बदायूं। जिला अस्पताल का अब कोई चिकित्सक बाहरी दवाएं नहीं लिखेगा और न ही कोई कर्मचारी इसके लिए मरीज पर दबाव बनाएगा। दवाओं का जो भी इंतजाम होगा, जिला अस्पताल से किया जाएगा। डॉक्टर सिर्फ विशेष परिस्थितियों में ही दवाएं लिखेंगे। इससे पहले प्रधानमंत्री जन औषधि केंद्र से दवाएं मंगवाई जा सकती हैं।
सीएमएस डॉ. भारत भूषण पुष्कर ने तीन दिन पहले ही बाहरी दवाएं लिखे जाने पर पाबंदी लगाई गई है। इसके लिए उन्होंने ओपीडी में बैठने वाले प्रत्येक डॉक्टर और इमरजेंसी में बैठने वाले ईएमओ को नोटिस देकर सूचित किया है। उन्होंने कहा है कि जिला अस्पताल के डॉक्टर बाहर की दवाएं लिख रहे थे। कई बार इसकी शिकायत आ चुकी थीं। इससे अस्पताल की छवि और खराब हो रही थी। यह अस्पताल के नियम के विरुद्ध भी है। साथ ही अस्पताल की व्यवस्थाओं पर सीधे सवाल उठते हैं। इन सब से बचने के लिए बाहर की दवाएं लिखने पर पाबंदी लगाई गई है। उन्होंने कहा है कि मरीज को स्वस्थ करने की जिम्मेदारी अस्पताल प्रशासन की है। इसके लिए डॉक्टर पहले अस्पताल की दवाओं का प्रयोग कराएं। जरूरत पड़ने पर प्रधानमंत्री जन औषधि केंद्र से दवाएं मंगा सकते हैं। गंभीर मरीजों के लिए विशेष परिस्थिति में दवाएं ली जा सकती हैं। ऐसा न हो मरीज अस्पताल की दवाओं से स्वस्थ हो सकता हो और उन्हें जबरदस्ती बाहर की दवाएं लिखी जाएं। इसके लिए उनकी परमीशन भी लेनी होगी।
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पर्चा तो दूर मेडिकल पर बैठकर दवाएं लिखता है डॉक्टर
-जिला अस्पताल के सीएमएस डॉ. भारत भूषण पुष्कर एक तरफ बाहरी की दवाएं लिखने पर पाबंदी लगा रहे हैं। वहीं दूसरी ओर एक डॉक्टर पर्चा तो दूर कभी-कभी मेडिकल पर बैठकर मरीजों को दवाएं लिखता है। अगर मेडिकल बंद हो तो मरीज को दूसरे दिन आने को या फिर मेडिकल खुलने का इंतजार करने को कहा जाता है। यह सिलसिला काफी समय से जारी है।
वर्जन--
अब तो अस्पताल में जन औषधि केंद्र खुल गया है। डॉक्टरों को बाहर की दवाएं लिखने की जरूरत ही नहीं है। सभी को अवगत करा दिया गया है कि कोई भी बाहर की दवाएं नहीं लिखेगा। अगर कोई लिखता हुआ पाया गया तो उसकी रिपोर्ट बनाकर शासन भेज देंगे।
डॉ. भारत भूषण पुष्कर, सीएमएस जिला अस्पताल