या के मामले में नामजद चार आरोपियों में से दो को मुजरिम करार देते हुए प्रथम अपर सत्र न्यायाधीश अशोक कुमार ने आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। दोनों पर 50-50 हजार रुपये का अर्थदंड भी लगाया है। एक आरोपी की मुकदमे के दौरान मौत हो गई थी, जबकि एक को साक्ष्यों के अभाव में बरी कर दिया गया।
थाना मूसाझाग क्षेत्र के गांव सिताबनगर निवासी वादी तेजपाल पुत्र डालचंद्र ने रिपोर्ट लिखाई थी कि एक अगस्त 2008 को वह अपने भाई दुर्विजय सिंह की चोट का इलाज कराने न्योली शुगर फैक्ट्री बाइक से जा रहा था। जब उसकी बाइक बदायूं कासगंज रोड स्थित करुआ पुल के पास पहुंची, तो घात लगाए बैठे उसके ही गांव के संजीव व उसके पिता शांतिस्वरूप, मोरपाल और उसके पुत्र दुर्विजय निवासी नवादा सुलरा थाना मूसाझाग ने जान से मारने की नीयत से फायर किया। इससे उसके भाई दुर्विजय की मौके पर ही मृत्यु हो गई। गोली मारने के बाद चारों मौके से भाग गए। पुलिस ने विवेचना के बाद कोर्ट में आरोप पत्र दाखिल किया। मुकदमे के दौरान शांति स्वरूप की मृत्यु हो गई।
एडीजे प्रथम अशोक कुमार ने अभियोजन की ओर से एडीजीसी रईस अहमद और बचाव पक्ष के अधिवक्ता की बहस सुनने के बाद हत्या में नामजद संजीव और दुर्विजय को मुजरिम करार देते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई, साथ ही दोनों मुजरिमों पर एक लाख रुपये का अर्थदंड भी लगाया। अर्थदंड जमा होने पर 75 हजार रुपये मृतक के परिजनों को देने का भी आदेश दिया। मोरपाल को बरी कर दिया गया।