पापा रात में साथ जगकर कराते थे पढ़ाई : शिवांश
लक्ष्य बनाकर तैयारी करो तो कुुछ भी नामुमकिन नहीं: जितिन प्रताप
बदायूं। अगर किसी काम को पूरा करना है तो एक लक्ष्य बनाकर उसकी तैयारी करो, तो कोई भी चीज नामुमकिन नहीं है। यह कहना है हाईस्कूल में 91.50 प्रतिशत अंक हासिल करके जिला टॉप करने वाले शिवदेवी सरस्वती विद्या मंदिर इंटर कॉलेज के छात्र जितिन प्रताप सिंह का। वह कहते हैं कि उनका मकसद आईएएस बनाने का है। वह इसको लेकर शुरू से ही तैयारी कर रहे हैं। रोजाना 10 से 11 घंटे पढ़ाई का समय निर्धारित कर लिया है। इस बीच में वह कहीं भी नहीं जाते हैं। यहां तक कि उन्होंने शादी-बरात आदि तक में जाना तक छोड़ दिया है। पूरा ध्यान पढ़ाई पर ही लगाते हैं। अगर परिवार के साथ कहीं जाना भी पड़ता है, तो उस समय को धीरे-धीरे अन्य दिनों में एर्डजस्ट कर लेते हैं। रात 11 बजे तक पढ़ाई करने वाले जितिन सुबह चार बजे उठकर फिर से पढ़ना शुरू कर देते हैं। पढ़ाई के दौरान वह सोशल मीडिया से भी काफी दूर रहे हैं।
पेंटिंग करना भी बेहद पसंद है वैभव को
बदायूं। हाईस्कूल की परीक्षा में जिले में दूसरे स्थान पर रहने वाले वैभव सिंह को 91.17 प्रतिशत अंक मिले हैं। शहर के मोहल्ला लोचीनगला में रहने वाले वैभव के पिता जितेंद्र शहर के एक स्कूल में अध्यापक हैं जबकि मां अंबिका सिंह हाउस वाइफ हैं। श्रीराम सरस्वती विद्या मंदिर इंटर कॉलेज के छात्र वैभव शुरू से ही मेहनती और पढ़ाई में होशियार रहे हैं। वह अपनी सफलता का श्रेय अपने माता-पिता और सभी गुरुजनों को देते हैं। वैभव कहते हैं कि वह सुबह पांच बजे उठकर पढ़ाई करते थे। इसके बाद कॉलेज और ट्यूशन जाना और फिर चार से पांच घंटे पढ़ाई करना उनकी दिनचर्या में शामिल है। क्रिकेट खेलने के शौकीन वैभव को पेंटिंग करना भी बेहद पसंद है। वह कहते हैं कि जरूरी नहीं कि मैरिट में आने के लिए पूरा-पूरा दिन पढ़ाई की जाए। सही रणनीति बनाकर पढ़ाई करने से अच्छे अंक और स्थान पाया जा सकता है। वह आईआईटी से इंजीनियरिंग करना चाहते हैं।
स्वामी विवेकानंद को आदर्श मानती है काजल
बिसौली (बदायूं)। हाईस्कूल की परीक्षा में सरस्वती विद्या मंदिर इंटर कॉलेज की काजल त्रिपाठी जिले में तीसरे स्थान पर रहीं हैं। उसने 90.83 प्रतिशत अंक प्राप्त किए हैं। नगर के मोहल्ला पुलिस चौकी के पीछे रहने वाले उसके पिता सुशील त्रिपाठी जनसेवा केंद्र चलाते हैं जबकि मां प्रतिभा त्रिपाठी बेसिक शिक्षा विभाग में अध्यापक हैं। दादा पं. महेश चंद्र पांडित्य कार्य करते हैं। काजल दो भाई बहनों में बड़ी है। छोटा भाई आशुतोष त्रिपाठी कक्षा नौ में पढ़ता है। काजल बताती है कि उसे टीवी देखना पसंद है। इसमें भी वह डिस्कवरी चैनल देखना पसंद करती है। बैडमिंटन खेलना भी पसंद है। बड़े होकर काजल आईएएस बनना चाहती है। वह अपनी सफलता का श्रेय पिता सुशील त्रिपाठी एवं गुरु रविकांत पांडे को देती है। कहती हैं स्वामी विवेकानंद उसके आदर्श हैं और खाली समय में उनके जीवन से संबंधित पुस्तकें पढ़ना उसे पसंद है।