फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

एमएसपी से कम में बिक रहा गेहूं, धान, गन्ना

विज्ञापन
विज्ञापन
बिजनौर। किसान न्यूनतम समर्थन मूल्य वैसे ही नहीं मांग रहे हैं। गेहूं, गन्ना और धान की फसल अब भी बाजार में न्यूनतम समर्थन मूल्य से कम पर बिक रही है। किसानों को मोटे धान के रेट में शरबती धान तक बेचना पड़ा। सरकार की ओर से भले ही न्यूनतम समर्थन मूल्य तय कर दिया जाता है लेकिन कम से कम इतने पर फसल बिकने की गारंटी होती तो किसानों को फसल कम कीमत पर बेचने को मजबूर नहीं होना पड़ता।
विज्ञापन

किसान अपनी फसल बेचने के लिए मंडी समितियों पर ही निर्भर नहीं हैै। किसान बाजार में सीधे व्यापारियों को भी फसल बेचता है। इसके अलावा गेहूं व चावल की फसल को मिलों में भी बेचता है। लॉकडाउन के समय सरकार ने जनता को फ्री में अनाज बांटा। इससे गेहूं के दाम काफी नीचे गिर गए। लॉकडाउन के समय गेहूं के दाम 1500 रुपये प्रति क्विंटल तक रह गए थे। अब भी गेहूं के दाम 1600-1700 रुपये प्रति क्विंटल हैं। यह स्थिति तब है जबकि गेहूं का एमएसपी 1925 रुपये प्रति क्विंटल है और गेहूं का ऑफ सीजन है। इस समय गेहूं के दाम 2100 रुपये प्रति क्विंटल से भी अधिक रहते थे।
धान का न्यूनतम समर्थन मूल्य भी 1868 से 1888 रुपये प्रति क्विंटल है। लेकिन बाजार में अब भी धान का मूल्य 1300 से 1400 रुपये प्रति क्विंटल तक है। धान क्रय केंद्रों पर मोटा धान खरीदा जाता है। शरबती धान की कीमत इससे अधिक होती है। लेकिन इस बार किसानों को शरबती धान भी मोटे धान की कीमत पर बेचना पड़ा है। जसपुर निवासी धान मिल के मालिक दानिश का कहना है कि वे 1400 रुपये प्रति क्विंटल पर धान खरीद रहे हैं।
विज्ञापन

चावल के रेट बढ़े, धान के घटे
धान का मूल्य भले ही न बढ़ा हो लेकिन चावल के रेट बढ़ गए हैं। शरबती का मूल्य 39 से 44 तथा बासमती की कीमत 58 से 60 रुपये प्रति किग्रा चल रहे हैं। चावल के दाम पिछले साल से अधिक हैं लेकिन धान के रेट बहुत कम हैं।
मजबूरी में कोल्हू, क्रेशरों पर बेचना पड़ रहा है गन्ना
गन्ना जिले की प्रमुख फसल है। गन्ने का न्यूनतम समर्थन मूल्य 325 रुपये प्रति क्विंटल निर्धारित है। लेकिन ये रेट चीनी मिलों पर ही मिलता है। कोल्हू व क्रेशरों पर गन्ने के दाम 240 से 260 रुपये प्रति क्विंटल तक है। किसान मजबूरी में इसी रेट पर गन्ना बेच रहे हैं। जिले में 800 से ज्यादा कोल्हू व 80 से ज्यादा क्रेशर चल रहे हैं। किसान को प्रति क्विंटल गन्ने पर 60 से 80 रुपये तक का नुकसान होता है। हल्दौर में कोल्हू चला रहे राकेश सैनी के अनुसार गुड़ महंगा होने पर ही कोल्हू, क्रेशर पर गन्ने के दाम ज्यादा रहते हैं।
एमएसपी से कम खरीद पर हो सजा
भाकियू के युवा प्रदेश अध्यक्ष दिगंबर सिंह का कहना है कि एमएसपी संगठन की मांग है। इसे लेकर ही किसान आंदोलन किया गया है। एमएसपी से कम पर फसल खरीदने वालों को सजा होनी चाहिए।
किसानों से लूट बंद कराए सरकार
भाकियू अंबावता जिलाध्यक्ष विजय सिंह के अनुसार एमएसपी पर भी फसल खरीद की गारंटी न होने से किसान को कम रेट पर फसल बेचनी पड़ रही है। सरकार को इस लूट को अब बंद कराना चाहिए।
एमएसपी पूंजीपतियों और व्यापारियों के कब्जे में
आजाद किसान यूनियन के वेस्ट यूपी महासचिव कैलाश लांबा के अनुसार एमएसपी पूंजीपतियों व व्यापारियों के कब्जे में है। सरकार गारंटी ले कि एमएसपी से कम पर फसल नहीं खरीदेगी तभी किसानों का कुछ भला हो सकता है।
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें