बिजनौर में विवेक कॉलेज में कार्यशाला का दीप जलाकर शुभारंभ करते अतिथिगण।
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यौनिक हिंसा पर कार्यशाला का समापन
बिजनौर। कार्यस्थलों पर यौनिक हिंसा को रोकने एवं सामाजिक व न्यायिक उत्तरदायित्व को लेकर विवेक कॉंलेज में आयोजित राष्ट्रीय संगोष्ठी के दूसरे दिन 117 से अधिक शोध-पत्र प्रस्तुत किए गए। इस अवसर पर सभी से महिलाओं पर होने वाली हिंसा को रोकने के लिए एकजुट होने का आह्वान किया गया।
विवेक कॉलेज में दो दिवसीय संगोष्ठी का समापन हो गया। द्वितीय सत्र की अध्यक्षता बड़ोदरा के प्रो. अंकुर शर्मा ने की। प्रो. सक्सेना ने कहा कि महिलाओं पर होने वाली प्रत्येक हिंसा को रोकने के लिए पुरुषों की सहभागिता बेहद ही जरूरी है। तृतीय सत्र की अध्यक्षता कर रही दिल्ली विश्वविद्यालय की प्रो. नीना पांडेय ने कहा कि महिलाओं के साथ होने वाली हिंसा के लिए सामाजिक संस्थाओं का विघटन तथा पितृ सत्तात्मक व्यवस्था उत्तरदायी है।
मुख्य अतिथि महात्मा गांधी केंद्रीय विश्वविद्यालय बिहार से आए प्रो. त्रिलोचन शर्मा ने कहा कि महिलाओं को अपनी सुरक्षा के लिए स्वयं प्रयास करने होंगे। आयोजक सचिव जितेंद्र वर्मा ने बताया कि गोष्ठी में कुल आठ राज्य के विश्वविद्यालयों और चार केंद्रीय विश्वविद्यालय से विद्वानों के साथ साथ पांच राज्यों के प्रतिभागियों ने हिस्सा लिया। इसके साथ ही महिला हिंसा पर कार्य कर रही अंतर्राष्ट्रीय संस्था मारथा फैरेल फाउंडेशन के भी प्रतिनिधि विषय विशेषज्ञ के रूप में संगोष्ठी में उपस्थित रहे। शोध पत्रों की संस्तुतियों को एक प्रतिवेदन के माध्यम से राष्ट्रीय महिला आयोग भारत सरकार को भेजी जाएगी। संचालन निधि शुक्ला एवं काजल अरोड़ा ने किया। इस अवसर पर प्रांशु कुमार, अनुज कुमार सजल आदि मौजूद रहे।