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ये रोजगार दफ्तर तो खुद बेरोजगार है

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रोजगार दफ्तर। - फोटो : अमर उजाला
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बदायूं। पहले से ही सुस्त विभाग की श्रेणी में शुमार सेवायोजन विभाग के पास इन दिनों कायदे का कोई काम नहीं है। विभाग के स्थानीय दफ्तर के हालात पर गौर करें तो भारी भरकम स्टाफ को दिन काटना भारी पड़ता है। कुछ लोग छुट्टी पर तो कुछ छुट्टी के मूड में रहते हैं।
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जिला सेवायोजन कार्यालय कई साल से डीएम रोड पर किराए के भवन में चल रहा है। किसी जमाने में इस दफ्तर पर खूब रौनक हुआ करती थी। बीच में कुछ सालों तक सन्नाटा पसारा रहा। बाद में जब अखिलेश सरकार ने बेरोजगारी भत्ते के लिए रोजगार रजिस्ट्रेशन अनिवार्य कर दिया उस समय भीड़ बढ़ गई। मई 2015 में रजिस्ट्रेशन ऑनलाइन कर दिया गया। हालांकि यह व्यवस्था थी कि रजिस्ट्रेशन कराते समय एक ओटीपी सेवायोजन कार्यालय को बताना पड़ता था। इस बहाने ही युवा रोजगार दफ्तर में घूम जाते थे। अब नए साफ्टवेयर में यह सिस्टम भी खत्म कर दिया गया है। लोग अपनी मार्कशीट आदि प्रमाणपत्र विभाग की वेबसाइट पर अपलोड करके घर बैठे या इंटरनेट कैफे से रजिस्ट्रेशन करा लेते हैं। इसमें किसी तरह की विभागीय सहायता की जरूरत ही नहीं पड़ती।
पहले दफ्तर में रजिस्ट्रेशन के समय आवेदक युवाओं से उनके पता लिखे पोस्टकार्ड लिए जाते थे। बताया जाता था कि कोई वेकैंसी आने पर उन्हें पत्र भेजकर सूचित किया जाएगा। शायद ही किसी बेरोजगार के पास विभाग ने चिट्ठी भेजकर इस बारे में बताया हो। अब तो चिट्ठी लेना भी बंद हो गया है। विभागीय अधिकारियों का तर्क है कि स्थानीय स्तर से कोई भर्ती निकले तो वह उसकी सूचना दें। अब तो सारी भर्तियां प्रदेश स्तर से ही समूह बनाकर की जा रही हैं। ऐसे में बेरोजगारों से पत्राचार का कोई मतलब ही नहीं रह गया है। दफ्तर के भवन की बरसों से पुताई नहीं हुई है। इसमें पुरानी फाइलें और रजिस्ट्रेशन के कागजात अलमारियों में धूल फांक रहे हैं।
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यह है स्टाफ का हाल
जिला सेवायोजन कार्यालय में दो अनुदेशक, छह बाबू और तीन चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी तैनात हैं। यह कर्मचारी लाखों रुपये वेतन ले रहे हैं। खास बात यह भी है कि दफ्तर में सारा स्टाफ एक साथ कभी नहीं दिखता पर इनका कम्युनिकेशन कमाल का है। किसी खाली सीट की तरफ देखने पर दूसरा कर्मचारी बता देता है कि अभी तक यहीं बैठे थे, शायद किसी काम से पास में ही गए हैं।
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सप्ताह में एकाध बार आते हैं अधिकारी
जिला सेवायोजन अधिकारी का पद यहां खाली है। इसका प्रभार सहायक निदेशक सेवायोजन एसआर शर्मा पर है। वह बरेली से सप्ताह में एकाध बार ही यहां आते हैं। स्थानीय स्तर पर वरिष्ठ अनुदेशक अशोक कुमार यह जिम्मेदारी देखते हैं।
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प्रमाणपत्रों की जांच भी नहीं होती
ऑनलाइन पंजीकरण के बाद उसका डाटा विभाग को मिल जाता है और उसे कुल संख्या में जोड़ लिया जाता है। पहले आवेदक को दफ्तर आकर असली प्रमाणपत्र दिखाने पड़ते थे। ऐसे में काफी हद तक फर्जीवाड़ा नहीं हो पाता था। ऑनलाइन सिस्टम में इसकी जरूरत नहीं पड़ती। ऐसे में आवेदकों ने प्रमाणपत्र असली लगाए हैं या नहीं, इसकी जांच भी विभागीय स्टाफ नहीं कर पाता। बस मान लिया जाता है कि शैक्षिक योग्यता के बारे में आवेदक का दावा सही है।
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ऑफिस मैनेजमेंट सिखाते हैं हम: अशोक कुमार
विभाग की ओर से ऑफिस मैनेजमेंट का एक साल का कोर्स नि:शुल्क कराया जाता है। प्रभारी सेवायोजन अधिकारी अशोक कुमार ने बताया कि पिछड़े और अनुसूचित वर्ग के पचास अभ्यर्थियों को अनुदेशक प्रशिक्षण देते हैं। बताया कि सुबह दस से शाम पांच बजे तक क्लास चलती है। हालांकि यह दीगर बात थी कि यहां मौके पर कोई क्लास नहीं चलती मिली।
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रजिस्ट्रेशन फैक्ट फाइल
पुरुष 10011
महिला 3390
कुल 13401
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