बदायूं। राजकीय मेडिकल कॉलेज के निर्माण की रफ्तार मंद हो गई है। अगर काम जल्द पूरा नहीं हुआ तो मेडिकल काउंसिल ऑफ इंडिया से मान्यता मिलने में दिक्कत आ सकती है। मेडिकल कॉलेज निर्माण को अब भी 243 करोड़ रुपये का बजट मिलना बाकी है। कॉलेज प्रशासन ने इस संबंध में शासन को लिखा है।
बदायूं-मथुरा रोड पर गुनौरा वाजिदपुर गांव के पास 20 दिसंबर 2013 को तत्कालीन मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने राजकीय मेडिकल कॉलेज का शिलान्यास किया था। मेडिकल कॉलेज के भवन निर्माण को 543 और चिकित्सा उपकरणों की खरीद को 20 करोड़ रुपये बजट तय किया गया था। 2014 में मेडिकल कॉलेज का निर्माण शुरू होने के साथ सरकार ने बजट जारी करना शुरू कर दिया। अब तक 300 करोड़ का ही बजट जारी हो सका है। मेडिकल कॉलेज निर्माण के मद में अब भी 243 करोड़ का बजट मिलना बाकी है। अक्तूबर 2016 में राजकीय मेडिकल कॉलेज की ओपीडी शुरू होने के बाद शासन ने चिकित्सा उपकरणों की खरीद के मद में 20 करोड़ रुपये जारी कर दिए थे। इस धनराशि से चिकित्सा उपकरणों की खरीद हो रही है। मेडिकल कॉलेज प्रशासन के आवेदन पर नवंबर 2016 में मेडिकल काउंसिल ऑफ इंडिया की टीम ने यहां दौरा किया। फैकल्टी पूरी न होने की वजह से एमसीआई ने मेडिकल कॉलेज को मान्यता देने से इंकार कर दिया था। मेडिकल कॉलेज के निर्माण की गति अब भी धीमी है। कॉलेज प्रशासन का कहना है कि बजट के संबंध में उच्च स्तर पर लिखा गया है।
------
मान्यता में रोड़ा न बन जाए अधूरा निर्माण
बदायूं। मेडिकल कॉलेज प्रशासन ने एमसीआई से मान्यता के लिए फिर से आवेदन की तैयारी शुरू कर दी है। कॉलेज प्रशासन चाहता है कि यहां 2019 तक मेडिकल की पढ़ाई चालू हो जाए। ऐसे में आशंका यह भी जताई जा रही है कि मेडिकल कॉलेज में फैकल्टी का अभाव और आधा-अधूरा निर्माण अगर फिर से रोड़ा बनता है तो एमसीआई मान्यता से इंकार कर सकती है।
--
उम्मीद है कि 2019 तक मेडिकल कॉलेज में एमबीबीएस की कक्षाएं लगने लगेंगी। बजट के लिए शासन को लिखा गया है। मेडिकल कॉलेज को मान्यता के लिए एमसीआई से पत्राचार चल रहा है।
-डॉ. एमसी प्रजापति, नोडल अधिकारी राजकीय मेडिकल कॉलेज