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इंजीनियरिंग में बढ़ा युवाओं का रूझान

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डा.राघव मेहरा। - फोटो : BIJNOR
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इंजीनियरिंग में बढ़ा युवाओं का रूझान
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बिजनौर। इंजीनियरिंग एक बार फिर से युवाओं का पसंदीदा कोर्स बन गया है। इंजीनियरिंग में युवाओं ने फिर से दाखिले लेने में दिलचस्पी दिखाई है। पिछले साल जहां कॉलेज दाखिले कम होने से आर्थिक संकट से जूझ रहे थे, वहां पर स्थिति अब सुधरी है। दाखिले की संख्या पिछले साल के मुकाबले बढ़ी है। हालांकि शत प्रतिशत सीट इस साल भी नहीं भर पाएंगी।
बिजनौर जिले का बैराज पुल इंजीनियरिंग का शानदार नमूना है। जिले के युवा पहले से ही इंजीनियरिंग को तवज्जो देते रहे हैं। मेट्रो के डायरेक्टर मंगू सिंह भी बिजनौर के ही रहने वाले हैं। जिले में इंजीनियरिंग के एक सरकारी कॉलेज सहित छह कॉलेज हैं। तीनों कॉलेज में करीब दो हजार सीट हैं। पिछले साल जिले के इंजीनियरिंग कॉलेज में 70 प्रतिशत सीट खाली रह गईं थी। जिले के अलावा युवा बाहर के कॉलेज में भी दाखिले ले रहे थे। सीट खाली रहने से इंजीनियरिंग कॉलेज को भारी नुकसान उठाना पड़ा था। लेकिन इस बार स्थिति सुधरी है।
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इंजीनियरिंग में दाखिले लेने के लिए युवा कॉलेज में आ रहे हैं। आईआईटी, सिविल इंजीनियरिंग, कंप्यूटर इंजीनियरिंग, इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग युवाओं के पसंदीदा विषय हैं। युवाओं को लगता है कि तकनीक के युग में तकनीकी कोर्स से ही रोजगार मिलना थोड़ा आसान होता है। इसलिए युवा इंजीनियरिंग की ओर फिर से जा रहे हैं। इंजीनियरिंग उन चुनिंदा कोर्स में से एक है जिनमे पढ़ाई करते हुए ही नौकरी के लिए प्रस्ताव आने लगते हैं। भगवंत इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नालॉजी के असिस्टेंट डायरेक्टर डॉ. राघव मेहरा का कहना है कि युवाओं का रुझान इंजीनियरिंग में बढ़ा है। युवा दूसरे जिलों के बजाए अपने जिले के कॉलेज में प्रवेश ले रहे हैं। जो प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे हैं वे भी इंजीनियरिंग में प्रवेश ले रहे हैं।
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कोई साथी नहीं बेरोजगार
इंजीनियरिंग कर गुरुग्राम में जॉब कर रहे सिविल इंजीनियर उत्कर्ष सुयोग का कहना है कि इंजीनियिंग की देश में बहुत मांग है। उनके साथ इंजीनियरिंग की पढ़ाई करने वाला कोई भी साथी बेरोजगार नहीं है। इंजीनियरिंग में जॉब पाने और आगे बढ़ने के अपार मौके हैं।

सिविल इंजीनियर उत्कर्ष सुयोग।- फोटो : BIJNOR

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