फोटो-6, 32, 36
बेकाबू हुआ बुखार, तीन की मौत, कई बीमार
खानापूर्ति कर रहा स्वास्थ्य विभाग, बढ़ रहे गांव और मरीजों की संख्या
मनिकापुर कौंर, सराय पिपरिया और तजपुरा में एक-एक मौत
अमर उजाला ब्यूरो
बदायूं। जिले के कई गांवों में बुखार बेकाबू हो गया है और स्वास्थ्य विभाग की टीम खानापूर्ति में जुटी है। अभी कई ऐसे गांव हैं, जहां कई दिनों से महामारी फैली है। इसके बावजूद स्वास्थ्य विभाग की टीम नहीं पहुंची है। परिणामस्वरूप सोमवार रात एक गर्भवती महिला समेत तीन लोगों की और मौत हो गई। बीमार लोगों की भी संख्या लगातार बढ़ती जा रही है। इन गांव में ऐसे हालात हो गए कि हैं कि लोग हिम्मत हार चुके हैं लेकिन स्वास्थ्य विभाग की नींद नहीं टूटी है।
मूसाझाग। समरेर ब्लाक क्षेत्र के ग्राम मनिकापुर कौंर में कई दिन पहले से बुखार अपने पैर जमा चुका है। दर्जनों लोग अब भी बीमार पड़े हैं। गांव में शायद ही कोई परिवार होगा, जिस घर में किसी न किसी को बुखार न आया हो, परंतु स्वास्थ्य विभाग की टीम बुखार पर कंट्रोल नहीं कर पाई है। मंगलवार को स्वास्थ्य विभाग की टीम पहुंची, उससे पहले सोमवार रात गांव के साबिर की 12 वर्षीय बेटी महरूनिशां ने दम तोड़ दिया। उसे भी कई दिन से बुखार आ रहा था। परिवार वालों ने उसे प्राइवेट अस्पताल से दवा दिलाई थी। इधर, दातागंज ब्लाक क्षेत्र के ग्राम सराय पिपरिया में सोमवार रात 20 वर्षीय गर्भवती प्रीति पत्नी रवेंद्र की मौत हो गई। प्रीति को भी कई दिन से बुखार आ रहा था। परिवार वाले उसका इधर-उधर से इलाज करा रहे थे। गांव में सिर्फ प्रीति ही बीमार नहीं थी। इस संबंध में ग्रामीणों ने स्वास्थ्य विभाग को भी सूचना दी थी लेकिन विभाग की ओर से कोई एक्शन नहीं लिया गया। परिणामस्वरूप गर्भवती महिला की जान चली गई। प्रीति की एक साल पहले ही शादी हुई थी।
जगत ब्लाक क्षेत्र के ग्राम तजपुरा में भी अब बुखार फैलने लगा है। अब तक दर्जनों लोग बीमार पड़ चुके हैं। यहां के 40 वर्षीय सुरेश पुत्र कृपाल भी कई दिन से बीमार थे। मंगलवार सुबह उनकी भी मौत हो गई। इससे ग्रामीणों में दहशत है। लोगों ने स्वास्थ्य विभाग का भरोसा ही छोड़ दिया है।
--
एक ही गांव में तीन लोग गवां चुके हैं जान
मूसाझाग। जगत ब्लाक क्षेत्र का एक गांव ऐसा भी है जहां एक के एक करके तीन लोगों की मौत हो चुकी है। मौजमपुर गांव में 24 अगस्त को चंद्रपाल की आठ वर्षीय बेटी कुसुमा की मौत हुई थी। 26 अगस्त को हवलदार की 15 वर्षीय बेटी नीतू और मान सिंह की 12 वर्षीय बेटी रवीना की मौत हो गई थी। उसी दिन से गांव में खौफ है।
--
अमरौली में बीमारों की संख्या और बढ़ी
दातागंज। समरेर ब्लाक क्षेत्र के गांव अमरौली में कई दिन से बुखार पसरा हुआ है। गांव के करीब ढाई-तीन सौ लोग बीमार पड़े हैं। स्वयं प्रधान के घर में एक दर्जन से अधिक लोग बीमार हैं। बाकी गांव के प्रत्येक घर में लोग बीमार पड़े हैं। लोग दातागंज, देवचरा, बल्लिया और बरेली में इलाज करा रहे हैं। ग्राम प्रधान तीन बार स्वास्थ्य विभाग को अवगत करा चुका है। इसके बावजूद गांव में टीम नहीं पहुंची है। परिणामस्वरूप बीमार लोगों की संख्या और बढ़ गई है। यह स्वास्थ्य विभाग के लिए बड़ा सवाल है कि आखिर बुखार कंट्रोल के दावे करने वाला स्वास्थ्य विभाग क्या कर रहा है। अब तक गांव में टीम क्यों नहीं पहुंची। कई सवाल ग्रामीण लिए बैठे हैं, जिनके जवाब स्वास्थ्य विभाग के पास नहीं है।
--
फोटो-5
बागरपुर में निकले 20 मलेरिया के मरीज
कुंवरगांव। वजीरगंज ब्लाक क्षेत्र के ग्राम बागरपुर में बुखार फैलने के बाद मंगलवार को स्वास्थ्य विभाग की टीम को होश आया। इस गांव के नरेश पुत्र चेतराम की रविवार को बुखार के चलते जिला अस्पताल में मौत हो गई थी। जबकि गांव में दर्जनों लोग बीमार पड़े थे। मंगलवार को सैदपुर सीएचसी से डॉक्टरों की एक टीम गांव पहुंची और शिविर लगाकर लोगों का स्वास्थ्य परीक्षण किया। 40 लोगों की स्लाइड बनाकर मलेरिया चेक कराई गई, जिसमें 20 लोगों में मलेरिया मिला। टीम में शामिल डॉ. फिरासत अंसारी, डॉ. राजीव वार्ष्णेय, डॉ. फरनाज परवीन, डॉ. इंद्र प्रकाश आर्य और डॉ. सायमा गनी ने मरीजों को दवा का वितरण किया। साथ ही गांव की नालियों में कीटनाशक दवा एंटी डी लार्वा का छिड़काव भी किया।
--------
क्या कहते है ग्रामीण
फोटो--34
गांव में बीमारी फैलने का मुख्य कारण गंदगी है। साफ-सफाई नहीं हो रही है, इससे बीमारी फैल रही है। झोलाछाप लोगों को झांसा देकर रोके रहते हैं। जब बीमारी बढ़ती है तो उन्हें अस्पताल भेजते हैं।
-पुत्तूलाल, मनिकापुर कौंर
फोटो--35
बीमार लोगों का इलाज कराने के लिए हर किसी के पास पैसे नहीं हैं। मेरे घर में भी आर्थिक तंगी चल रही थी। इस वजह से बेटी को अच्छे अस्पताल नहीं ले जा सका और उसकी मौत हो गई। स्वस्थ्य विभाग सुध लेता तो शायद उसकी जान बच सकती थी।
-साबिर अली, मनिकापुर कौंर
वर्जन---
जहां सूचना मिल रही है। हमारी टीम पहुंच रही है। अब जिस गांव की जानकारी नहीं है, तो वहां टीम कैसे पहुंचे। इसके बावजूद हम पता लगा रहे हैं और लोगों का उपचार कराने का पूरा प्रयास कर रहे हैं।
डॉ. आशाराम, सीएमओ