बिजनौर में जिले में लगाए कृषि मेले में किसानों से कहा गया कि वे वैज्ञानिक तरीके से खेती करें तभी उनकी लागत कम होगी और मालामाल हो पाएंगे।
सीडीओ डा. इंद्रमणि त्रिपाठी ने रबी सीजन में बीजों की प्रजातियों की बुआई से पूर्व जांच करने की हिदायत दी है। इसके साथ ही किसानों को वैज्ञानिक विधि से उत्पादन पर जोर दिया।
प्रदर्शनी मैदान में सीडओ ने प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना के तहत आयोजित कृषि मेले का फीता काटकर उद्घाटन किया। मेले में किसानों की संख्या काफी कम रही। मेले में आए कुछ किसानों का कहना था कि शुगर मिलों में पेराई शुरू हो चुका है। गंगा स्नान भी नजदीक है। इसलिए किसानों की संख्या कम रही। मेले में गन्ना, सोलर, कृषि , मत्स्य सहित अन्य विभागों के स्टाल थे। गन्ना विभाग के स्टाल को छोड़कर अन्य स्टालों में किसानों ने कम रुचि दिखाई । इस दौरान गन्ने की 238 प्रजाति का 15 फुट लंबाई का गन्ना आकर्षण का केंद्र बना था। नया कुछ नही है। इस बार सरकारी स्टाल कुछ कम हैं।
सीडीआे ने किसान सुखदेव सिंह निवासी ग्राम रसूलपुर पित्तनका, मतीन अहमद निवासी ग्राम भोजपुर को लेजर लेंड लेबलर पर, रक्षपाल को सिड्रील पर, मंजीत कौर, सचिन कुमार, कामिल, अवधेश, मुन्नु सिंह, संदीप कुमार,तथा प्रमोद कुमार को रोटावेटर पर अनुदान के स्वीकृति पत्र दिए। उप कृषि निदेशक जसपाल ने कृषि योजनाओं की जानकारी दी। जिला कृषि रक्षा अधिकारी अमरपाल ने फसलों को बीमारी से बचाने की जानकारी दी।
जिला कृषि अधिकारी प्रमोद सिरोही ने मिट्टी का परीक्षण कराने पर जोर दिया। कृषि विज्ञान केंद्र नगीना के वैज्ञानिकों डा. डीपी सिंह, डा. डीएन मिश्रा ने गेंहू की प्रजातियों एवं उनकी बुवाई के बारे में विस्तार से जानकारी दी। उधर, बासमती धान में चावल के कम दाने निकलने की चिंता किसानों के चेहरे पर साफ दिखाई पड़ रही थी। मेले में आए किसान गेंहू की बुवाई के लिए नई प्रजातियों की जानकारी गंभीरता से ले रहे थे। किसानों का कहना था कि दूध का फूंका छाछ में भी फूंक मारकर पीता है। इसलिए किसान रिस्क लेने को तैयार नही है।