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नही हो पाया सूर्य कुंड का सौंदर्य करण, बन कर रह गई दीवारें

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बदायूं।
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बदायूं के प्राचीन नाम बदौंगढ़ में राजा महीपाल सिंह ने अपनी राजधानी में शहर से करीब डेढ़ किलो मीटर दूरी पर 11वीं शताब्दी में सूर्यकुंड का निर्माण कराया था। पुराने दौर के कुछ अवशेष समेटे सूर्यकुंड कभी किसी सियासी दल के चुनाव एजेंडे में शामिल नहीं हुआ। पिछली सपा सरकार के सांसद ने इसके सुंदरीकरण का एजेंडा जरूर तैयार किया था, लेकिन छोटे शहर में एक पर्यटन स्थल का विजन नहीं बना।
करीब एक करोड़ रुपये सूर्यकुंड की बाउंड्री के नाम पर खर्च तो किए गए, बाउंड्री भी बन गई, लेकिन सूर्यकुंड आज भी स्वच्छता और सुंदरीकरण के लिए तरस रहा है। पड़ोसी गांव के लोग अपनी भैंसों को सूर्यकुंड परिसर में चराते हैं, मछली मारते हैं। यह जुआरियों का अड्डा भी बन गया है। रही बची कसर लोग यहां शौच करके पूरी कर देते हैं। यह दुर्भाग्य की बात है कि किसी राजा ने नहाने के लिए पवित्र सूर्यकुंड का निर्माण कराया था, लेकिन आज लोग उसमें शौच कर रहे हैं। शनिवार को लोग वहां मछली मारते हुए, जुआरी जुआ खेलते और इसी परिसर में महिलाएं शौच को जातीं मिली। परिसर में भैंस चराते लोगों ने कहा कि सूर्यकुंड परिसर में जूनियर विद्यालय है। इसलिए यह गेट हमेशा खुला रहता है। इससे गांव के लोग भैंस चराने और शौच को आ जाते हैं। ऐसे में करोड़ों की लागत से बनी बाउंड्री का कोई महत्व नहीं है।
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एक करोड़ रुपये से होना था सुंदरीकरण
नौ सो मीटर दीवार के अंदर करीब तीन हेक्टयर में फैले सूर्यकुंड पर स्थानीय लोगों ने कब्जा कर लिया है। इसके परिसर को लोग अपने निजी कामों में इस्तेमाल करते हैं। इसके लिए एक करोड़ पांच हजार का बजत आना था, जिसमें से 61 लाख 31 हजार रुपये का बजट मिला। इसमें एक लाख रुपये सीढ़ियों के लिए मिले, बाकी शेष रकम 60 लाख रुपये नौ सौ मीटर बाउंड्री बनाने को मिले।
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कितना बजट किससे मिला
आने वाला बजट नाम मिला हुआ बजट
25 लाख रुपये धर्मेंद यादव, सांसद 25 लाख रुपये
44.14 लाख रुपये आलोक तिवारी, राज्य सभा सांसद 21.99 लाख रुपये
28.99 लाख रुपये मुनव्वर अली, राज्य सभा सांसद 13.54 लाख रुपये
1.92 लाख रुपये अरविंद कुमार, राज्य सभा सांसद 78000 रुपये
करोड़ों रुपये का प्रोजेक्ट है, जिला प्रशासन की ओर से सूर्यकुंड के जीर्णोद्धार के लिए प्रस्ताव तैयार करके शासन को भेेजा गया था।
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कैसे हुआ सूर्यकुंड का निर्माण
प्राचीन काल में बदायूं का नाम बादौगढ़ हुआ करता था, उस समय राजा महीपाल सिंह ने अपनी रानी और परिवार की महिलाओं को जल क्रीड़ा करने के लिए करीब 15 फुट गहरे सूर्यकुंड का निर्माण कराया था। सूर्यकुंड के पास नौ सतियों के मठ भी बने हुए हैं। जानकार लोगों के अनुसार यह मठ तब के हैं जब सती प्रथा के दौरान महिलाएं सती हुआ करतीं थीं।
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वर्जन----
सूर्यकुंड की फाइल के बारे में जानकारी की जाएगी। वहां दौरा भी किया जाएगा। अगर उसे पर्यटक स्थल के रूप में विकसित किया जाता सकता है तो इस काम को किया जाएगा।
-अनिता श्रीवास्तव, डीएम
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