बिजनौर। एक दशक पहले तक जिले में जो ठंडी सड़क कहलाती थी, अब गर्मियों में ही वो सड़क सबसे ज्यादा तप रही है। इसका कारण चौड़ीकरण में काटे गए एक लाख से ज्यादा पेड़ हैं। इनमें अकेले हरिद्वार-कांशीपुर मार्ग पर जिले की सीमा में 90 हजार पेड़ काटे गए थे। वहीं नजीबाबाद मार्ग पर पांच हजार पेड़ काट दिए गए थे। इतने ही पेड़ बिजनौर-नगीना रोड से काट दिए गए। इनके अनुपात में इन सड़कों के किनारे पौधरोपण केवल रस्मअदायगी बनकर रह गया है।
जिले में सबसे पहले हरिद्वार-कांशीपुर फोरलेन का निर्माण शुरू हुआ था। जिले में चिड़ियापुर के पास से वादीगढ़ से आगे तक पेड़ कटान किया गया था। इसमें 90 हजार पेड़ काटे गए। वहीं इसके बाद बैराज से नजीबाबाद, बिजनौर में वीकेआईटी से कोतवाली देहात तक दस हजार से ज्यादा पेड़ काटे गए। यह तीनों ही मार्ग पेड़ों की घनी छाया के चलते ठंडी सड़क कहलाते थे।
वहीं अब नौतपा चल रहा है और जिले का तापमान 41 डिग्री से ऊपर चल रहा है। ऐसे में यह तीनों ही सड़कें खूब तप रही हैं वहीं एनएच के किनारे वन विभाग आज तक पौधरोपण नहीं कर पाया है। वहीं काटे गए पेड़ों के दस गुना पौधे लगाने की जिम्मेदारी एनएच ने ली थी। उन्हें दूसरे जिले में पौधे लगाने का वादा वन विभाग से कर दिया।
सहमति और असहमति के बीच फंसा पौधरोपण : पिछले पांच साल से एनएच और वन विभाग के बीच जिले में दस गुना पौधे लगाने पर सहमति और असहमति का दौर चल रहा है। वन विभाग को जमीन चिह्नित कर बतानी थी, ताकि उस पर पौधरोपण हो सके। कमाल यह रहा कि जिले में सहमति नहीं बनी तो दूसरे जिलों में जमीन तलाशी गई। फिलहाल जिले में किसी एनएच के किनारे वन विभाग उस संख्या में पौधे नहीं लगा पाया।