- झालू सहकारी संघ का 20 सालों से नहीं खुला ताला, भवन हो चुका खंडहर
-धरातल पर बंद फिर भी सहकारी संघ की प्रबंध समिति का होता है चुनाव
संवाद न्यूज एजेंसी
झालू/बिजनौर। व्यापार शून्य, 20 सालों से ताला लटका है। मगर, सहकारी संघ झालू चल रहा है सिर्फ कागजों पर। धरातल पर संघ का भवन भी जर्जर है। कागजों पर ही बाकायदा चुनाव भी कराए जाते हैं। मौजूदा वक्त में भी इस सहकारी संघ की प्रबंध समिति भी है। इतना ही नहीं, सहकारी संस्थाओं के लिए प्रतिनिधि भी भेजे जाते हैं।
झालू में ठाकुरद्वारा मंदिर के पास 1949 में सहकारी संघ लिमिटेड एवं बीज भंडार अस्तित्व में आया। इसके बाद से किसानों को उर्वरक और बीज मुहैया कराए जाते रहे। वहीं संघ ने खूब व्यापार भी किया। बाद में सहकारिता विभाग की उदासीनता और लापरवाही के चलते सहकारी संघ अर्श से फर्श की ओर जाने लगा। अब आलम ये है कि बीते 20 सालों से इस संघ का ताला ही नहीं खुला।
वीर सिंह, कृष्ण गोपाल, महेंद्र सिंह, राजेंद्र सिंह, धीरेंद्र सिंह ने बताया कि सहकारी संघ का कार्यालय करीब 20 सालों से जर्जर अवस्था में बंद पड़ा हुआ है। यहां से अब किसानों को खाद, बीज आदि सरकारी योजनाओं का लाभ नहीं मिलता। आरोप है सचिव की तैनाती होने पर वह आने को तैयार नहीं है। डॉ कामेंद्र सिंह का कहना है कि सहकारी संघ एवं बीज भंडार बंद होने से किसानों को खाद लेने के लिए निजी दुकानदारों से महंगे दामों पर खरीदने को मजबूर हैं। मुनेन्द्र सिंह का कहना है कि सहकारी संघ बंद होने से किसानों को भारी समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है। जल्द की उच्चाधिकारियों को इस संबंध में अवगत कराने के लिए विचार किया जाएगा। सत्यवीर सिंह का कहना है कि सहकारी संघ लिमिटेड पर एमडी की तैनाती होने के बावजूद वह नहीं बैठते है। किसान परेशान है।
संचालक मंडल के लिए निर्वाचन किया जाता है। मगर, कारोबार नहीं होने से कार्यालय बंद पड़ा है। अब उनका झालू संघ से तबादला हो गया है। - धर्मपाल सिंह, पूर्व सचिव, सहकारी संघ
सहकारी संघ अब कोई व्यापार नहीं होता है। प्रबंध समिति का चुनाव होता है। चुनाव की प्रक्रिया भी सहकारी समिति में पूरी की जाती है। - कौशल चौधरी, सभापति, सहकारी संघ झालू