समाज कल्याण मंत्री अवधेश प्रसाद द्वारा समाजवादी पार्टी के घोषणा पत्र की तुलना गीता-कुरान से करने पर विधान परिषद में कांग्रेस और बसपा के सदस्यों ने कड़ी आपत्ति जताई। मंत्री के माफी मांगने या उनके खिलाफ निंदा प्रस्ताव की मांग करते हुए कांग्रेस सदस्य सदन से बहिर्गमन कर गए। बसपा सदस्यों ने भी वैल में आकर नारेबाजी की। हंगामे के चलते सभापति गणेश शंकर पांडेय ने 15 मिनट के लिए सदन की कार्यवाही स्थगित कर दी।
समाज कल्याण मंत्री ने मंगलवार को एक सवाल के जवाब में कहा कि 17 पिछड़ी जातियों को अनुसूचित जाति में सम्मलित करने के लिए केंद्र सरकार को प्रस्ताव भेजा गया है। बसपा के लालचंद निषाद ने उनसे पूछा कि प्रस्ताव भेजने का आधार क्या ह?
इस पर मंत्री ने शोध समिति की रिपोर्ट और सपा के घोषणापत्र को इसका आधार बताया। उन्होंने कहा कि हमारे लिए सपा का घोषणापत्र गीता-कुरान की तरह है। हमने इसमें 17 पिछड़ी जातियों को अनुसूचित जाति में शामिल कराने का वादा किया था।
इस दौरान कांग्रेस के नसीब पठान ने व्यवस्था प्रश्न उठाते हुए घोषणापत्र की तुलना गीता-कुरान से किए जाने को धर्मग्रंथों और उन्हें मानने वालों का अपमान बताया। उन्होंने सभापति से यह टिप्पणी कार्यवाही से निकालने की मांग की।
परिषद में नेता विरोधी दल नसीमुद्दीन सिद्दीकी ने इसे एक वर्ग का अपमान बताया। राजस्व मंत्री अंबिका चौधरी ने कहा कि हम गीता-कुरान से तुलना नहीं कर रहे हैं, लेकिन हमारे लिए घोषणापत्र की पवित्रता उसी तरह है जैसे धर्मग्रथों को मानने वालों के लिए इनकी पवित्रता है।
इस पर नसीब पठान फिर खड़े हो गए और मंत्री से खेद जताने या उनके खिलाफ निंदा प्रस्ताव लाने की मांग करने लगे। नसीमुद्दीन सिद्दीकी ने भी विरोध जताया। उन्होंने सपा घोषणापत्र को झूठ का दस्तावेज बताया। कांग्रेस सदस्य इस मुद्दे पर सदन से चले गए।
बसपा सदस्य भी वैल में आकर नारेबाजी करने लगे। सभापति ने सदन की कार्यवाही 15 मिनट के लिए स्थगित कर दी। उन्होंने कहा कि गीता और कुरान पवित्र ग्रंथ हैं। इनके बारे में जो आपत्तिजनक अंश होगा, उसे हटा दिया जाएगा।