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खतरों के खिलाड़ी, रेल की पटरियों पर खुले में जाते हैं शौच

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दबतोरी। बिसौली से महज नौ किलोमीटर दूर बसे दबतोरी गांव के लोग खतरों के खिलाड़ी से कम नहीं हैं। बिना अपनी परवाह किए रेल की पटरियों के आसपास ही नहीं बल्कि पटरियों के बीच में भी शौच करते हैं। कारण सिर्फ एक कि घर में शौचालय नहीं है।
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दबतोरी में करीब 550 परिवार निवास करते हैं। जिसमें चार सौ परिवारों के लोग आर्थिक स्थिति ठीक नहीं होने की वजह से घरों में शौचालय निर्माण नहीं करा पाए। गरीब परिवारों के पुरुषों के अलावा महिलाओं को भी खुले में शौच को जाना पड़ता है। गांव अभी तक ओडीएफ योजना में चयनित नहीं हुआ है। इसी गांव के बंटी ठाकुर ने बताया कि गांव के लोग काफी गरीब हैं लेकिन जो संपन्न हैं वह भी घर में शौचालय नहीं बनवा रहे हैं। खुले में शौच जाने के कारण गांव में चारों तरफ गंदगी फैली है। अरुण कठेरिया ने बताया गांव का कोई रास्ता इस गंदगी से अछूता नहीं है। लोगों को उस गंदगी से रोज दो चार होना पड़ता है। समस्या का निदान होना अति आवश्यक है। गांव के सचिव गजेंद्र सिंह ने बताया कि गांव में मात्र दस प्रतिशत ही लोगों के घरों में शौचालय बने हैं। गांव का सर्वे कराया गया है। जिसमें 50 लोगों की सूची विभाग को भेजी गई है। मंजूरी मिलते ही उनके घरों में शौचालय बनवा दिए जाएंगे। बाकी के लिए प्रयास जारी हैं।
वर्जन-
मुसिया नगला न्याय पंचायत के आठ गांव का सचिव जुलाई में जिला पंचायत राज अधिकारी ने बनाया था लेकिन दबतोरा, दौलतपुर, ललुआनगला, दबतोरी, करेंगी, भरतपुर गांव में तैनात सचिव ने डेढ़ माह बाद भी चार्ज नहीं दिया है। जिससे काम करने में असुविधा हो रही है। विभाग को चार्ज न देने की सूचना दे दी है। तीन माह बाद उनको सेवानिवृत्त होना है।
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-सतीश चंद्र मिश्रा, सचिव न्याय पंचायत, मुसियानगला
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वर्जन र न्याय पंचायत मुसियानगला पर सतीश चंद्र मिश्रा सचिव नियुक्त हैं। उन्हें चार्ज नहीं देने की बात संज्ञान में नहीं आई है। यदि ऐसा है तो वह जानकारी की जाएगी। सभी गांवों को ओडीएफ कराकर पात्र लोगों को लाभ दिलाकर शौचालय बनवाए जाएंगे। बह आसफपुर ब्लॉक के प्रभारी बीडीओ बने हैं।
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- नरेंद्र पाल सिंह, जिला भूमि संरक्षण अधिकारी
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फोटो-
-बहुत गरीब परिवार है, बच्चे मजदूरी करके घर चलाते हैं। सरकार से कोई मदद आज तक नहीं मिली है।- शिव देई।
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फोटो-
-मात्र तीन बीघा जमीन है। कच्चा मकान है। कोई आय का ठोस साधन नहीं है। मेहनत मजदूरी करके घर का गुजारा चलता है। शौचालय कैसे बने।
- प्रेमवती।
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फोटो-
-हम भी चाहते हैं कि घर में शौचालय हो पर गरीबी के कारण नहीं बन पा रहा है। सरकार से मदद मिले तो शौचालय बन जाएगा।
-विमला।
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फोटो-
घर में शौचालय नहीं बना है। परिवार की आर्थिक हालत ठीक नहीं है। मजबूर होकर रेल पटरियों के किनारे शौच को जाना पड़ता है।
-संतोष।
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फोटो-
गरीबी के कारण घर में शौचालय नहीं है। भोर में जल्दी उठकर आसपास की महिलाओं के साथ खुले में शौच को जाना पड़ता है।
- राखी।
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