अमर उजाला ब्यूरो
बदायूं। प्रांतीय आह्वान पर दो दिनी आंदोलन के तहत पुरानी पेंशन समेत 15 सूत्री मांगों के समर्थन में जिले भर के बेसिक के शिक्षक-शिक्षिकाओं ने यहां बीएसए दफ्तर पर धरना-प्रदर्शन किया। शिक्षकों ने एलान किया यदि पुरानी पेंशन और अन्य मांगों को पूरा नहीं किया गया तो प्रदेश भर में बड़े स्तर पर आंदोलन किया जाएगा। शिक्षक समाज अपना हक मांग रहा है। बुधवार को मांगों को पूरा कराने के लिए मुख्यमंत्री को संबोधित ज्ञापन जिलाधिकारी को सौंपेंगे।
धरने को संबोधित करते हुए संघ के जिलाध्यक्ष चंद्रकेश यादव ने कहा कि शिक्षकों की मांगें काफी समय से लंबित हैं। कई बार सरकार से मांग भी की गई है किंतु सरकार ने उन्हें पूरा नहीं किया। जिसकी वजह से प्रांतीय आह्वान पर हर जिले में दो दिवसीय धरना-प्रदर्शन को शिक्षकों को मजबूर होना पड़ा है। प्रदेश भर में शिक्षक एकजुट है और अपनी मांगों पर पूरा कराकर रहेंगे। अन्य वक्ताओं ने कहा कि जूनियर हाईस्कूलों में प्रधानाध्यापकों के रिक्त पदों को प्रमोशन के जरिए भरा जाए। रंगाई-पुताई की धनराशि बढ़ाई जाए। राज्य कर्मियों के तरह शिक्षकों को कैशलैस चिकित्सा सुविधा दी जाए। एमडीएम का संचालन एनजीओ के जरिए कराया जाए। वक्ताओं ने कहा कि लगातार गैरहाजिर रहने वाले बच्चों के अभिभावकों को मिलने वाली सरकारी सुविधाओं को बंद किया जाए। वर्ष 2005 के बाद नियुक्त सभी शिक्षकों को पुरानी पेंशन दी जाए। यह संघ की प्रमुख मांगों में से एक है।
वक्ताओं ने कहा कि यदि सरकार ने मांगों को पूरा नहीं किया तो शिक्षक समाज खामोशी की चादर ओढ़कर बैठने वाला नहीं है। पूरे प्रदेश में जल्द ही उग्र आंदोलन किया जाएगा। धरना-प्रदर्शन में शैलेंद्र सिंह, सलमान खां, दामोदर सिंह, अशोक यादव, उदयवीर सिंह, अराफत खां, सुशील चौधरी, सुरेंद्र सिंह, संजीव शर्मा, अरविंद दीक्षित,अनुज शर्मा,आफाक अहमद, सुरजीत सिंह, जितेंद्र सिंह, वसीम अहमद, सौरभ श्रीवास्तव, अरविंद जैन, ब्रजेश शर्मा, उजैर अहमद,अब्दुल राशिद, राजीव कुमार, देवेंद्र कुमार, महेश चंद्र,मुफीद आलम, राजेश सक्सेना, अखिलेश पांड़ेय, राजवीर सिंह, मोरध्वज आदि हजारों शिक्षक-शिक्षिकाएं शामिल रहे।
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आज देंगे सीएम को संबोधित ज्ञापन
बदायूं। प्राथमिक शिक्षक संघ के जिलाध्यक्ष चंद्रकेश यादव ने बताया कि आंदोलन के दूसरे दिन बुधवार को सभी मांगों के हल को मुख्यमंत्री को संबोधित ज्ञापन डीएम को दिया जाएगा।
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बुढ़ापे की लाठी है पुरानी पेंशन, मिलनी चाहिए
बदायूं। कोई भी कर्मचारी हो पेंशन उसके बुढ़ापे की लाठी होती है। यदि यहीं नहीं मिलेगी तो उसका बुढ़ापा कैसे कटेगा। सरकार को इस मसले पर गंभीरता से सोचते हुए शिक्षकों के हित में कदम उठाकर पुरानी पेंशन को बहाल करना चाहिए। धरने में शामिल होने आए शिक्षकों ने अपनी बात को कहा।
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शिक्षक काफी समय से अपनी मांगों को पूरा कराने की मांग कर रहे हैं। सरकार को सभी मांगों को जल्द पूरा करना चाहिए।
-जसवीर सिंह
पेंशन बुढ़ापे की लाठी होती है। जो हर कर्मचारी को मिलनी चाहिए। सरकार को गंभीरता से कदम उठाना इसे बहाल किया जाना चाहिए। बाकी जो भी मांगें लंबित हैं उन पर भी गंभीरता से विचार करना चाहिए। -जितेंद्र सिंह
शिक्षक को राष्ट्र निर्माता कहा जाता है,लेकिन आज इस राष्ट्र निर्माता की स्थिति खराब है। उसे पेंशन तक नहीं मिलेगी। सरकार को पुरानी पेंशन लागू करना चाहिए।
-देवेंद्र कुमार
शिक्षक पर हर किसी की नजर रहती है। समाज में उसे सम्मान भी मिलता है। फिर क्यों उसकी उपेक्षा की जा रही है। जो भी मांगें हैं उन्हें पूरा किया जाना चाहिए।
-सुरजीत सिंह
शिक्षक कभी भी आक्रामक नहीं होता है,लेकिन जब उसे दबाया या उसकी उपेक्षा की जाती है तो वह भी अपने हक को सड़क पर आ जाता है।
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जब जनप्रतिनिधियों को पेंशन दी जा सकती है तो शिक्षकों को क्यों नहीं। शिक्षक तो राष्ट्र निर्माता कहा जाता है। उसे भी पुरानी पेंशन दी जाए ताकि उसका बुढ़ापा अच्छे से कट सके।
-सौरभ श्रीवास्तव