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पापा रात में साथ जगकर कराते थे पढ़ाई : शिवांश

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बदायूं। आईएएस बनने की तमन्ना शिवांश के मन में हाईस्कूल के समय से ही घर कर गई। यही वजह रही कि उसने हाईस्कूल में मन लगाकर मेहनत की, जिस कारण वह जिलेे में चौथे स्थान पर आया था। उसके बाद में शिवांश ने कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा और जी तोड़ मेहनत की। इसका नतीजा ये रहा कि उसने इंटरमीडिएट में 87.40 प्रतिशत अंक लेकर जिले में प्रथम स्थान हासिल किया। शिवदेवी सरस्वती विद्या मंदिर के छात्र शिवांश ने बताया कि आईएएस बनने के लिए वह करीब 11 घंटे पढ़ाई करता है। अच्छे नंबर पाने के लिए वह पढ़ाई में अपने पिता संजीव कुमार गुप्ता व मां सीमा गुप्ता का साथ सहयोग लेता था। रात में जब तक वह जागता था, तब तक उनके पापा भी जागते थे। हालांकि स्कूल के बाद में वह फिजिक्स और गणित की कोचिंग के लिए अन्य शिक्षकों के पास जाता था, लेकिन अंग्रेजी विषय की कोचिंग उन्हें अपने पापा से ही पढ़ी।


मन से की गई चार घंटे की पढ़ाई पर्याप्त : हर्ष
बिसौली। इंटरमीडिएट परीक्षा में जिले में दूसरा स्थान पाने वाले हर्ष कुमार इंजीनियर बनना चाहते हैं। डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम को आदर्श मानने वाले हर्ष के पिता वीरेंद्र विश्वकर्मा टीवी मैकेनिक हैं, जबकि मां गृहणी हैं। हर्ष के पिता तीन भाई हैं और सभी संयुक्त परिवार में रहते हैं। हर्ष अपने चार भाई बहनों में तीसरे नंबर पर आते हैं। बड़ी दोनों बहनों कीर्ति और साक्षी का विवाह हो चुका है जबकि छोटा भाई रजत कक्षा दस में आया है। हर्ष का मानना है कि बेहतर रिजल्ट के लिए चार घंटे की पढ़ाई पर्याप्त है, बशर्ते वह मन से की जाए, क्योंकि यदि पढ़ाई के समय इधर-उधर के काम करते हैं तो कितने ही घंटे पढ़ लें, उसका फायदा नहीं मिलेगा। इनडोर गेम में उसे शतरंज जबकि आउटडोर में बैडमिंटन खेलना पसंद है। अपनी इस सफलता का श्रेय वह अपने रसायन विज्ञान के अध्यापक अंकित सक्सेना को देता है। वह बड़े होकर इंजीनियर बनना चाहता है।
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डॉक्टर बनना चाहते हैं आयुष
बदायूं। यूपी बोर्ड की इंटरमीडिएट परीक्षा में 85.40 प्रतिशत अंक लेकर जिले में तीसरा स्थान प्राप्त करने वाले आयुुष कुमार सिंह का सपना डॉक्टर बनने का है। उन्होंने बताया कि उनके पिता रूमसिंह इंस्पेक्टर है। उनकी पोस्टिंग पीलीभीत में है। पिता की तबीयत खराब होने पर मां शकुंलता देवी उनके पास पीलीभीत चली गईं थीं। करीब आठ माह से उनके साथ ही रह रही थीं। इस दौरान आयुष कुमार सिंह अपनी इंटर की पढ़ाई कर रहे थे। उनकी पढ़ाई में कोई दिक्कत न हो, इसलिए उनके बड़े भाई मोहित बघेल और विकास बघेल उनका ख्याल रखते थे। वह उन्हें समय से खाना बनाकर खिलाते थे, साथ ही अन्य जरूरतों को भी पूरा करते थे। पढ़ाई में कहीं पर कोई दिक्कत होती थी, तो वह उनकी मदद करते थे। वह कहते हैं कि डॉक्टर बनकर वह गरीबों की मदद करना चाहते हैं। जो लोग इलाज के अभाव में दम तोड़ देते हैं वह डॉक्टर बनकर उनकी मदद करेंगे।

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वायुसेना में जाना लक्ष्य: निशांत
बिसौली (बदायूं)। जिले में हाईस्कूल परीक्षा में प्रथम स्थान पाने वाले सरस्वती विद्या मंदिर इंटर कॉलेज के छात्र निशांत शंखधार की खुशी का ठिकाना नहीं है। उसे मेहनत पर भरोसा था, लेकिन जिले में वह टॉप करेगा, यह उम्मीद नहीं थी। निशांत के सगे भाई शेखर शंखधार ने इंटरमीडिएट परीक्षा में जिले में सातवां स्थान पाया है, जिससे उसकी खुशी और दोगुनी हो गई है। बुद्धबाजार मोहल्ले में रहने वाले निशांत के पिता अवनेश शंखधार पड़ोसी गांव पनोड़ी में एक प्राइवेट स्कूल चलाते हैं। मां अनीता देवी गृहणी हैं, जबकि उसके दादा महावीर प्रसाद शंखधार सिंचाई विभाग से रिटायर्ड हैं। परिवार मूल रूप से उघैती थाने के गांव पलिया का निवासी है। निशांत ने बताया कि वह वायुसेना में जाना चाहता है और देश की सेवा करना उसका ध्येय है। उसे शतरंज खेलना बेहद पसंद है, लेकिन टीवी देखना बिल्कुल पसंद नहीं है। निशांत ने उपलब्धि का श्रेय दादा महावीर प्रसाद और गणित के शिक्षक रविकांत पांडे को दिया।
 

 

लक्ष्य बनाकर तैयारी करो तो कुुछ भी नामुमकिन नहीं: जितिन प्रताप
बदायूं। अगर किसी काम को पूरा करना है तो एक लक्ष्य बनाकर उसकी तैयारी करो, तो कोई भी चीज नामुमकिन नहीं है। यह कहना है हाईस्कूल में 91.50 प्रतिशत अंक हासिल करके जिला टॉप करने वाले शिवदेवी सरस्वती विद्या मंदिर इंटर कॉलेज के छात्र जितिन प्रताप सिंह का। वह कहते हैं कि उनका मकसद आईएएस बनाने का है। वह इसको लेकर शुरू से ही तैयारी कर रहे हैं। रोजाना 10 से 11 घंटे पढ़ाई का समय निर्धारित कर लिया है। इस बीच में वह कहीं भी नहीं जाते हैं। यहां तक कि उन्होंने शादी-बरात आदि तक में जाना तक छोड़ दिया है। पूरा ध्यान पढ़ाई पर ही लगाते हैं। अगर परिवार के साथ कहीं जाना भी पड़ता है, तो उस समय को धीरे-धीरे अन्य दिनों में एर्डजस्ट कर लेते हैं। रात 11 बजे तक पढ़ाई करने वाले जितिन सुबह चार बजे उठकर फिर से पढ़ना शुरू कर देते हैं। पढ़ाई के दौरान वह सोशल मीडिया से भी काफी दूर रहे हैं।
 

 

पेंटिंग करना भी बेहद पसंद है वैभव को
बदायूं। हाईस्कूल की परीक्षा में जिले में दूसरे स्थान पर रहने वाले वैभव सिंह को 91.17 प्रतिशत अंक मिले हैं। शहर के मोहल्ला लोचीनगला में रहने वाले वैभव के पिता जितेंद्र शहर के एक स्कूल में अध्यापक हैं जबकि मां अंबिका सिंह हाउस वाइफ हैं। श्रीराम सरस्वती विद्या मंदिर इंटर कॉलेज के छात्र वैभव शुरू से ही मेहनती और पढ़ाई में होशियार रहे हैं। वह अपनी सफलता का श्रेय अपने माता-पिता और सभी गुरुजनों को देते हैं। वैभव कहते हैं कि वह सुबह पांच बजे उठकर पढ़ाई करते थे। इसके बाद कॉलेज और ट्यूशन जाना और फिर चार से पांच घंटे पढ़ाई करना उनकी दिनचर्या में शामिल है। क्रिकेट खेलने के शौकीन वैभव को पेंटिंग करना भी बेहद पसंद है। वह कहते हैं कि जरूरी नहीं कि मैरिट में आने के लिए पूरा-पूरा दिन पढ़ाई की जाए। सही रणनीति बनाकर पढ़ाई करने से अच्छे अंक और स्थान पाया जा सकता है। वह आईआईटी से इंजीनियरिंग करना चाहते हैं।

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स्वामी विवेकानंद को आदर्श मानती है काजल
बिसौली (बदायूं)। हाईस्कूल की परीक्षा में सरस्वती विद्या मंदिर इंटर कॉलेज की काजल त्रिपाठी जिले में तीसरे स्थान पर रहीं हैं। उसने 90.83 प्रतिशत अंक प्राप्त किए हैं। नगर के मोहल्ला पुलिस चौकी के पीछे रहने वाले उसके पिता सुशील त्रिपाठी जनसेवा केंद्र चलाते हैं जबकि मां प्रतिभा त्रिपाठी बेसिक शिक्षा विभाग में अध्यापक हैं। दादा पं. महेश चंद्र पांडित्य कार्य करते हैं। काजल दो भाई बहनों में बड़ी है। छोटा भाई आशुतोष त्रिपाठी कक्षा नौ में पढ़ता है। काजल बताती है कि उसे टीवी देखना पसंद है। इसमें भी वह डिस्कवरी चैनल देखना पसंद करती है। बैडमिंटन खेलना भी पसंद है। बड़े होकर काजल आईएएस बनना चाहती है। वह अपनी सफलता का श्रेय पिता सुशील त्रिपाठी एवं गुरु रविकांत पांडे को देती है। कहती हैं स्वामी विवेकानंद उसके आदर्श हैं और खाली समय में उनके जीवन से संबंधित पुस्तकें पढ़ना उसे पसंद है।

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