बिजनौर। अमर उजाला के अभियान ऽहिंदी हैं हम ऽ के अंतर्गत आयोजित वेबिनार में विद्वानों ने न्यायालय तथा सभी सरकारी कामकाज और पत्र व्यवहार हिंदी में कराने की मांग की।
वेबिनार में जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी महेश चंद्र ने कहा कि परिषदीय विद्यालय कक्षा एक से हिंदी में शिक्षा प्रदान कर रहे हैं। जनपद में 150 विद्यालयों को अंग्रेजी माध्यम किया गया है, इसके बावजूद उन विद्यालयों में भी हिंदी का ज्ञान दिया जाता है। हिंदी के ज्ञान को बढ़ाने के लिए बेसिक शिक्षा विभाग में एक ऐप भी लांच किया गया है । इस ऐप के माध्यम से बच्चे हिंदी से जुड़कर सही व्याकरण का ज्ञान प्राप्त कर रहे हैं। इस ऐप को सभी शिक्षकों के मोबाइल में डाउनलोड कराया जा रहा है।
जिला बार बिजनौर के अध्यक्ष संजीव कुमार बबली ने कहा कि न्यायालय में अधिकांश कार्य अंग्रेजी में होते हैं। सुप्रीम कोर्ट के सभी निर्णय अंग्रेजी में ही होते हैं । हिंदी हमारी है तथा न्यायालयों में सभी कार्य हिंदी भाषा में होनी चाहिए। वह ज्ञापन भेजकर हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट में सभी कार्य हिंदी में कराने की मांग करेंगे।
उप बेसिक शिक्षा अधिकारी के पद से सेवानिवृत्त चंद्रप्रभा गौतम का मानना है कि हिंदी में उच्चारण का बहुत महत्व है। हिंदी में किसी भी शब्द का सही उच्चारण किया जा सकता है ,जो विश्व की किसी अन्य भाषा में नहीं किया जा सकता। हिंदी विश्व की सर्वाधिक वैज्ञानिक भाषा है। महामना मदन मोहन मालवीय द्वारा कहा गया वक्तव्य हिंदी, हिंदू, हिंदुस्तान हर भारतीय के संस्कार में होना चाहिए। हिंदी है हम वतन है की भावना बच्चों में जगाने की आवश्यकता है। हिंदी को संस्कार और व्यवहार में उतारने की आवश्यकता है ।
उत्तर प्रदेश राज्य कर्मचारी महासंघ के जिला अध्यक्ष राकेश शर्मा ने कहा कि उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा निचले स्तर पर ज्यादातर पत्र व्यवहार हिंदी में ही होता है किंतु केंद्र सरकार द्वारा वाला पत्र व्यवहार अंग्रेजी में होता है। केंद्र सरकार को चाहिए कि पूरे देश में हिंदी और क्षेत्रीय भाषाओं में पत्र व्यवहार शुरू कराया जाए । साथ ही सभी प्रदेशों में सचिवालय स्तर पर होने वाले पत्र व्यवहार भी हिंदी भाषा में होनी चाहिए ।
शिक्षक दुष्यंत चौधरी ने कहा कि भाषा विकास के चार चरण होते हैं। सुनना, बोलना, पढ़ना और लिखना। कई बार यहीं पर कमजोर रह जाने पर बच्चों की मौखिक भाषा का विकास नहीं हो पाता। इसके अतिरिक्त पठन तथा लेखन का विकास नहीं हो पाता। इससे भाषा में बुनियादी स्तर पर कमी रह जाती है। छात्र पाठ्यक्रम का आनंद उठाने के स्थान पर पाठ्यक्रम ढोते हैं। हमें छात्रों को सरल भाषा में भाषा ज्ञान कराना चाहिए। मातृभाषा को बच्चा तुरंत सीखता है केवल दिशा दिखाने की आवश्यकता है। ग्राम सिसौना में परिषदीय विद्यालय में शिक्षिका अल्पना का कहना है कि हिंदी से जुड़ाव के लिए बच्चों को कहानी और कविताओं से जोड़ने की आवश्यकता है। बच्चों को संवाद करने दें तथा छोटे मंचों पर छोटी-छोटी प्रतियोगिताएं आयोजित कर बच्चों का उत्साहवर्धन किया जाना चाहिए।