अमर उजाला ब्यूरो
बदायूं। तीन तलाक पर मंगलवार को आए सुप्रीम कोर्ट के फैसले का मुस्लिम धर्म के बुद्धिजीवी वर्ग और धर्म गुरुओं ने सम्मान किया है। इसके साथ यह भी कहा है कि अगर अगर इस पर कानून बनाया जाए तो तो वह शरीयत के मुताबिक होना चाहिए। मुस्लिम पर्सनल लॉ और संविधान में धार्मिक स्वतंत्रता का भी ख्याल रखा जाना चाहिए। गुस्से या शराब के नशे में तीन तलाक को महिला वर्ग ने गलत बताया है।
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शरीयत में हर हल मौजूद
शरीयत और कुरान शरीफ में हर समस्या का हल मौजूद है। सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर कोई टिप्पणी नहीं की जा सकती। अब सरकार को इस पर कानून बनाना है। सरकार को चाहिए कि पर्सनल लॉ का ध्यान रखा जाए।
-डॉ. संजीदा आलम
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धार्मिक स्वतंत्रता का ध्यान रखा जाए
संविधान ने सभी को धार्मिक स्वतंत्रता का अधिकार दिया है। सुप्रीम कोर्ट का फैसला स्वागत योग्य है। सरकार को चाहिए कि तीन तलाक पर कानून बनाते वक्त धार्मिक स्वतंत्रता और अल्पसंख्यकों के अधिकारों का ध्यान रखे।
-नुशरत जुबैर
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सभी धर्मों में अपनी-अपनी मान्यताएं
संविधान ने सभी धर्मों के लोगों के धार्मिक स्वतंत्रता का अधिकार दिया है। संविधान और सुप्रीम कोर्ट सर्वोच्च हैं। तीन तलाक पर सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद सरकार को कानून बनाना है। इसमें सभी पक्षों का ध्यान रखा जाना चाहिए।
-मुजम्मिल जहां
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पर्सनल लॉ बोर्ड संविधान के साथ
भारत में मजहब के मुताबिक सभी को स्वतंत्रता प्राप्त है। मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड संविधान के साथ है। तीन तलाक पर कानून शरीयत और धार्मिक स्वतंत्रता को देखते हुए बनाना चाहिए। कोर्ट के फैसले पर कोई ऐतराज नहीं है।
-डॉ. राबिया शकील
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मुस्लिम धर्म गुरु की बात
सुप्रीम कोर्ट का फैसला स्वागत योग्य है। मुस्लिम धर्म में गुस्से में या शराब के नशे में तीन तलाक को जायज नहीं माना गया है। एक दम किसी महिला को तीन तलाक देना ठीक नहीं। अब तीन तलाक पर सरकार को कानून बनाना है। जरूरी है कि धार्मिक स्वतंत्रता के साथ शरीयत और पर्सनल लॉ को ध्यान में रखते हुए कानून बनाया जाना चाहिए।
- कारी शुएब साहब, धर्म गुरु
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बुद्धिजीवी कोर्ट के फैसले के साथ
सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर उंगली नहीं उठाई जानी चाहिए। सर्वोच्च न्यायालय ने जो फैसला दिया है वह स्वागत के योग्य है। हिंदुस्तान में सभी धर्मों के लोगों को धार्मिक स्वतंत्रता का अधिकार है। ऐसे में सरकार को तीन तलाक पर कानून बनाते वक्त शरीयत और पर्सनल लॉ का ध्यान रखना चाहिए। इस पर राजनीतिक नहीं होनी चाहिए।
-डॉ. नुसरत हुसैन