मौसम ने दिया साथ, बंपर हो गई गेहूं की पैदावार
बिजनौर। पिछले गन्ना पेराई सत्र में चीनी मिल जल्दी चलने और गेहूं की गहाई के समय कम बारिश होने का फायदा किसानों को मिला है। किसानों ने इस बार पिछले साल के मुकाबले कहीं ज्यादा गेहूं क्रय केंद्रों पर बेच दिया है। अभी गेहूं की बिक्री लगातार बढ़ रही है। इससे किसानों को फसल का उचित दाम मिल रहा है।
गेहूं जिले के किसानों की प्रमुख फसल है और गन्ने के बाद सबसे अधिक रकबा गेहूं का ही रहता है। गेहूं खरीदने के लिए सरकारी 48 गेहूं क्रय केंद्र बनाए गए हैं। क्रय केंद्रों पर एक अप्रैल से खरीदारी हो रही है। किसान अब तक 11 हजार 515 मीट्रिक टन गेहूं बेच चुके हैं, जबकि पिछले साल किसानों ने 15 मई तक आठ हजार 400 मीट्रिक टन गेहूं बेचा था। इसकी वजह है कि साल 2019 में चीनी मिलों ने पेराई नवंबर के मध्य में शुरू की थी। इससे खेत समय से खाली नहीं हुए थे। गेहूं की कटाई और गहाई के समय बारिश हुई और मार्च में लॉकडाउन लागू कर दिया गया था।
पिछले साल लॉकडाउन का सख्ती से पालन हुआ था। हालांकि किसानों को क्रय केंद्रों पर गेहूं बेचने की छूट थी लेकिन किसान खुद भी क्रय केंद्रों पर कम आए थे। लेकिन इस बार इस तरह की परिस्थिति नहीं हुई। चीनी मिल नवंबर की शुरू में ही चल गईं, जिससे गेहूं जल्दी बोया गया। गहाई के समय ज्यादा बारिश नहीं हुई और कोरोना कर्फ्यू भी मई में लगा। इससे किसानों को क्रय केंद्रों पर गेहूं बेचने के लिए काफी समय मिल गया।
- होनी चाहिए शत प्रतिशत खरीदारी
भाकियू युवा के प्रदेश अध्यक्ष दिगंबर सिंह का कहना है कि सरकारी क्रय केंद्रों पर गेहूं की शत प्रतिशत खरीदारी होनी चाहिए। अगर ऐसा न हुआ तो अफसरों के कार्यालय में किसान गेहूं भर देंगे।
अभी मिला ज्यादा मौका
राष्ट्रीय किसान मजदूर संगठन जिलाध्यक्ष विनोद कुमार के अनुसार पिछले साल के मुकाबले अभी किसानों को गेहूं बेचने का ज्यादा मौका मिला है। कोरोना कर्फ्यू में भी किसान गेहूं बेच रहे हैं। अगर किसानों को परेशान किया गया तो आंदोलन किया जाएगा।