फरवरी तक मध्य गंगा नहर में छोड़ा जा सकता है पानी
बिजनौर की सीमा में बचे नहर के दो हिस्सों में तेजी से चल रहा है काम
66 किमी नहर फरवरी तक हो जाएगी तैयार, परियोजना का 80 प्रतिशत काम पूरा
14 साल पहले शुरू हुआ नहर का निर्माण स्वामित्व विवाद में अटका हुआ था
2020 में सीएम के दखल के बाद समाप्त हुआ सिंचाई और वन विभाग के बीच विवाद
मध्य गंगा नहर परियोजना...
मुख्य नहर 66 किमी
चंदौसी शाखा 60 किमी
बहजोई शाखा 50.800 किमी
वितरण प्रणाली 1065 किमी
अचल चौधरी
बिजनौर। बिजनौर गंगा बैराज से निकलकर बहजोई, संभल-अमरोहा आदि को जाने वाली वाली मध्य गंगा नहर 14 साल बाद पूरी होने जा रही है। बिजनौर में दो स्थानों पर नहर को पूरा करने का काम तेजी से चल रहा है। अमरोहा में भी चार-पांच दिन में विवादों को निपटा लिए जाने का दावा अधिकारी कर रहे हैं। 66 किमी लंबी मुख्य नहर फरवरी माह तक पानी छोड़ने के लिए तैयार हो जाएगी।
साल 2007-08 में मध्य गंगा नहर के द्वितीय चरण का काम शुरू हुआ। बिजनौर बैराज से शुरू हुए निर्माण को गांव रामपुर ठकरा में वन विभाग ने रुकवा दिया था। गांव की करीब पांच हेक्टेयर जमीन को वन विभाग ने अपनी बताया था। सिंचाई विभाग ने ग्रामीणों की जमीन मानते हुए अधिग्रहण किया था। गजट में जमीन ग्रामीणों के नाम पर दर्शायी गई थी और सिंचाई विभाग ने उसी आधार पर उनसे जमीन खरीदी थी। मानचित्र में यह वन विभाग की भूमि थी। वन विभाग ने मानचित्र के अनुसार अपनी जमीन का सीमांकन नहीं किया हुआ था और जमीन पर ग्रामीणों का कब्जा था। इस विवाद के चलते नहर का करीब 150 मीटर जमीन के टुकड़े पर निर्माण रुका हुआ था। साल 2016 में कोर्ट ने भी वन विभाग के पक्ष में फैसला दिया था। गत वर्ष मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने रुके हुई परियोजना की समीक्षा की तो यह मामला भी सामने आया था। सीएम योगी ने दखल देते हुए वन विभाग से सिंचाई विभाग को जमीन देने के लिए कहा था। इसके बाद रुका हुआ काम शुरू हुआ। (संवाद)
-बिजनौर जिले में मुख्य नहर के आठ गैप थे। छह गैप में नहर बना दी गई है। दो जगहों पर काम चल रहा है। आठ दस दिन में पूरा कर लिया जाएगा। मुख्य नहर पर अमरोहा में रेलवे ब्रिज बन रहा है। इसके अलावा अमरोहा में भी तीन चार जगह गैप थे, जिन्हें चार से पांच दिन में पूरा कर लिया जाएगा। परियोजना में 80 प्रतिशत काम पूरा हो चुका है। फरवरी के महीने तक 66 किमी लंबी मुख्य नहर में पानी छोड़ सकते हैं। इसके लिए पूरी तरह तैयार हो जाएगी। अनुराग अग्रवाल, अधीक्षण अभियंता मध्य गंगा नहर, द्वितीय चरण
चार गुना बढ़कर 4417 करोड़ रुपये हो गई लागत
बिजनौर। मध्य गंगा नहर परियोजना 14 साल बाद भी पूरी नहीं हो पाई और निर्माण में हो रही देरी से नहर की लागत बढ़कर चार गुणा तक पहुंच गई है।
शुरुआत से ही विवादों में फंसी यह परियोजना बार-बार लटकती रही। साल 2007-2008 में मध्य गंगा नहर परियोजना शुरू हुई तो उस समय इसकी मूल लागत 1060 करोड़ थी। साल 2016 में पुनरीक्षित बजट बढ़कर 4417 करोड़ पहुंच गया। मार्च 2021 तक इस परियोजना पर 3404 करोड़ खर्च हो चुके हैं। संवाद
परियोजना पूरी होने पर होगी 1850 गांवों की सिंचाई
मध्य गंगा नहर निर्माण पूरा होने पर करीब 1850 गांव की जमीनों को सिंचाई के लिए पानी मिलना है। अमरोहा में छह ब्लॉक में 59 हजार हेक्टेयर, संभल में 70 हजार हेक्टेयर और मुरादाबाद के केवल डींगरपुर ब्लॉक में 16569 हेक्टेयर जमीन की सिंचाई इस परियोजना के पूरा होने से सकेगी।
रजबहों के लिए होना 400 हेक्टेयर जमीन का अधिग्रहण
मुख्य नहर तैयार हो जाएगी लेकिन इससे निकलने वाली बहजोई शाखा, चंदौसी शाखा, रजबहे, अल्पिका, एस्केप आदि के पूरा होने में समय लगेगा। इसके लिए कुल 3218 हेक्टेयर भूमि अधिगृहीत की जानी थी, लेकिन अभी तक केवल करीब 2800 हेक्टेयर जमीन ही अधिगृहीत की गई है। रजबहा या अल्पिकाओं के लिए 400 हेक्टेयर अधिग्रहण होना बाकी है।
बिजनौर में निर्माणाधीन मध्य गंगा नहर में पानी नहीं चलने से उगी झाड़ियां।- फोटो : BIJNOR